फ्लोरिडा: आज के डिजिटल ज़माने में, जब साइबर चोर हर कोने में घात लगाए बैठे हैं और कंपनियों पर रैनसमवेयर जैसे हमले आम बात हो गए हैं, ऐसे में किसी 'एक्सपर्ट' पर भरोसा करना लाज़मी है. ये 'एक्सपर्ट' कंपनियां हायर करती हैं ताकि फिरौती की रकम पर हमलावरों से बातचीत कर सकें और नुक़सान को कम कर सकें. लेकिन सोचिए, अगर यही 'एक्सपर्ट' खुद हमलावरों से मिल जाए, तो क्या होगा? अगर वो बचाने की बजाय, आपको और गहरे दलदल में धकेल दे?
कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है अमेरिका से, जहाँ एक रैनसमवेयर नेगोशिएटर को 70 महीने की जेल हुई है. नाम है एंजेलो मार्टिनो, उम्र 41 साल.
फ्लोरिडा के लैंड ओ'लेक्स का रहने वाला यह शख्स दरअसल अपने क्लाइंट्स की मदद करने की बजाय, 'ब्लैककैट' (ALPHV) नाम के रैनसमवेयर गैंग के लिए काम कर रहा था.
अमेरिकी सरकार की तरफ से जारी एक मेमोरेंडम में बताया गया है कि मार्टिनो को न सिर्फ जेल की हवा खानी होगी, बल्कि जो भी क्रिप्टो-करेंसी, घर, गाड़ियां और नावें उसने इस काले धंधे से कमाए थे, सब कुछ ज़ब्त कर लिया जाएगा. इतना ही नहीं, जेल से छूटने के बाद भी उसे अपनी भविष्य की सैलरी का 10 फ़ीसदी हिस्सा सरकार को चुकाना होगा.
ये तो हुई एंजेलो की कहानी, लेकिन सवाल है कि उसने आखिर ऐसा क्या किया था?
आखिर मार्टिनो ने क्लाइंट्स के साथ क्या खेला था?
दरअसल, नवंबर 2025 में पहली बार ये बात सामने आई थी कि कुछ रैनसमवेयर नेगोशिएटर्स, जो कंपनियों को साइबर हमलों से बचाने का दावा करते थे, वो असल में खुद 'ब्लैककैट' (ALPHV) रैनसमवेयर कलेक्टिव के लिए काम कर रहे थे. ये बिल्कुल ऐसा था, जैसे कोई डॉक्टर बीमारी ठीक करने की बजाय, खुद बीमारी फैलाने वाले वायरस के लिए काम करे.
अगले कुछ महीनों में इस मामले की परतें खुलती गईं और तीन नाम सामने आए: जॉर्जिया के रयान क्लिफर्ड गोल्डबर्ग, टेक्सास के केविन टायलर मार्टिन और फ्लोरिडा के लैंड ओ'लेक्स से एंजेलो मार्टिनो. आरोप बेहद गंभीर थे.
ये लोग न सिर्फ अपने क्लाइंट्स की मदद नहीं कर रहे थे, बल्कि कुछ मामलों में तो इन्होंने खुद ही उन कंपनियों के सिस्टम में रैनसमवेयर डाल दिया, जिनके लिए ये 'काम' कर रहे थे.
सोचिए, कितना बड़ा धोखा! एक तरफ कंपनी अपने नुक़सान को कम करने के लिए इन पर भरोसा कर रही थी, और दूसरी तरफ ये लोग हमलावरों से हाथ मिलाकर, उन्हें कंपनी के अंदरूनी डिटेल्स बता रहे थे. ऐसा सिर्फ इसलिए, ताकि फिरौती की रकम को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाया जा सके.
ये तो खुलेआम अपने क्लाइंट्स की पीठ में छुरा घोंपने जैसा मामला था.
किन-किन कंपनियों को बनाया गया शिकार?
इस धोखे के शिकार कम से कम पांच बड़ी कंपनियां बनीं, जिनके नाम भी अब सामने आ चुके हैं. इनमें फ्लोरिडा की एक मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनी भी शामिल थी.
उससे 10 मिलियन डॉलर (करीब 80 करोड़ रुपये से ज़्यादा) की फिरौती मांगी गई थी, और अंत में कंपनी ने लगभग 1.2 मिलियन डॉलर (करीब 10 करोड़ रुपये) का भुगतान किया.
इसके अलावा, मैरीलैंड की एक फार्मास्यूटिकल कंपनी, कैलिफ़ोर्निया में एक डॉक्टर का ऑफ़िस, कैलिफ़ोर्निया की एक इंजीनियरिंग कंपनी और वर्जीनिया में स्थित एक ड्रोन बनाने वाली कंपनी को भी इन धोखेबाज़ों ने अपना निशाना बनाया. इन सभी कंपनियों ने एंजेलो और उसके साथियों पर भरोसा किया था, जो टूट गया और उन्हें बड़ा आर्थिक नुक़सान भी झेलना पड़ा.
सज़ा के तौर पर क्या हुआ?
शुरुआत में, इन तीनों को 10 से 20 साल तक की लंबी जेल की सज़ा का सामना करना पड़ सकता था, जो उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए वाजिब भी था. लेकिन बाद में, उनकी सज़ा थोड़ी कम कर दी गई.
सबसे पहले, अप्रैल 2026 में केविन टायलर मार्टिन और रयान क्लिफर्ड गोल्डबर्ग को चार-चार साल की जेल की सज़ा सुनाई गई. अब जुलाई 2026 में, तीसरे आरोपी एंजेलो मार्टिनो को पांच साल और दस महीने (70 महीने) जेल की सज़ा मिली है.
मार्टिनो ने अपने अपराध को कबूल कर लिया था और कोर्ट से सज़ा कम करने की अपील करते हुए सिर्फ 24 महीने की जेल मांगी थी. लेकिन अदालत ने उसकी दलील को नहीं माना और उसे लगभग छह साल की जेल की सज़ा सुनाई.
यह दिखाता है कि इस तरह के अपराधों को लेकर अमेरिकी न्याय व्यवस्था कितनी गंभीर है.
और हाँ, जैसा कि पहले बताया, जेल से छूटने के बाद भी एंजेलो की मुश्किलें खत्म नहीं होंगी. उसे अपनी भविष्य की कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा हर महीने सरकार को देना होगा.
यह मामला उन सभी कंपनियों के लिए एक चेतावनी है जो साइबर हमलों से बचने के लिए तीसरे पक्ष के नेगोशिएटर्स पर भरोसा करती हैं. अब उन्हें अपने 'रक्षक' पर भी पैनी नज़र रखनी होगी, क्योंकि कभी-कभी रक्षक ही भक्षक निकल सकते हैं.




































