अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अमेरिका में ड्रोन और कैमरे बनाने वाली दिग्गज चीनी कंपनी DJI को लेकर एक बड़ा झमेला खड़ा हो गया है. असल में अमेरिकी सरकार ने पिछले साल ही DJI के नए प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया था. लेकिन अब अमेरिकी संचार आयोग (FCC) को शक है कि DJI चोरी-छिपे दूसरे नामों से अपने प्रोडक्ट अमेरिका में बेच रही है. और इस "छिपाओ-ढूंढो" वाले खेल पर FCC ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. मामला क्या है, क्यों है और इसका असर क्या होगा, चलिए सब एक-एक करके समझते हैं.
बात कुछ यूं है कि पिछले दिसंबर से अमेरिका में DJI के नए डिवाइस बैन हैं. क्यों? क्योंकि DJI को "कवर्ड लिस्ट" (Covered List) में डाल दिया गया है.
ये वो लिस्ट है जिसमें उन विदेशी कंपनियों को शामिल किया जाता है, जो FCC द्वारा तय किए गए सुरक्षा और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरतीं. मोटा-मोटी इसका मतलब ये है कि अमेरिकी सरकार को DJI के प्रोडक्ट्स में कुछ सिक्योरिटी खामियां दिखती हैं.
लेकिन एफसीसी को डीजेआई पर शक क्यों है?
तो भैया, कहानी में असली ट्विस्ट अब आता है. एफसीसी को लगता है कि DJI इतने बड़े मार्केट को ऐसे ही नहीं छोड़ देगा.
वो अब अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड नेम के पीछे छुपकर अपने प्रोडक्ट्स को अमेरिका में "स्नीक" (sneak) कर रहा है, यानी चोरी-छिपे ला रहा है. एफसीसी की नजर उन थर्ड-पार्टी कंपनियों पर पड़ी है, जो नए नाम और ब्रांडिंग के साथ ऐसे ड्रोन और कैमरे बेच रही हैं जो दिखने में और काम में हूबहू DJI के प्रोडक्ट्स जैसे हैं.
और एफसीसी सिर्फ शक के आधार पर नहीं बैठा है. उसने बाकायदा कार्रवाई शुरू कर दी है.
खबरों के मुताबिक, एफसीसी ने ऐसी आठ कंपनियों पर 25,000 डॉलर (करीब 20 लाख रुपये से ज्यादा) का जुर्माना ठोक दिया है. अभी ये तो बस शुरुआत है, क्योंकि अधिकारियों की तरफ से आगे और भी जांच चल रही है.
जिन कंपनियों पर गाज गिरी है, उनमें Cogito Tech, Fikaxo Technology, Lyno Dynamics, Skyhigh, Spatial Hover, SZ Knowact Robot, WaveGo Tech और Xtra Technology शामिल हैं. अगर आप Cogito Tech की वेबसाइट पर जाकर उनके ड्रोन देखेंगे, तो खुद ही अंदाजा लगा लेंगे कि वो DJI के प्रोडक्ट्स से कितने मिलते-जुलते हैं.
देखकर ऐसा लगेगा मानो एक ही फैक्ट्री में बने हों, बस लेबल बदल दिया गया हो.
क्या ये सिर्फ ड्रोन्स का मामला है?
जी नहीं, मामला सिर्फ ड्रोन्स तक ही सीमित नहीं है. Xtra Technology की वेबसाइट पर तो व्लॉगिंग कैमरे भी दिख रहे हैं.
एक प्रोडक्ट है Xtra Muse 2 Pro, जिसका टैगलाइन है "पॉकेट से प्रो तक" (from Pocket to Pro). सुनकर कुछ याद आया? बिल्कुल सही! ये DJI Osmo Pocket 4P से काफी मिलता-जुलता है.
देखकर तो यही लगता है कि अगर नाम बदल दें, तो कोई बता ही नहीं पाएगा कि कौन सा प्रोडक्ट किसका है.
एफसीसी ने इन कंपनियों से कई सवाल पूछे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है. इसलिए एफसीसी ने अपनी जांच को और तेज कर दिया है.
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि उन टेस्ट लैब्स पर भी एफसीसी की नजर है, जहां से इन डिवाइसों को अप्रूवल मिल रहा है. ऐसा लग रहा है कि एफसीसी अब इस पूरे सिस्टम की जड़ों तक जाना चाहता है कि आखिर कैसे ये सब चल रहा था.
इस बीच एक और दिलचस्प बात सामने आई है. जिन गैजेट्स को बैन लगने से पहले बेचने की मंजूरी मिल चुकी थी, वे अब एफसीसी की वेबसाइट से गायब हो गए हैं.
इनमें DJI Osmo Pocket 4 Pro जैसे पॉपुलर प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं. हालांकि, अच्छी खबर ये है कि अमेरिका में पहले से बिक चुके DJI प्रोडक्ट्स पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है.
यानी ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वे काम करना बंद कर देंगे या उन्हें वापस मंगवाया जाएगा. ये एक राहत की बात है उन ग्राहकों के लिए जिनके पास पहले से DJI के प्रोडक्ट्स हैं.
कुल मिलाकर, अमेरिका में कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, चाहे वो फोन हो या ड्रोन, बेचने के लिए एफसीसी की मंजूरी जरूरी होती है. यही वजह है कि एफसीसी फाइलिंग से हमें कई डिवाइसों की लॉन्चिंग से पहले ही ढेर सारी जानकारी मिल जाती है.
लेकिन जब कोई कंपनी "कवर्ड लिस्ट" में होती है, तो उसे ये मंजूरी मिलती ही नहीं. और इसी नियम को तोड़ने की कोशिश में ये कंपनियां और DJI, एफसीसी की सीधी रडार पर आ गए हैं.
आगे इस मामले में और क्या होता है, ये देखना दिलचस्प होगा.


































