सीवान: आम तौर पर जब कोई मरीज अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में जाता है, तो उसकी यही उम्मीद होती है कि उसका इलाज पूरे प्रोटोकॉल, गोपनीयता और सावधानी के साथ किया जाएगा। लेकिन बिहार के सीवान में जो हुआ, वो सुनकर आप दंग रह जाएंगे। सीवान के मॉडल सदर अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर अब इलाज की जगह ‘रील स्टूडियो’ बन गया है। यहां सिर्फ मरीजों का इलाज ही नहीं हो रहा था, बल्कि उनके सबसे निजी पलों को कैमरे में कैद कर, उस पर फिल्मी गाने लगाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया जा रहा था। सोचिए, एक प्रसूता अपनी ज़िंदगी के सबसे नाजुक लम्हे में है, और कोई उसकी गोपनीयता की धज्जियां उड़ाकर वीडियो बना रहा है। ये सिर्फ एक वीडियो नहीं, ये चिकित्सा नैतिकता और मरीज के विश्वास पर किया गया एक बड़ा हमला है।
ये पूरा मामला सीवान के मॉडल सदर अस्पताल का है। वायरल वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि ऑपरेशन थिएटर में एक महिला का सिजेरियन ऑपरेशन हो रहा है।
वीडियो में प्रमुखता से दिख रही हैं महिला चिकित्सक डॉ. रुबीना और स्टाफ नर्स सविता, जो ऑपरेशन करने में जुटी हुई हैं।
थोड़ी दूरी पर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार भी बैठे हुए दिख रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच, कोई बड़ी ही बेफ़िक्री से इस पूरे ऑपरेशन का वीडियो बना रहा है। ये वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जिसके बाद से अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है।
ऑपरेशन थिएटर में वीडियो बनाने की हिम्मत किसने की?
जिस वक्त एक मां बच्चे को जन्म देने के लिए ऑपरेशन की मेज पर लेटी हुई है, उस वक्त उसकी निजता का सम्मान करना अस्पताल और वहां मौजूद हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन सीवान के सदर अस्पताल में इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया।
वीडियो में दिख रहा है कि ऑपरेशन करने वाली महिला डॉक्टर रुबीना और स्टाफ नर्स सविता बिना मास्क के हैं। ये सबसे चौंकाने वाली बात है।
वहीं, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार मास्क पहने हुए दिख रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या सोशल मीडिया पर चेहरा चमकाने की चाह मरीज की सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के नियमों से भी ज़्यादा ज़रूरी हो गई है?
चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ऑपरेशन के दौरान मास्क पहनना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे अनिवार्य प्रोटोकॉल है। यह सिर्फ डॉक्टर या नर्स की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि मरीज को किसी भी संभावित संक्रमण से बचाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अगर ऑपरेशन करने वाले खुद मास्क नहीं पहनेंगे, तो मरीज को संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। क्या सीवान सदर अस्पताल में काम करने वाले इन चिकित्साकर्मियों को इस बुनियादी नियम की जानकारी नहीं थी? या जानबूझकर इसे अनदेखा किया गया, सिर्फ इसलिए ताकि वीडियो में उनका चेहरा साफ दिख सके?
सोशल मीडिया रील्स की चाहत और नैतिकता का उल्लंघन
मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में रिकॉर्ड किए गए इस बेहद निजी वीडियो को बाद में एडिट किया गया।
उसमें पीछे कोई फिल्मी गाना जोड़ा गया और फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया गया। ये काम अस्पताल के ही किसी स्टाफ द्वारा किए जाने की आशंका है, क्योंकि ऑपरेशन थिएटर में बाहरी व्यक्ति का घुसना मुश्किल होता है।
अब ज़रा सोचिए, एक प्रसूता, जो अस्पताल में अपनी और अपने बच्चे की जान सुरक्षित रखने के लिए आई थी, उसे पता भी नहीं होगा कि उसकी सबसे निजी शारीरिक अवस्था का वीडियो बनाया जा रहा है और उसे पब्लिक प्लेटफॉर्म पर परोसा जा रहा है। ये सिर्फ निजता का हनन नहीं, ये एक तरह का अपराध है।
ये घटना न केवल सीवान सदर अस्पताल की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह चिकित्सा नैतिकता, मरीजों के अधिकारों और अस्पताल के सख्त नियमों का खुला उल्लंघन भी है। मरीज अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं, न कि सोशल मीडिया के लिए "कंटेंट" बनने के लिए।
ये बात हर स्वास्थ्यकर्मी को गांठ बांध लेनी चाहिए। इस तरह की हरकतें मरीजों के मन में अस्पताल और डॉक्टरों के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं, जिसका दूरगामी असर पूरे स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।
अधीक्षक बोले- 'मुझे जानकारी नहीं', सिविल सर्जन ने पल्ला झाड़ा
जब इस पूरे मामले पर सीवान सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह से बात की गई, तो उनका जवाब भी चौंकाने वाला था।
उन्होंने सीधे-सीधे कह दिया कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी ही नहीं थी। अब सवाल ये है कि एक अस्पताल का अधीक्षक, जिसे अस्पताल के हर कोने और हर गतिविधि की जानकारी होनी चाहिए, उसे ऑपरेशन थिएटर के अंदर हुई इतनी बड़ी और गंभीर घटना का पता कैसे नहीं चला? क्या वे अपने पद पर ठीक से जिम्मेदारियां निभा रहे हैं?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सिविल सर्जन श्रीनिवास प्रसाद से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सिविल सर्जन साहब ने कहा कि, "मैं अभी छुट्टी पर हूं और सदर अस्पताल के अंदर क्या हो रहा है इसकी जिम्मेदारी अधीक्षक की है।
इसलिए इसपर अधीक्षक का बयान लीजिए।" ये कैसी व्यवस्था है जहां एक अधिकारी दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहा है और कोई भी इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
क्या बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है?
इस पूरे प्रकरण ने सीवान के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। देखना होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में मरीजों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या ये मामला भी सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।




































