विज्ञान डेस्क: अरे भाई साहब, ज़रा सोचिए, अगर किसी दिन आप एयरपोर्ट पर जाएं और देखें कि विमान तो आसमान में उड़ रहा है, लेकिन उसकी पूंछ है ही नहीं! सुनकर थोड़ा अजीब लगा ना? जैसे किसी sci-fi फिल्म का सीन हो, जहां गाड़ियां दीवारों पर चलती हैं और कपड़े अपने आप साफ हो जाते हैं। लेकिन ये कल्पना अब हकीकत में बदलने जा रही है, और इसका क्रेडिट जाता है जर्मनी के वैज्ञानिकों को। उन्होंने एक ऐसा करिश्माई पंख (wing) बना डाला है, जो अपनी शक्ल बदल सकता है, बिल्कुल गिरगिट की तरह! और हां, इस नई टेक्नोलॉजी से न सिर्फ विमानों का डिज़ाइन बदलने वाला है, बल्कि आपकी हवाई यात्रा भी सस्ती हो सकती है। है न कमाल की बात?
जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (German Aerospace Center), जिसे DLR भी कहते हैं, के इंजीनियर्स दिन-रात एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जो विमानों की दुनिया में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। उनके इस प्रोजेक्ट का नाम है 'मॉर्फिंग टेक्नोलॉजीज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च' (Morphing Technologies and Artificial Intelligence Research), या शॉर्ट में कहें तो 'मॉर्फएयर' (morphAIR)।
इसके लिए पूरे एक मिलियन यूरो का बजट तय किया गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये सब चल क्यों रहा है?
आखिर इस पंख की जरूरत क्यों पड़ी?
देखिए, आज के जो विमान हैं, उनमें पंख और पूंछ सब अपनी जगह पर फिक्स्ड होते हैं। उड़ान की हर कंडीशन में उनका आकार एक जैसा ही रहता है।
लेकिन उड़ते समय हवा का एक घर्षण (drag) होता है, जो विमान को आगे बढ़ने से रोकता है। इस घर्षण को कम करने के लिए विमानों को और ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है, जिसका सीधा मतलब है, ज्यादा ईंधन फूंकना।
यानी आपकी जेब पर सीधा असर।
मॉर्फएयर प्रोजेक्ट के तहत जो पंख बन रहा है, वो इस दिक्कत का परमानेंट सॉल्यूशन है। DLR में सीनियर अडैप्टिव सिस्टम्स इंजीनियर मार्टिन रैडस्टॉक ने 'एयरोस्पेस अमेरिका' को बताया, "आज के विमानों के पंख मूल रूप से इनएफिशिएंट हैं।
इनमें छोटे-छोटे गैप्स और स्टेप्स होते हैं, जैसे आइलरॉन (ailerons) और फ्लैप्स (flaps) के बीच। इनकी वजह से पंखों पर हवा का बहाव टर्बुलेंट हो जाता है।
" सीधे शब्दों में कहें तो, ये छोटे-छोटे गैप हवा को ऐसे परेशान करते हैं कि वो स्मूथली नहीं बह पाती, और इसकी वजह से पैदा होता है फालतू का ड्रैग।
कल्पना कीजिए एक सड़क की, जिसमें जगह-जगह गड्ढे और स्पीड ब्रेकर हों। गाड़ी चलाने में कितना वक्त और ईंधन लगेगा, है ना? हवाई जहाज के पंखों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
लेकिन ये नया 'शेप-शिफ्टिंग विंग' इन सब झंझटों को खत्म कर देगा। इससे न सिर्फ हवा का बहाव एकदम चिकना हो जाएगा, बल्कि विमान की एयरोडायनामिक एफिशिएंसी भी जबरदस्त तरीके से बढ़ जाएगी।
कैसे काम करता है ये 'मैजिक विंग'?
