नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया में जब कोई 15 साल का लड़का टीम इंडिया की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरता है, तो उम्मीदें आसमान छूने लगती हैं। वैभव सूर्यवंशी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। लेकिन जब इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खत्म हुई, तो कहानी कुछ और ही निकली। वैभव का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और अब इस पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।
इंग्लैंड ने इस सीरीज को 4-0 से जीतकर भारत को करारी शिकस्त दी है। इस हार के बाद अब टीम इंडिया के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।
खासकर उस फैसले पर, जिसके तहत महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव दिया गया। वैभव ने सीरीज के शुरुआती तीन मैचों में क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाए, जो किसी भी लिहाज से प्रभावशाली नहीं थे।
क्या वैभव के डेब्यू में जल्दबाजी हुई?
पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर ने इस पूरे मामले पर अपनी बेबाक राय रखी है। जाफर का मानना है कि वैभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतारने में मैनेजमेंट ने काफी जल्दबाजी की।
उनका कहना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को सीधा इंटरनेशनल क्रिकेट में भेजने के बजाय उसे पहले घरेलू क्रिकेट और दूसरे स्तरों पर पर्याप्त अनुभव हासिल करना चाहिए।
जाफर के मुताबिक, वैभव के आसपास जो पब्लिक हाइप और लोकप्रियता बनी हुई थी, उसी के दबाव में आकर टीम मैनेजमेंट ने यह फैसला लिया। मोटा-मोटी बात यह है कि लोगों की डिमांड और सोशल मीडिया की चर्चा ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, जबकि खिलाड़ी की तैयारी शायद उतनी नहीं थी।
पब्लिक हाइप का असर या रणनीतिक गलती?
वसीम जाफर ने साफ शब्दों में कहा कि टीम मैनेजमेंट मीडिया में बनी चर्चा के साथ बह गया। उन्होंने बताया कि जब भी वैभव प्लेइंग इलेवन में नहीं होते थे, तो इसे लेकर काफी शोर मचता था।
जाफर का मानना है कि अगर वैभव कुछ समय तक टीम के साथ रहते, माहौल को समझते और सही मौके का इंतजार करते, तो उन्हें ज्यादा फायदा होता। इतनी जल्दी उन्हें अंतिम एकादश में जगह देना एक गलत फैसला साबित हुआ।
जाफर ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ चर्चा की वजह से एक तय बल्लेबाजी क्रम को बदलना सही था? उनके अनुसार, टीम को संजू सैमसन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए था, बजाय इसके कि किसी युवा खिलाड़ी को सिर्फ हाइप की वजह से मैदान पर उतारा जाए।
संजू सैमसन के साथ क्या हुआ?
इस पूरी बहस में संजू सैमसन का नाम भी बीच में आया है। वसीम जाफर ने संजू के साथ हुए व्यवहार पर हैरानी जताई।
उन्होंने कहा कि पांचवें टी20 मैच के लिए संजू को दोबारा टीम में तो लाया गया, लेकिन उसके तुरंत बाद जिम्बाब्वे दौरे की टीम से उन्हें बाहर कर दिया गया।
जाफर का मानना है कि टॉप ऑर्डर में लगातार किए जा रहे ये बदलाव टीम के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी के साथ जो रवैया अपनाया गया, वह समझ से परे है।
कुल मिलाकर, वसीम जाफर का इशारा इसी तरफ है कि टीम इंडिया ने अनुभव और युवा जोश के बीच का बैलेंस बिगड़ दिया है, जिसका खामियाजा सीरीज में हार के रूप में भुगतना पड़ा।








































