चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में आजकल एक अलग तरह का उबाल है। ये उबाल न किसी चुनावी मुद्दे का है, न किसी किसान आंदोलन का, बल्कि सीधे पंजाब पुलिस के दामन पर लगे एक दाग का है। दाग ऐसा, जो मानवाधिकारों के सबसे बड़े मंच पर सवालों के घेरे में है। बात हो रही है पिछले चार सालों में हुए करीब 35 कथित फर्जी एनकाउंटरों की, जिन पर अब पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन ने पंजाब पुलिस से आर-पार का जवाब मांगा है। ये कोई छोटी-मोटी शिकायत नहीं, बल्कि एक पैटर्न की बात है, एक तरीके की बात है, जिस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। कमीशन ने डीजीपी पंजाब को सख्त निर्देश दिए हैं कि आज इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें।
कहते हैं, जब बार-बार एक जैसी कहानी सामने आने लगे, तो शक गहरा हो जाता है। कुछ ऐसा ही दावा किया है पंजाब मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने।
उन्होंने बाकायदा ह्यूमन राइट्स कमीशन में एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें पंजाब में हुए इन 35 एनकाउंटरों को फर्जी और पूर्व नियोजित बताया गया है। उनकी शिकायत में जिस बात पर सबसे ज़्यादा जोर दिया गया है, वो है इन एनकाउंटरों में पुलिस की कहानी का एक जैसा होना।
ये कहानी कुछ ऐसी है, जो फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन इसके पीछे इंसानी जिंदगियों का सवाल है।
एनकाउंटर का एक ही 'फिल्मी' पैटर्न
शिकायतकर्ता रणजीत सिंह का आरोप है कि पंजाब पुलिस एक खास तरीके से काम करती रही है। पहले किसी आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है।
फिर उसे हथियार या नशा तस्करी की बरामदगी के लिए कहीं ले जाया जाता है। और यहीं से शुरू होती है वो 'फिल्मी' कहानी।
आरोप है कि रास्ते में आरोपी पुलिस पर हमला करने की कोशिश करता है, या हथियार छीनने की कोशिश करता है, या फिर फायरिंग कर देता है। और फिर पुलिस जवाबी कार्रवाई में गोली चलाती है, जो हमेशा आरोपी के पैर में लगती है।
ये एक ऐसा पैटर्न है, जो कई मामलों में हूबहू दोहराया गया है। रणजीत सिंह की शिकायत कहती है कि इस तरह के एनकाउंटर असल में पूर्व नियोजित होते हैं, यानी पहले से ही तय किए गए होते हैं, या फिर पूरी तरह से फर्जी होते हैं।
उनका दावा है कि इन कथित मुठभेड़ों का मकसद मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही 'खत्म' कर देना होता है, ताकि कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक जांच से बचा जा सके। उन्होंने गुरदासपुर में हुए एक हालिया एनकाउंटर का ज़िक्र भी किया, जिसमें ज़मीनी हकीकत और पुलिस के आधिकारिक बयानों में बड़ा अंतर होने का आरोप लगाया गया है।
संविधान और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि पंजाब पुलिस इन कथित एनकाउंटरों के ज़रिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का सीधा-सीधा उल्लंघन कर रही है। अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना उसके जीवन और स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। लेकिन, इन एनकाउंटरों के ज़रिए, शिकायतकर्ता के अनुसार, पुलिस खुद ही न्याय करने का काम कर रही है, जो कि कानून के राज के खिलाफ है।
इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने एनकाउंटरों को लेकर जो सख्त निर्देश जारी किए हैं, उनकी भी खुलेआम अनदेखी करने का आरोप है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि एनकाउंटर जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और हर पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई फर्जी मुठभेड़ न हो।
'गोली का बदला गोली' और राजनीतिक बयानबाजी
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है, वो है सत्ताधारी दल के कुछ प्रतिनिधियों की बयानबाजी। शिकायत में कहा गया है कि कुछ नेता 'गोली का बदला गोली' जैसी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं।
ये बयानबाजी पुलिस को एक तरह से खुला हाथ देती है और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए उकसाती है। ऐसे बयान अक्सर कानून के राज और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं, और पुलिस को 'जस्टिस ऑन द स्पॉट' करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरनाक है।
किन-किन मामलों का हुआ जिक्र?
रणजीत सिंह ने अपनी शिकायत में कई ऐसे मामलों का हवाला दिया है, जिन्हें वो संदिग्ध मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखते हैं। इनमें कुछ प्रमुख नाम और घटनाएं इस प्रकार हैं:
- दिसंबर 2023 में अमृतसर के जंडियाला गुरु इलाके में गैंगस्टर और हेरोइन तस्कर अमृतपाल सिंह का मामला।
- अमृतसर में फायरिंग के एक अन्य मामले के आरोपी अमृतपाल सिंह का मामला।
- गुरदासपुर में 19 वर्षीय युवक रणजीत सिंह का मामला।
- फतेहगढ़ साहिब में गैंगस्टर तेजा मेहंदीपुरिया का मामला।
- गैंगस्टर सुखविंदर सिंह का मामला।
- बरनाला में गैंगस्टर गुरमीत सिंह सहित संजू बहमन और सुखदेव सिंह के मामले।
इन सभी मामलों में, शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस ने लगभग एक ही तरीके से कार्रवाई की, जिससे इन एनकाउंटरों की निष्पक्षता और वैधता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इन मामलों की सच्चाई क्या है, क्या वाकई पुलिस ने कानून का उल्लंघन किया, इन सभी सवालों के जवाब अब पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन में पुलिस को देने होंगे।
आज का दिन इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब पुलिस को इन गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखना है। पूरे पंजाब और देश की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं कि आखिर इन 35 कथित फर्जी एनकाउंटरों की हकीकत क्या है।

