चंडीगढ़: पंजाब में पुलिस का सबसे बड़ा अफसर कौन होगा? ये सवाल लंबे समय से चर्चा में है, क्योंकि राज्य को जुलाई 2022 से कोई स्थायी डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अब इस पद पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है और आज यानी गुरुवार का दिन काफी अहम है। दिल्ली में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) एक बैठक बुला रहा है, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा भेजे गए 14 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नामों पर मंथन होगा। इस बैठक के बाद तीन अधिकारियों का एक पैनल बनाया जाएगा और उसे पंजाब सरकार को भेजा जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इसी पैनल में से किसी एक को पंजाब का नया परमानेंट डीजीपी चुन लिया जाएगा।
फिलहाल, पंजाब की कमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव के हाथों में है, जिनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह बैठक गौरव यादव को स्थायी डीजीपी बनाने का रास्ता साफ करती है, या फिर पंजाब को कोई नया पुलिस मुखिया मिलता है।
राज्य के लिए यह फैसला सुरक्षा और प्रशासन के लिहाज़ से बहुत मायने रखता है।
डीजीपी की नियुक्ति का रास्ता साफ?
दरअसल, परमानेंट डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। राज्य सरकार सीनियर आईपीएस अधिकारियों की एक लिस्ट UPSC को भेजती है।
UPSC फिर उस लिस्ट में से योग्यता, अनुभव और बाकी मानकों के आधार पर तीन अधिकारियों का एक शॉर्टलिस्टेड पैनल तैयार करता है। यह पैनल वापस राज्य सरकार को भेजा जाता है, और फिर राज्य सरकार इनमें से किसी एक अधिकारी को स्थायी डीजीपी नियुक्त करती है।
पंजाब के मामले में भी ठीक यही प्रक्रिया चल रही है। आज की UPSC की बैठक इसी प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव है, जहाँ उन 14 नामों पर चर्चा होगी जो पंजाब सरकार ने भेजे हैं।
यह बैठक दिल्ली में होगी और इसमें केंद्र सरकार के साथ-साथ पंजाब सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
कहानी की शुरुआत जुलाई 2022 से होती है, जब पंजाब सरकार ने 1992 बैच के IPS अधिकारी गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी के रूप में नियुक्त किया था। इस नियुक्ति पर लगातार सवाल उठते रहे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य में कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति सिर्फ 'अस्थायी' होनी चाहिए और जल्द से जल्द स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि डीजीपी जैसे संवेदनशील पद पर 'कार्यवाहक' व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चलनी चाहिए।
इसी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, पंजाब में स्थायी डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी। इसी साल फरवरी में UPSC ने पंजाब सरकार से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे।
इसके जवाब में पंजाब सरकार ने सीनियर आईपीएस अधिकारियों की एक लिस्ट तैयार करके UPSC को भेजी। अब इसी लिस्ट में से UPSC आज तीन अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगा।
यह पैनल, पंजाब पुलिस के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दावेदार कौन-कौन? 14 अफसरों की लंबी लिस्ट
पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को UPSC को जो लिस्ट भेजी थी, उसमें कुल 14 सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल थे। इस सूची में वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव (1992 बैच) का नाम भी है।
वरिष्ठता के हिसाब से देखें तो गौरव यादव का नाम इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर है।
- 1992 बैच के अधिकारी: इस बैच में सबसे वरिष्ठ नाम डॉ. शरद सत्य चौहान का है, जिनके बाद क्रमशः हरप्रीत सिंह सिद्धू, गौरव यादव और कुलदीप सिंह का स्थान आता है।
- 1993 बैच के अधिकारी: इस सूची में गुरप्रीत कौर देव, जितेंद्र कुमार जैन और शशि प्रभा द्विवेदी के नाम भी शामिल हैं।
- 1994 बैच के अधिकारी: इस बैच से सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार सिन्हा, अमरदीप सिंह राय, वी. नीरजा, अनिता पुंज, नरेश कुमार और राम सिंह जैसे सात अधिकारी भी दावेदारों की दौड़ में हैं।
यह लिस्ट काफी लंबी है, लेकिन UPSC के पास इन सभी नामों पर विचार करके सबसे उपयुक्त तीन अधिकारियों को चुनने का अधिकार है।
कौन बन सकता है अगला परमानेंट डीजीपी?
UPSC, पंजाब सरकार द्वारा भेजी गई इन 14 आईपीएस अधिकारियों की सूची में से तीन अधिकारियों का एक पैनल शॉर्टलिस्ट कर सरकार को भेजेगा। इस पैनल में शामिल किसी भी एक अधिकारी को पंजाब सरकार स्थायी डीजीपी नियुक्त कर सकती है।
अगर UPSC वरिष्ठता के आधार को प्राथमिकता देता है, तो टॉप तीन नाम कुछ ऐसे हो सकते हैं:
- डॉ. शरद सत्य चौहान (1992 बैच, सूची में सबसे ऊपर)
- हरप्रीत सिंह सिद्धू (1992 बैच, वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर)
- गौरव यादव (1992 बैच, वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी, वरिष्ठता में तीसरे स्थान पर)
अगर यही तीनों नाम पैनल में आते हैं और पंजाब सरकार को ये पसंद आते हैं, तो यह संभव है कि पंजाब सरकार एक बार फिर गौरव यादव को ही डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह से राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह पैनल में से किसे चुनती है।
पैनल में शामिल बाकी नाम भी उतने ही काबिल और अनुभवी हैं, और किसी भी समय बाजी पलट सकती है।
इस दौड़ से बाहर कौन-कौन?
स्थायी डीजीपी की इस दौड़ में कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने खुद को इस प्रक्रिया से बाहर कर लिया है या जो बाहर हो चुके हैं। 1989 बैच के सामंत गोयल ने खुद ही इस पद के लिए अनिच्छा जताई है।
वहीं, अर्पित शुक्ला और ईश्वर सिंह जैसे अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस दौड़ में शामिल नहीं हैं। ऐसे में, अब सबकी निगाहें UPSC की आज होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहाँ पंजाब के अगले पुलिस मुखिया का रास्ता साफ होगा।
यह नियुक्ति पंजाब की कानून-व्यवस्था के लिए एक नया अध्याय लिखेगी।

