वैश्विक बाजार: आज सुबह जब एशियाई बाजारों के दरवाजे खुले, तो निवेशकों की धड़कनें तेज हो गईं। वजह थी एक जबरदस्त भूचाल, जिसने खास तौर पर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को अपनी चपेट में ले लिया। ऐसा लगा जैसे अचानक किसी ने बाज़ार के सबसे तेज़ खिलाड़ियों पर 'सेल' का बटन दबा दिया हो। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी की कमाई की रिपोर्ट दमदार आने के बावजूद उसके शेयर धड़ाम हो गए, जिसने पूरे दक्षिण कोरियाई बाजार को हिला दिया।
आप समझ लीजिए, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी इंडेक्स अकेले ही 4% से ज़्यादा नीचे आ गया, जबकि उनके स्मॉल-कैप कोस्डैक इंडेक्स में भी 0.72% की गिरावट दर्ज हुई। जापान में भी कुछ ऐसा ही मंज़र था।
वहां का निक्केई 225 इंडेक्स भले ही थोड़ा नीचे आया, लेकिन इसके ठीक उलट बड़ा टॉपिक्स इंडेक्स 0.60% ऊपर चढ़ गया, जो बताता है कि बाज़ार में एक मिली-जुली कहानी चल रही थी। उधर, ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भी 0.12% नीचे आया।
हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स भी 23,571 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद 23,616.32 से नीचे था।
बाज़ार के खिलाड़ियों की मानें तो आज एशियाई बाजारों को हिलाने के पीछे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर आया नया बिकवाली का दबाव सबसे बड़ी वजह थी। जैसे ही सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने अपनी तिमाही कमाई की रिपोर्ट जारी की, उसके शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई।
यह गिरावट सिर्फ सैमसंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरे टेक सेक्टर में एक डर का माहौल बना दिया।
एशियाई बाजारों में उथल-पुथल: टेक स्टॉक्स का तूफान
इस पूरे तूफान का केंद्र थे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स, जिन्होंने आज सबसे ज्यादा मार झेली। हैरान करने वाली बात यह थी कि सैमसंग ने अपनी तिमाही मुनाफे में 19 गुना बढ़ोतरी की रिपोर्ट दी थी, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं ज़्यादा थी।
कंपनी ने बताया कि AI-पावर्ड डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की जबरदस्त डिमांड की वजह से यह शानदार प्रदर्शन हुआ है। इसके बावजूद, सैमसंग के शेयर 5% से ज़्यादा गिर गए।
यह बात निवेशकों के लिए पहेली बन गई है कि आखिर इतनी अच्छी कमाई के बावजूद शेयर क्यों लुढ़क गए?
सैमसंग के साथ-साथ, कोस्पी इंडेक्स 3.5% नीचे आया और SK हाइनिक्स के शेयर भी 1% गिरे। SK हाइनिक्स ने हाल ही में अमेरिकी लिस्टिंग के लिए मार्केटिंग प्रोसेस ऑफिशियली लॉन्च किया था, शायद इस खबर ने भी निवेशकों को थोड़ा संशय में डाला।
अमेरिकी सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने भले ही रिकॉर्ड तिमाही परफॉर्मेंस दी हो, लेकिन अब मार्केट पार्टिसिपेंट्स इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या बढ़ा हुआ कैपिटल खर्च, बढ़ता कॉम्पिटिशन और कैपेसिटी बढ़ाने से मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी अर्निंग्स ग्रोथ होगी?
निवेशक अब इस बात का साफ सबूत ढूंढ रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ये रैली अपनी रफ्तार बनाए रख सकती है या नहीं। AI की लहर पर सवार होकर कई टेक कंपनियों के शेयर आसमान छू रहे थे, लेकिन सैमसंग के नतीजों और उसके बाद की गिरावट ने एक बार फिर निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ये 'AI बूम' सच में टिकाऊ है, या इसमें भी कहीं कोई गुब्बारा छिपा है जो कभी भी फूट सकता है?
कमोडिटी और करेंसी मार्केट का हाल
उधर, कमोडिटी बाजार में भी हलचल मची रही। कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी दिखी।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 69 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। इसकी वजह थी बाजार में तेल की अधिक सप्लाई के संकेत।
जब सऊदी अरब ने तेल की कीमतें कम कीं और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (जो तेल शिपिंग का एक अहम रास्ता है) के ज़रिए शिपिंग एक्टिविटी बेहतर हुई, तो ओवरसप्लाई का डर बढ़ गया। सीधी भाषा में कहें तो जब बाजार में किसी चीज की सप्लाई ज्यादा हो जाती है, तो उसकी कीमतें कम होने लगती हैं, और कच्चे तेल के साथ भी यही हुआ।
करेंसी मार्केट में जापानी येन डॉलर के मुकाबले लगभग 162.08 पर लगभग स्थिर रहा। यह स्थिति तब थी जब हेज फंड्स ने 2007 के बाद से करेंसी पर अपनी सबसे बड़ी मंदी की पोजीशन बनाई हुई थी।
यानी, बहुत से बड़े फंड्स को लग रहा था कि येन कमजोर होगा, लेकिन येन फिर भी मजबूती से खड़ा रहा, जो बाजार की अप्रत्याशित चालों को दिखाता है।
अमेरिका में बॉन्ड्स की तेजी और फेडरल रिजर्व की चिंता
अब बात अमेरिका की। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग सेशन के दौरान, शॉर्ट-टर्म ट्रेजरी नोट्स में उछाल देखने को मिला।
इसकी वजह थी पिछले हफ्ते आई मज़बूत जॉब्स रिपोर्ट का असर, जो अभी भी मार्केट पर बना हुआ था। यह डेटा इस उम्मीद को और पुख्ता करता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ाएगा।
जब जॉब मार्केट मजबूत होता है और महंगाई पर काबू पाने की कोशिश की जाती है, तो फेडरल रिजर्व अक्सर ब्याज दरें बढ़ाता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर बॉन्ड्स को निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाती हैं, क्योंकि उनसे बेहतर रिटर्न मिलता है।
इसी वजह से शॉर्ट-टर्म ट्रेजरी बॉन्ड्स में तेज़ी आई, क्योंकि निवेशक भविष्य में बढ़ने वाली ब्याज दरों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। इन सारे संकेतों ने वैश्विक बाजार में एक अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जहां निवेशक हर खबर पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।






































