ज्योतिष डेस्क: हिंदू धर्म में त्योहारों और विशेष तिथियों का अपना ही महत्व होता है. सालभर में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से दो को तो हर गृहस्थ धूमधाम से मनाता है, जिसे हम चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नाम से जानते हैं. लेकिन दो और ऐसी नवरात्रि होती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं या यूं कहें कि इनका महत्व साधकों और गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति चाहने वालों के लिए ज्यादा होता है. इन्हीं में से एक है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जो इस साल 15 जुलाई से शुरू हो रही है. खास बात ये है कि इस बार इस गुप्त नवरात्रि पर एक ऐसा दुर्लभ और शक्तिशाली योग बन रहा है, जो आपकी सोई हुई किस्मत जगाने और धन-समृद्धि दिलाने में बेहद असरदार साबित हो सकता है. इसे ‘शश महालक्ष्मी योग’ कहा जा रहा है. तो आइए, इस पावन पर्व से जुड़ी हर खास बात को थोड़ा गहराई से समझते हैं.
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाली यह गुप्त नवरात्रि पूरे नौ दिनों तक चलती है. जैसा कि नाम से ही साफ है, ये नवरात्रि थोड़ी ‘गुप्त’ होती है.
इसमें सार्वजनिक तौर पर बड़े-बड़े पंडाल या उत्सव देखने को नहीं मिलते, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसका महत्व कम है. बल्कि, देवी उपासना करने वाले साधकों और तांत्रिकों के लिए यह समय बेहद खास माना जाता है.
इस दौरान मां दुर्गा की नौ महाविद्याओं की साधना की जाती है. कहते हैं, इस अवधि में पूरी श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा कई गुना ज्यादा फल देती है.
आखिर क्या है ये गुप्त नवरात्रि, और क्यों होती है खास?
बहुत से लोग सोचते हैं कि जब सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, तो गुप्त नवरात्रि की क्या जरूरत है? दरअसल, सामान्य नवरात्रि गृहस्थ जीवन की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए मनाई जाती है. वहीं, गुप्त नवरात्रि का उद्देश्य गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति और तंत्र साधना करना होता है.
इसमें मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों, जैसे मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की उपासना की जाती है. इन स्वरूपों की साधना से विशेष शक्तियां और मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसा धार्मिक मान्यताएं कहती हैं.
जिन लोगों की कोई विशेष इच्छा हो, जो दूसरों से छिपाकर रखना चाहते हों या जो तंत्र साधना के मार्ग पर हों, उनके लिए ये नौ दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इन दिनों में की गई तपस्या, पूजा और अनुष्ठान का फल तुरंत मिलता है और कई गुना बढ़कर मिलता है.
यह समय उन लोगों के लिए भी शुभ माना जाता है जो अपनी आर्थिक समस्याओं को दूर करना चाहते हैं या करियर में सफलता पाना चाहते हैं. इसलिए गुप्त नवरात्रि को सिर्फ साधकों का पर्व मानना गलत होगा; यह सबके लिए शुभ है, बशर्ते पूजा विधि-विधान से की जाए.
शश महालक्ष्मी योग क्या है और इसका फायदा क्या है?
इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर जो सबसे बड़ी और अच्छी बात हो रही है, वो है ‘शश महालक्ष्मी योग’ का बनना. ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कोई सामान्य योग नहीं, बल्कि एक बेहद दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग है.
देवघर के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह योग दस महाविद्याओं की साधना और धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
पंडित मुदगल के अनुसार, ‘शश महालक्ष्मी’ जैसे दुर्लभ योग में की गई साधना साधकों की सोई हुई किस्मत को जगा सकती है. यह योग भौतिक सुख-सुविधाओं में जबरदस्त वृद्धि कराता है और तो और, सात पीढ़ियों तक की दरिद्रता को मिटाने की शक्ति रखता है.
सोचिए, कितना पावरफुल है यह योग! इस योग के प्रभाव से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं, रुके हुए काम बनने लगते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. अगर आप लंबे समय से किसी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तो यह गुप्त नवरात्रि आपके लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज की – कलश स्थापना का मुहूर्त. जो श्रद्धालु अपने घर में माता की स्थापना करना चाहते हैं और इन नौ दिनों का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, उनके लिए शुभ समय जानना बेहद जरूरी है.
पंडित नंद किशोर मुदगल ने बताया कि इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई से हो रही है. इस दिन सुबह 5 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 30 मिनट तक ‘अमृतकाल’ और ‘पुष्य नक्षत्र’ रहेगा.
यह अवधि कलश स्थापना के लिए बेहद शुभ मानी गई है.
पंडित जी ने साफ तौर पर कहा कि इसी शुभ अवधि में कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान करना सबसे उत्तम फल देगा. तो, अगर आप कलश स्थापित करने की सोच रहे हैं, तो इस खास समय को नोट कर लें ताकि कोई चूक न हो.
इस मुहूर्त में स्थापना करने से पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और माता रानी का आशीर्वाद सीधे आप पर बरसता है, ऐसा माना जाता है.
कलश स्थापना कैसे करें? पूरी विधि समझें
गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना का तरीका सामान्य नवरात्रि जैसा ही होता है, बस इसमें कुछ बातें विशेष ध्यान रखने वाली होती हैं. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि सबसे पहले अपने घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई ठीक से कर लें.
गंगाजल का छिड़काव करना न भूलें, इससे स्थान पवित्र हो जाता है. फिर एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछा दें.
इसके बाद माता की दस महाविद्याओं का चित्र या प्रतिमा उस चौकी पर स्थापित करें.
अब एक मिट्टी या तांबे का कलश लें. उसमें साफ जल भरें.
इसके बाद कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल स्थापित करें और विधि-विधान से मां का आह्वान करें और कलश को स्थापित करें. कलश स्थापना के बाद अखंड दीप जलाना बहुत शुभ माना जाता है.
ये दीप नौ दिनों तक लगातार जलता रहना चाहिए. इसके साथ ही, ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करना और नियमित रूप से माता की आरती करना भी बेहद फलदायी माना गया है.
इन सरल स्टेप्स को फॉलो करके आप भी माता रानी की कृपा पा सकते हैं और अपनी गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं.






































