दिल्ली: साल था 2020, जब देश की राजधानी दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा की आग में बुरी तरह से जल रही थी। गलियों में डर, चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल था। इसी बीच, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में सिक्योरिटी असिस्टेंट के तौर पर काम करने वाले 26 साल के अंकित शर्मा अपने घर से बाहर निकले थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, उस दिन अंकित का अपने घर लौटना नसीब नहीं हुआ। कुछ ही समय बाद उनकी मौत की खबर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। हाल ही में, इस केस में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुछ और लोगों को दोषी ठहराया गया है।
ये मामला फरवरी 2020 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग, खजूरी खास और मुस्तफाबाद जैसे इलाके नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध-समर्थन में भड़की हिंसा की चपेट में थे। हर तरफ खून-खराबा और दहशत का माहौल था।
ठीक इसी खौफ के बीच, 25 फरवरी की शाम को अंकित शर्मा अपने दफ्तर से घर लौटे थे। लेकिन घर के बाहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण था।
उन्होंने शायद हालात देखने या किसी की मदद करने के लिए चांद बाग पुलिया के पास जाने का फैसला किया होगा, जहां उपद्रवियों का तांडव चल रहा था।
अंकित शर्मा को किसने घेरा और फिर क्या हुआ?
बता दें कि अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो में 2017 में शामिल हुए थे और सिक्योरिटी असिस्टेंट के तौर पर देश सेवा कर रहे थे। उस मनहूस शाम को, चांद बाग पुलिया के पास एक मस्जिद और पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के घर के नजदीक सक्रिय हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा को अचानक घेर लिया।
भीड़ इतनी बेकाबू थी कि अंकित ने बचने की पूरी कोशिश की, लेकिन उपद्रवियों ने उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले गए। वहां उन पर धारदार हथियारों से एक के बाद एक कई वार किए गए।
इस बर्बर हमले में उनकी जान चली गई और हत्या के बाद उनकी लाश को पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया।
अंकित के पिता रवींद्र कुमार ने जो शिकायत दर्ज कराई थी, उसमें पूरी कहानी दर्ज है। उन्होंने बताया कि अंकित 25 फरवरी 2020 को दफ्तर से घर आए थे, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा बाहर गए और फिर कभी नहीं लौटे।
जब परिवार ने उनकी तलाश शुरू की, तो स्थानीय लोगों ने इस खौफनाक वारदात की जानकारी दी। लोगों ने बताया कि अंकित की हत्या कर दी गई है और उनकी लाश चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दी गई थी।
अंकित के शरीर पर कितने घाव थे?
ये बात दिल दहला देने वाली है कि अंकित शर्मा पर किस कदर जुल्म ढाया गया था। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो सामने आया, वो किसी भी इंसान को अंदर तक झकझोर देगा।
रिपोर्ट के अनुसार, अंकित के शरीर पर कुल 51 जगहों पर गंभीर चोटों के निशान थे। ये बताता है कि उन पर कितनी क्रूरता से हमला किया गया था।
चाकू या अन्य किसी धारदार हथियार से उन्हें गोद-गोदकर मार डाला गया था। उनका पूरा शरीर छलनी कर दिया गया था।
पिता रवींद्र कुमार ने अपनी प्राथमिकी में साफ-साफ कहा था कि उनके बेटे अंकित की हत्या पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने मिलकर की है। उनका आरोप था कि इस साजिश में कई लोग शामिल थे और सबने मिलकर अंकित को निशाना बनाया।
यह आरोप अपने आप में बहुत गंभीर था और जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई।
कोर्ट का फैसला, किसने खाई जेल की हवा?
इस पूरे मामले में पुलिस ने जांच की और कई लोगों को गिरफ्तार किया। लंबा ट्रायल चला, सबूत पेश किए गए और गवाहों के बयान लिए गए।
सोमवार, 13 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस केस में अपना बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया।
इसके साथ ही, नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को भी दोषी ठहराया गया है। यानी, कुल मिलाकर पांच लोगों को इस हत्याकांड में दोषी पाया गया है।
वहीं, इस मामले में ट्रायल का सामना कर रहे कुल 11 आरोपियों में से छह को कोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसकी वजह से उन्हें बरी किया गया।
लेकिन ताहिर हुसैन और उसके चार साथियों पर अंकित शर्मा की हत्या का दोष सिद्ध हो गया। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो अंकित को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे, और यह दिखाता है कि न्याय की प्रक्रिया भले ही धीमी हो, लेकिन आखिरकार अपराधियों तक पहुंचती जरूर है।
अंकित शर्मा की कहानी आज भी उस भयानक दौर की याद दिलाती है, जब देश की राजधानी में इंसानियत और कानून, दोनों पर हमला हुआ था।







































