टेक डेस्क: तकनीक की दुनिया में एप्पल को गोपनीयता यानी सीक्रेसी का बादशाह माना जाता है. अपने प्रोडक्ट्स को लेकर इतनी ख़ामोशी और पर्दादारी, कि कब क्या आ रहा है, ये कानो-कान खबर भी नहीं होती. लेकिन, अब इसी ‘सीक्रेसी’ के किले में सेंध लगने का आरोप लगा है, और आरोप किसी और पर नहीं, बल्कि AI की दुनिया में धूम मचा रही ओपनएआई (OpenAI) कंपनी पर है. जी हां, आपने सही सुना. एप्पल ने ओपनएआई के खिलाफ एक बड़ा केस ठोक दिया है. ये सिर्फ एक कंपनी बनाम दूसरी कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि भरोसे, धोखे और करोड़ों डॉलर के ट्रेड सीक्रेट्स की एक उलझी हुई कहानी है, जो सीधे-सीधे एप्पल के पुराने ‘वफादार’ कर्मचारियों पर उंगली उठा रही है.
ये मामला इतना सनसनीखेज है कि अगर आरोप सच साबित हुए, तो तकनीक की दुनिया में एक बड़ा तूफान आ सकता है. एप्पल ने ओपनएआई पर आरोप लगाया है कि उसके दो पूर्व कर्मचारियों ने कंपनी के ट्रेड सीक्रेट्स चुराकर ओपनएआई को दे दिए, ताकि वो अपने नए हार्डवेयर बिजनेस को मजबूत कर सके.
इसे सीधे-सीधे ‘कॉर्पोरेट जासूसी’ (Corporate Espionage) का नाम दिया गया है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये सब हुआ कैसे, और कौन हैं वो लोग जिन्होंने एप्पल जैसे दिग्गज को कोर्ट तक खींच लिया?
तो, आखिर मामला क्या है?
मामला पिछले हफ्ते का है, जब एप्पल ने ओपनएआई और उसके दो ख़ास कर्मचारियों के खिलाफ एक तगड़ा मुकदमा दायर किया. इन कर्मचारियों ने पिछले दो सालों में एप्पल छोड़ा और ओपनएआई के हार्डवेयर बिजनेस में शामिल हो गए.
एप्पल का सीधा आरोप है कि इन दोनों ने एप्पल के बेशकीमती ट्रेड सीक्रेट्स चुराए हैं. ये सिर्फ छोटी-मोटी बातें नहीं हैं, बल्कि वो गोपनीय जानकारी है जो एप्पल के प्रोडक्ट्स, डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी को बनाती है.
एप्पल का कहना है कि ओपनएआई का नया-नवेला हार्डवेयर बिजनेस "सबसे कमजोर नींव पर टिका है, जो अवैध रूप से चुराए गए ट्रेड सीक्रेट्स के इस्तेमाल से अंदर तक सड़ा हुआ है." ये लाइन अपने आप में ही बताती है कि एप्पल कितना गुस्से में है और इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है.
बता दें, ओपनएआई आजकल मशहूर डिज़ाइनर जॉनी आईव (Jony Ive) के साथ मिलकर एक वियरेबल डिवाइस (Wearable Device) पर काम कर रहा है, और एप्पल का मानना है कि उसके चुराए गए सीक्रेट्स इसी प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहे हैं.
कौन हैं ये दो 'खास' कर्मचारी?
इस पूरे मामले की धुरी पर दो नाम हैं — टैंग यू टैन (Tang Yew Tan) और चांग लियू (Chang Liu). ये दोनों ही एप्पल में कोई नए-नवेले नहीं थे, बल्कि कई सालों से कंपनी के लिए काम कर रहे थे, और अहम पदों पर थे.
इनकी प्रोफाइल को देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा कि एप्पल जैसी कंपनी के इतने अनुभवी लोग ऐसा क्यों करेंगे.
