कोच्चि: देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली और बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण करने वाली कंपनी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की बात हो रही है। अब खबर ये है कि भारत सरकार इस महारत्न कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। जी हां, सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) का ऐलान कर दिया है। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए एक बढ़िया मौका बन सकती है क्योंकि सरकार ने शेयरों का फ्लोर प्राइस, यानी न्यूनतम मूल्य, बाजार भाव से करीब 7 प्रतिशत कम तय किया है। तो अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं, या किसी डिफेंस सेक्टर की कंपनी में पैसा लगाने का सोच रहे थे, तो ये खबर आपके काम की है।
सोमवार को कोचीन शिपयार्ड का शेयर बाजार में 19 रुपये टूटकर 1,504.75 रुपये पर बंद हुआ था। ठीक इसी के बाद सरकार ने अपनी योजना का खुलासा किया।
पहले चरण में सरकार कंपनी की 2.52% हिस्सेदारी बेचेगी। लेकिन यहीं बात खत्म नहीं होती।
अगर निवेशकों ने इसमें अच्छी रुचि दिखाई, तो 'ग्रीन-शू ऑप्शन' के तहत इतनी ही अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बिक्री के लिए लाई जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार अपनी 5.04% तक हिस्सेदारी बेच सकती है, जो एक बड़ा आंकड़ा है।
समझिए OFS का गणित और तारीखें
अब बात करते हैं सबसे अहम जानकारी की – कितने में मिलेगा शेयर? सरकार ने OFS के लिए फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय किया है। जैसा कि हमने बताया, ये सोमवार के बंद भाव (1,504.75 रुपये) से करीब 7.2% सस्ता है।
यानी, निवेशकों को बाजार भाव से कम दाम पर शेयर खरीदने का मौका मिलेगा। लेकिन किसके लिए कब खुलेगी बोली?
- गैर-रिटेल निवेशक: इन निवेशकों के लिए बोली लगाने का मौका 7 जुलाई, 2026 को मिलेगा।
- रिटेल निवेशक: छोटे और आम निवेशकों के लिए OFS 8 जुलाई, 2026 को खुलेगा।
तो अगर आप रिटेल निवेशक हैं, तो 8 जुलाई का दिन आपके लिए खास होने वाला है। अपनी तैयारी पूरी रखिए।
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
ये सवाल कई लोगों के मन में आएगा कि आखिर सरकार अपनी सफल कंपनी में हिस्सेदारी क्यों बेच रही है? तो इसके पीछे सरकार का एक बड़ा 'विनिवेश' (Disinvestment) कार्यक्रम है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर फंड जुटाती है।
इस पैसे का इस्तेमाल कई बार सरकारी योजनाओं को फंड करने या राजकोषीय घाटे को कम करने में किया जाता है। ये सरकार की नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह कुछ पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी कम करती है, ताकि वे और अधिक पेशेवर तरीके से काम कर सकें और बाजार में उनकी लिक्विडिटी बढ़ सके।
मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा पर गौर करें तो, कोचीन शिपयार्ड में सरकार की हिस्सेदारी फिलहाल 67.91% है। इसके अलावा, रिटेल निवेशकों के पास 22.95% हिस्सा है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के पास 3.10% और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के पास 6.05% हिस्सा है।
इस OFS के बाद सरकार की हिस्सेदारी थोड़ी और कम हो जाएगी, लेकिन वह फिर भी कंपनी में सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बनी रहेगी।
सरकार ने अब तक कितना जुटाया?
केंद्र सरकार पिछले कुछ महीनों से विनिवेश के मोर्चे पर काफी एक्टिव दिख रही है। 21 मई से अब तक सरकार ने अलग-अलग PSU कंपनियों के OFS के जरिए 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जुटा लिया है।
यह दिखाता है कि सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है और कोचीन शिपयार्ड का OFS इसी कड़ी का एक और हिस्सा है।
शेयर बाजार में कोचीन शिपयार्ड का प्रदर्शन
निवेशक हमेशा कंपनी के पिछले प्रदर्शन को देखते हैं। कोचीन शिपयार्ड के शेयर की बात करें तो, सोमवार को इसमें 1.25% की गिरावट देखी गई और यह 1,504.75 रुपये पर बंद हुआ।
हालांकि, पिछले एक महीने में इस सरकारी कंपनी के स्टॉक ने निवेशकों को 6.94% का रिटर्न दिया है, जो ठीक-ठाक कहा जा सकता है। लेकिन अगर एक साल का आंकड़ा देखें, तो इसमें 26.70% की गिरावट आई है।
यह बताता है कि भले ही कंपनी का बिजनेस अच्छा हो, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
कोचीन शिपयार्ड का कारोबार
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी शिपयार्ड कंपनियों में से एक है। यह सिर्फ जहाज बनाती नहीं, बल्कि देश की रक्षा को भी मजबूत करती है।
कंपनी भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए युद्धपोत और अन्य रक्षा जहाज बनाती है। इसके अलावा, यह कमर्शियल जहाजों का निर्माण, जहाजों की मरम्मत (शिप रिपेयर), और उनका रखरखाव (मेंटेनेंस) भी करती है।
हाल के सालों में, सरकार के डिफेंस सेक्टर पर बढ़ते फोकस और बड़े-बड़े ऑर्डर मिलने की वजह से इस कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा है। यह भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, और यही वजह है कि इसमें निवेश को कई लोग एक अच्छा अवसर मानते हैं।






