इस मॉर्फिंग विंग की सबसे बड़ी खासियत इसकी चिकनी, बिना किसी गैप वाली सतह है। इसमें न कोई स्क्रू है, न कोई रिवेट।
मतलब, एकदम मक्खन की तरह चिकना! अंदर की तरफ मोटर से चलने वाले कंपोनेंट्स लगे हैं, जो जरूरत के हिसाब से पंख के आकार को बदल सकते हैं। इसे 'मॉर्फेबल ट्रेलिंग एज' (morphable trailing edge) कहा जा रहा है।
इसका मतलब ये है कि पंख का पिछला किनारा, जिसमें आमतौर पर छोटे-छोटे कंट्रोल सरफेस होते हैं, वो पूरा का पूरा अपनी आकृति बदल सकता है।
ये छोटे-छोटे, मोटर-नियंत्रित आर्म्स (actuator-controlled arms) होते हैं जो लेफ्ट, राइट, ऊपर और नीचे मूव कर सकते हैं। जब विमान उड़ रहा होगा और हवा की कंडीशन बदलेगी, तो ये पंख खुद-ब-खुद अपनी आकृति बदल लेगा, जिससे हवा का घर्षण कम से कम हो और विमान एकदम स्मूथली उड़ सके।
इस तकनीक को 70 किलो के एक ड्रोन पर टेस्ट भी किया जा चुका है, जिसमें 3 मीटर चौड़ा मॉर्फिंग विंग लगाया गया था। टेस्ट के नतीजे काफी पॉजिटिव रहे हैं, जिसने वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का हौसला दिया है।
ये टेक्नोलॉजी विमानों के डिजाइन के लिए एक बड़ा चैलेंज है, क्योंकि अब तक पारंपरिक तरीके से ही विमान बनते आ रहे हैं। लेकिन DLR के वैज्ञानिक इस चैलेंज को बखूबी निभा रहे हैं और लगातार अपनी रिसर्च को आगे बढ़ा रहे हैं।
तो क्या पूंछ वाले विमान बीते ज़माने की बात हो जाएंगे?
जी हां, बिल्कुल! इस मॉर्फिंग विंग की सफलता से उत्साहित होकर, वैज्ञानिकों ने एक नया फॉलो-अप प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिसका नाम है 'यू-अडैप्ट' (UAdapt - Unmanned Aircraft Wing Adaption)। इस प्रोग्राम का मुख्य फोकस ईंधन की खपत को और कम करना है।
कैसे? विमान की सतह को घर्षण-मुक्त बनाकर, ताकि हवा की रगड़ कम से कम हो।
और तो और, इस तकनीक से विमान की पूंछ को पूरी तरह से हटाने का भी पोटेंशियल है! पूंछ का काम होता है विमान को पिच कंट्रोल (pitch control) देना और स्टेबिलिटी बनाए रखना। अगर पंख खुद ही ये सारे काम कर लेगा, तो पूंछ की क्या जरूरत? सोचिए, जब पूंछ हट जाएगी, तो विमान और भी हल्का हो जाएगा, उसका डिज़ाइन और भी एयरोडायनामिक हो जाएगा।
इससे न सिर्फ ईंधन बचेगा, बल्कि विमान का निर्माण भी सस्ता होगा। कुल मिलाकर, ये सिर्फ एक नए पंख की बात नहीं है, बल्कि हवाई यात्रा के पूरे सिस्टम को बदलने की बात है।
अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो बहुत जल्द हम ऐसे विमान देख सकते हैं जो न सिर्फ दिखने में भविष्य के होंगे, बल्कि हमारी जेब पर भी कम बोझ डालेंगे। ये आविष्कार भविष्य की उड़ान के लिए एक बड़ा कदम है, जो एयरलाइन इंडस्ट्री में एक नई क्रांति ला सकता है।
तो तैयार हो जाइए, आसमान में उड़ने वाले अगले करिश्मे को देखने के लिए!
































