मुंबई: शेयर बाजार की दुनिया में IPO का मतलब होता है एक नई उम्मीद, एक बड़ा मौका। जब कोई कंपनी IPO लाने की सोचती है, तो निवेशकों की नजरें उस पर टिक जाती हैं। कुछ ऐसा ही हो रहा था रेंटोमोजो (Rentomojo) के साथ। ऑनलाइन फर्नीचर और घर के सामान किराए पर देने वाली ये कंपनी अपना IPO लाने की तैयारी में थी और बाजार नियामक SEBI ने इसे हरी झंडी भी दिखा दी। लेकिन जनाब, कहते हैं ना कि हर अच्छी कहानी में एक ट्विस्ट होता है, तो यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ है।
SEBI से मंजूरी मिलते ही कंपनी ने राहत की सांस ली होगी कि अब उनका सपना पूरा होने वाला है। लेकिन अभी रुकिए! उनके इस सपने के रास्ते में एक ऐसा रोड़ा अटका है, जिसकी वजह से पूरा प्लान ही डगमगा सकता है।
बात नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) तक जा पहुंची है और मामला अब कोर्ट-कचहरी में है। तो आखिर ये सारा पेच कहां फंसा है और कौन है वो जिसकी वजह से रेंटोमोजो का IPO खतरे में पड़ गया है?
आखिर ये पेच कहां फंसा है और कौन है वो जिसने रोड़ा अटकाया?
दरअसल, रेंटोमोजो के पूर्व को-फाउंडर और COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) अजय नैन ने NCLT की बेंगलुरु बेंच में एक याचिका दायर की है। अजय नैन ने साफ तौर पर मांग की है कि रेंटोमोजो को IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोका जाए।
उनका आरोप है कि साल 2023 में उन्हें गुमराह करके उनकी 9.41% हिस्सेदारी बेचवा दी गई थी। अब अजय नैन अपनी वो हिस्सेदारी वापस पाने की मांग कर रहे हैं।
भई, ये तो वही बात हो गई कि IPO का लड्डू हाथ में आया, लेकिन खाने से पहले ही झगड़ा शुरू हो गया।
कंपनी ने भी इस पर अपनी चाल चली है। IPO के ड्राफ्ट के हिसाब से कंपनी ने NCLT में एक कैविएट दायर कर दी है।
कैविएट का मतलब है कि अगर अजय नैन के मामले में कोर्ट कोई आदेश जारी करता है, तो कंपनी की बात सुने बिना ऐसा न किया जाए। कुल मिलाकर मामला अभी सुनवाई के लिए लिस्टेड है और इसका क्या नतीजा निकलेगा, ये देखना दिलचस्प होगा।
जब तक ये मामला सुलझता नहीं, तब तक रेंटोमोजो के IPO पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रहेगा।
Rentomojo का IPO कितना बड़ा है और क्या प्लान है?
अगर ये NCLT वाला मामला नहीं होता, तो रेंटोमोजो का IPO ठीक-ठाक धूम मचा सकता था। कंपनी की योजना ₹150 करोड़ के नए शेयर जारी करने की है।
हालांकि, इसमें एक प्लस पॉइंट ये भी है कि अगर कंपनी प्री-IPO प्लेसमेंट (IPO आने से पहले ही कुछ चुनिंदा निवेशकों को शेयर बेचना) के जरिए ₹30 करोड़ जुटा लेती है, तो नए शेयरों का साइज थोड़ा कम हो सकता है।
नए शेयरों के अलावा, मौजूदा शेयरहोल्डर्स भी अपनी हिस्सेदारी हल्की करेंगे। ऑफर फॉर सेल (OFS) विंडो के तहत करीब 2.84 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे।
इसमें प्रमोटर्स के साथ-साथ बाकी शेयरहोल्डर्स भी अपनी हिस्सेदारी बेचकर कैश निकालेंगे।
अब बात आती है कि IPO से जुटाए गए पैसे का कंपनी क्या करेगी? जो पैसा ऑफर फॉर सेल से आएगा, वो तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स की जेब में जाएगा। लेकिन जो नए शेयरों से ₹150 करोड़ (या कम, अगर प्री-IPO प्लेसमेंट होता है) मिलेंगे, उनका इस्तेमाल कंपनी कई जरूरी कामों में करेगी।
इसमें सबसे पहले तो कर्ज हल्का करने की बात है। इसके अलावा, वेयरहाउसेज के लाइसेंस फीस और लीज रेंटल का पेमेंट भी इसी पैसे से होगा।
और हां, कुछ पैसा आम कॉरपोरेट उद्देश्यों (General corporate purposes) के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा, यानी रोजमर्रा के काम और कंपनी के विकास के लिए।
क्या है रेंटोमोजो की ताकत, जिसके दम पर IPO लाना चाहती है?
रेंटोमोजो कोई छोटी-मोटी कंपनी नहीं है। IPO के ड्राफ्ट के मुताबिक, फर्नीचर और घर के सामानों को किराए पर देने के मामले में ये देश का सबसे बड़ा ऑनलाइन रेंटल और सब्सक्रिप्शन प्लेटफॉर्म है।
अगर FY25 की बात करें, तो सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई के आधार पर ऑर्गेनाइज्ड फर्नीचर और वॉटर प्योरिफायर को छोड़कर बाकी एप्लाएंसेज के रेंटल मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 42%–47% आंकी गई है। मोटा-मोटी समझ लीजिए कि इस सेक्टर में इनका दबदबा अच्छा-खासा है।
सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से, रेंटोमोजो के पास देश के 22 शहरों में 2,27,511 एक्टिव सब्सक्राइबर थे। इतने सारे कस्टमर्स होना अपने आप में एक बड़ी बात है।
कंपनी ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए जबरदस्त काम किया है। उनके 21 वेयरहाउस हैं, जहां सामान स्टोर होता है, और 67 एक्सपीरियंस स्टोर हैं।
इन एक्सपीरियंस स्टोर्स पर जाकर लोग सामान देख और छू सकते हैं, जिससे उनका भरोसा बढ़ता है। ये सब आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का बिजनेस मॉडल कितना मजबूत है और क्यों वो IPO के जरिए पैसा जुटाना चाहती है।
लेकिन अब सवाल ये है कि क्या अजय नैन की याचिका रेंटोमोजो के IPO की गाड़ी को रोक पाएगी? या कंपनी इस अड़चन को पार करके अपने IPO के सपने को पूरा कर पाएगी? ये तो आने वाला वक्त और NCLT का फैसला ही बताएगा। फिलहाल, निवेशक और बाजार के जानकार दोनों इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।






































