चंडीगढ़: सुनो भाई, आज के डिजिटल ज़माने में जहां सब कुछ आपकी मुट्ठी में है, वहीं धोखेबाजों ने भी अपने नए-नए तरिके इजाद कर लिए हैं। आजकल ये ठग सीधे आपके घर में घुस रहे हैं, वो भी वर्दी पहनकर, लेकिन असल में वो होते हैं स्क्रीन के उस पार। और हां, अब तो ये राम मंदिर जैसे संवदेनशील मामलों का नाम लेकर लोगों को ऐसे डरा रहे हैं कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। चंडीगढ़ से ऐसी ही दो दिल दहला देने वाली खबरें आई हैं, जहां रिटायर्ड बुजुर्ग दंपतियों को अपना निशाना बनाया गया। एक परिवार तो किस्मतवाला निकला, जिनकी बेटी की सूझबूझ से करोड़ों की ठगी बच गई। लेकिन दूसरा परिवार, जिसने जिंदगीभर की कमाई गंवा दी – पूरे 2 करोड़ 15 लाख रुपए!
ट्राईसिटी यानी चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला जैसे इलाकों में साइबर ठगों ने अब लोगों को डराने के लिए देश के सबसे चर्चित और भावनात्मक मामलों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। ये ठग इतने शातिर हो गए हैं कि 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर लोगों की सारी मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।
आइए आपको बताते हैं ये दोनों मामले, जो साइबर क्राइम की भयावहता की पोल खोलते हैं।
जब राम मंदिर चोरी ने घर में आतंक मचा दिया
पहला मामला है चंडीगढ़ के सेक्टर-49 से। यहां एक बुजुर्ग दंपती हैं, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी एसबीआई जैसे बड़े बैंक में बड़े पदों पर काम करते हुए बिताई है।
पिछले हफ्ते की बात है, उनका बेटा काम पर बाहर गया हुआ था। तभी उनके फोन पर एक वीडियो कॉल आई।
कॉल उठाने पर सामने एक शख्स पुलिस की वर्दी में था। उसने बड़े रौब से खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए चौंकाने वाली बात ये बताई कि अयोध्या के राम मंदिर में जो चोरी हुई थी, उसके आरोपियों से इनका मोबाइल नंबर मिला है।
आप सोचिए, किसी बुजुर्ग दंपती पर ये आरोप कितना भारी पड़ा होगा। उन्हें लगा कि सच में वो किसी बड़े जाल में फंस गए हैं।
ठग ने उन्हें धमकाया कि उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार किया जा सकता है। गिरफ्तारी के डर से दंपती करीब तीन घंटे तक अपने कमरे में बंद रहे।
इस दौरान ठग ने उन्हें वीडियो कॉल पर ही धमकाते हुए उनके सारे बैंक खातों की जानकारी निकलवा ली। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्हें अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD तक तुड़वाने के लिए राजी कर लिया गया।
ये वो पैसे थे जो उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी की मेहनत से जोड़े थे, अपने बुढ़ापे के सहारे के लिए।
लेकिन कहते हैं ना, हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है। घर में उनकी बेटी मौजूद थी।
उसने देखा कि माता-पिता इतने लंबे समय से कमरे से बाहर क्यों नहीं आ रहे। बेटी को कुछ शक हुआ।
उसने लगातार करीब आधे घंटे तक दरवाज़ा खटखटाया। अंदर वीडियो कॉल पर बैठे ठग दंपती को डरा रहे थे कि अगर दरवाजा खोला तो बेटी को भी इस मामले में फंसा दिया जाएगा।
लेकिन एक मां का दिल कब तक अपने बच्चे को बाहर इंतजार करवाता। आखिरकार, मां ने हिम्मत करके दरवाज़ा खोला।
बेटी ने जैसे ही हालात देखे, तुरंत मोबाइल ले लिया और वो खतरनाक कॉल काट दी। फिर उसने बिना देर किए अपने भाई को सारी बात बताई और परिवार ने मिलकर साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
शुक्र है कि इस परिवार की सूझबूझ से करोड़ों की ठगी होते-होते बच गई।
IPS, CBI का डर दिखाकर 2 करोड़ 15 लाख का चूना
लेकिन दूसरा मामला इतना खुशनसीब नहीं था। ये कहानी है पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग से रिटायर्ड दरबारा सिंह और उनकी पत्नी की।
यहां भी धोखेबाजों ने वीडियो कॉल का ही सहारा लिया। एक शख्स ने खुद को मुंबई के बांद्रा थाने का आईपीएस अधिकारी रवि कुमार बताया।
उसने दंपती को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया है। ठग ने उन्हें डराया कि मुंबई पुलिस किसी भी वक्त उन्हें गिरफ्तार करने आ सकती है।
इसके कुछ देर बाद ही एक और वीडियो कॉल आई। इस बार सामने वाला खुद को सीबीआई अधिकारी बता रहा था।
ठगों ने दंपती से उनकी सारी संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी मांगी। उन्होंने झूठा दिलासा दिया कि जांच पूरी होने तक उनकी सारी रकम "सरकारी कस्टडी" में रखी जाएगी और फिर बाद में लौटा दी जाएगी।
ये सुनकर बेचारे बुजुर्ग दंपती और भी घबरा गए।
ठगों ने उन्हें लगातार धमकाया कि उनके लोग आसपास नज़र रख रहे हैं और अगर उन्होंने किसी को भी इस बारे में बताया, तो उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। इस डर और दबाव में दंपती बैंक पहुंचे।
बैंक में, अपनी कार के अंदर बैठे हुए, उन्होंने ठगों की निगरानी में आरटीजीएस (RTGS) के ज़रिए 2 करोड़ 15 लाख रुपए ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। आप सोचिए, अपनी ज़िंदगी की पूरी कमाई, अपने बुढ़ापे का सहारा, एक झटके में धोखेबाजों के हवाले कर दिया गया।
बैंक तक में उन पर लगातार वीडियो कॉल के ज़रिए नज़र रखी जा रही थी, ताकि वो किसी से मदद न मांग पाएं या कोई शक न कर पाए।
चंडीगढ़ साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन दोनों मामलों की जांच चल रही है और ये हमें दिखाते हैं कि साइबर ठग कितने शातिर हो गए हैं और कैसे हमारे बुज़ुर्गों को आसानी से निशाना बना रहे हैं।
इनसे बचने के लिए सबसे ज़रूरी है जागरूकता और किसी भी ऐसे कॉल पर आंख बंद करके भरोसा न करना, चाहे सामने वाला कितनी भी बड़ी वर्दी क्यों न पहने हो।