- टैंग यू टैन (Tang Yew Tan): ये शख्स एप्पल में एक-दो साल नहीं, बल्कि पूरे पच्चीस साल से काम कर रहे थे! आप सोचिए, ढाई दशक! लिंक्डइन (LinkedIn) पर उनकी प्रोफाइल बताती है कि उन्होंने आईफोन (iPhone) और एप्पल वॉच (Apple Watch) के प्रोडक्ट डिज़ाइन, इंटरकनेक्ट्स डिज़ाइन, एकॉस्टिक्स और मटेरियल्स टेक्नोलॉजी सेंटर्स की देखरेख की थी. मतलब, एप्पल के कुछ सबसे अहम और गोपनीय प्रोजेक्ट्स में उनका सीधा हाथ था. अब वो ओपनएआई में चीफ हार्डवेयर ऑफिसर (Chief Hardware Officer) के तौर पर काम कर रहे हैं.
- चांग लियू (Chang Liu): चांग लियू ने भी एप्पल में करीब दस साल बिताए. वो आईफोन इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (iPhone Electrical Engineer) के तौर पर काम करते थे. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर भी 'चांग लियू-एप्पल' (changliu-apple) लिखा है, जिससे पता चलता है कि एप्पल के साथ उनका जुड़ाव कितना गहरा था.
इन दोनों की पुरानी प्रोफाइल देखकर हैरानी होती है कि एप्पल के इतने खास लोग, जिनके पास कंपनी के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जानकारी तक पहुंच थी, आखिर कैसे इस तरह के गंभीर आरोपों में घिर गए.
एप्पल को क्या लग रहा है कि उनके साथ क्या हुआ?
एप्पल अपनी गोपनीयता के लिए जाना जाता है. पत्रकार हों या कर्मचारी, एप्पल सबसे नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट (IPA) साइन करवाता है.
मेरे जैसे पत्रकार जब पहली बार एप्पल का NDA साइन करते हैं, तो हाथ कांप जाते हैं, क्योंकि उनकी शर्तें इतनी सख्त होती हैं. ऐसे में, आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अपने कर्मचारियों से एप्पल किस तरह के IPAs साइन करवाता होगा!
एप्पल का आरोप है कि टैन और लियू ने इन सभी एग्रीमेंट्स की धज्जियां उड़ाई हैं. उन्होंने एप्पल में रहते हुए भी और उसके बाद ओपनएआई में शामिल होने के बाद भी इन समझौतों का उल्लंघन किया.
कंपनी का दावा है कि इन लोगों ने जानबूझकर कंपनी के रहस्यों को ओपनएआई तक पहुंचाया है, जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिल सके. एप्पल के लिए ये सिर्फ ट्रेड सीक्रेट्स की चोरी नहीं, बल्कि कंपनी के मूल मूल्यों और भरोसे का भी उल्लंघन है.
इस केस का भविष्य क्या हो सकता है?
अभी तक ओपनएआई की तरफ से इस मामले पर कोई विस्तृत जवाब नहीं आया है. उनके स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस के डायरेक्टर, ड्रू पुस (Drew Pus) ने सिर्फ एक संक्षिप्त बयान जारी किया है.
इसका मतलब है कि अभी असली कानूनी लड़ाई शुरू होनी बाकी है.
यह मुकदमा सिर्फ एप्पल और ओपनएआई के बीच की कानूनी खींचतान नहीं है. इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.
अगर एप्पल ये केस जीतता है, तो यह बाकी टेक कंपनियों के लिए एक बड़ी मिसाल कायम करेगा कि कैसे अपने ट्रेड सीक्रेट्स की रक्षा करनी है. वहीं, अगर ओपनएआई हारता है, तो उसके हार्डवेयर एम्बिशन्स को बड़ा झटका लगेगा, और उसे भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.
इस केस से यह भी तय होगा कि भविष्य में कर्मचारी अपनी पुरानी कंपनी की गोपनीय जानकारी को नई कंपनी में ले जा सकते हैं या नहीं. यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य और उसके आसपास की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) पर भी गहरा असर डालेगा.
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कानूनी जंग किस दिशा में जाती है और तकनीक की दुनिया पर इसका क्या असर होता है.

































