बहराइच: सोमवार की शाम, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की धरती ने एक ऐसा नजारा देखा, जहां न सिर्फ करोड़ों का धुआं उठा, बल्कि वो धुआं था उस नशे का, जो सैकड़ों जिंदगियों में जहर घोल रहा था। पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत करीब सवा नौ करोड़ रुपये के मादक पदार्थ आग के हवाले कर दिए। स्मैक, गांजा और चरस जैसे वो मादक पदार्थ, जो नौजवानों की नसों में उतरकर उनकी दुनिया उजाड़ रहे थे, उन्हें कानून की भट्टी में झोंक दिया गया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था, बल्कि उन तस्करों के मंसूबों पर लगी आग थी, जो जिले में नशे का कारोबार फैलाकर अपनी जेबें भर रहे थे। पुलिस ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन दहन' नाम दिया है और इसका मकसद साफ है – नशे के कारोबारियों को यह संदेश देना कि उनकी अब खैर नहीं।
यह पूरा मामला पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के सीधे निर्देश पर अंजाम दिया गया। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से जो मादक पदार्थ जब्त किए गए थे, उन्हें सोमवार शाम को विधिवत नष्ट कर दिया गया।
ये वो नशीले पदार्थ थे जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद तस्करों के चंगुल से छुड़ाया था। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि यह 'ऑपरेशन दहन' केवल एक दिन का काम नहीं था, बल्कि यह पुलिस की लगातार मेहनत और निगरानी का नतीजा है।
पुलिस का 'ऑपरेशन दहन' और कार्रवाई की पृष्ठभूमि
नशे के खिलाफ पुलिस का यह अभियान कोई नया नहीं है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में डीजीपी के निर्देश पर 'ऑपरेशन दहन' नाम से एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य राज्य को नशामुक्त बनाना है।
इसी कड़ी में बहराइच जिले में भी अवैध मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि इस कार्रवाई के लिए एक खास जिला स्तरीय ड्रग डिस्पोजल कमेटी (DDC) का गठन किया गया था।
इस कमेटी का काम न्यायालय द्वारा जारी उन आदेशों का पालन करना था, जो इन जब्तशुदा मादक पदार्थों के निपटारे से जुड़े थे। यानी, यह पूरा काम कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया।
पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि बरामद किए गए नशीले पदार्थ दोबारा बाजार में न आ सकें और उनका पूरी तरह से सफाया हो जाए।
किस-किस नशे की हुई थी बरामदगी और क्या थी कीमत?
सोमवार को जिस नशे के ढेर को आग के हवाले किया गया, उसमें कई तरह के मादक पदार्थ शामिल थे। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस अभियान के तहत जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 62 अलग-अलग मुकदमों से जुड़े मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
इनमें चौंकाने वाली मात्रा में स्मैक, चरस, गांजा और पोस्ता का छिलका शामिल था। कुल मिलाकर, 191.
46 किलोग्राम (लगभग पौने दो क्विंटल) नशीले पदार्थ थे, जिनकी अनुमानित कीमत बाजार में 9 करोड़ 32 लाख 16 हजार 900 रुपये आंकी गई है। जरा सोचिए, इतनी बड़ी कीमत के मादक पदार्थ अगर बाजार में पहुंच जाते तो कितनी जिंदगियां बर्बाद होतीं और कितने परिवार उजड़ते।
पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया है। यह बरामदगी और उसके बाद का नष्टीकरण पुलिस के उन प्रयासों की कहानी कहता है, जहां वे केवल अपराध होने का इंतजार नहीं करते, बल्कि सक्रिय रूप से अपराधियों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करते हैं।
बहराइच से बलरामपुर: नष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया
यह सवाल भी उठता है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों को कैसे नष्ट किया गया? इन सभी नशीले पदार्थों को बहराइच जिले में ही नष्ट नहीं किया गया, बल्कि इन्हें पड़ोसी जनपद बलरामपुर ले जाया गया। बलरामपुर में भगवतीगंज चीनी मिल का पावर प्लांट है, जहां एक खास इन्सिनेटर (भस्मक) लगा हुआ है।
इस इन्सिनेटर में अत्यधिक उच्च तापमान पर इन मादक पदार्थों को जलाकर पूरी तरह राख कर दिया गया। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि कोई भी पदार्थ शेष न रहे और उसका पर्यावरण पर भी कम से कम नकारात्मक प्रभाव पड़े।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, ड्रग डिस्पोजल कमेटी के सदस्य और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे, ताकि पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। यह सिर्फ एक जलती हुई आग नहीं थी, बल्कि यह उन तस्करों के मंसूबों का धुआं था जो नशे का साम्राज्य फैलाना चाहते थे।
नशे के खिलाफ पुलिस की अपील
इस बड़ी कार्रवाई के बाद, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने आम जनता से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहें।
नशा सिर्फ व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि अगर किसी व्यक्ति को मादक पदार्थों की बिक्री या तस्करी के संबंध में कोई जानकारी मिलती है, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के तत्काल स्थानीय पुलिस थाने को इसकी सूचना दें।
पुलिस ऐसे दोषियों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सिर्फ पुलिस का काम नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
अगर समाज का हर वर्ग इस अभियान में पुलिस का साथ दे, तो हम निश्चित रूप से एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। यह कार्रवाई इस दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

