दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले में इन दिनों सरकारी दफ्तरों में हलचल तेज है। अचानक एक ऐसा फरमान आया है, जिसने बाबू से लेकर बड़े अधिकारियों तक सबकी नींद उड़ा दी है। बात छोटी-मोटी नहीं, पूरे 131 कर्मचारियों के तबादले की है, वो भी महज़ तीन दिनों के भीतर नई जगह पर प्रभार संभालने के सख्त निर्देश के साथ। ज़िलाधिकारी कार्यालय से जारी इस आदेश ने कलेक्ट्रेट के गलियारों में सन्नाटा तोड़ दिया है और चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि आखिर ये बड़ा प्रशासनिक फेरबदल क्यों और किस मकसद से हुआ है।
दरअसल, यह कोई मनमाना फैसला नहीं, बल्कि प्रशासन की अपनी एक पुरानी नीति का हिस्सा है। उन सभी सहायक प्रशासनिक अधिकारियों, प्रधान लिपिकों, उच्चवर्गीय लिपिकों, निम्नवर्गीय लिपिकों और संविदा कर्मियों को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी है, जो तीन साल से ज़्यादा समय से एक ही कार्यालय में जमे हुए थे।
प्रशासन का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर बने रहने से काम में एकरसता आ जाती है और कई बार कार्यशैली पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए, एक तय समय के बाद कर्मचारियों का फेरबदल ज़रूरी हो जाता है ताकि व्यवस्था में नई ऊर्जा बनी रहे और पारदर्शिता भी आए।
लेकिन इस बार का ट्रांसफर लिस्ट कुछ ज़्यादा ही लंबा है, जिसमें लगभग हर बड़े और छोटे दफ्तर से कर्मचारियों का नाम शामिल है।
कौन कहां पहुंचा: तबादलों की पूरी लिस्ट
इस तबादला एक्सप्रेस में कई जाने-पहचाने नाम और उनके नए ठिकाने हैं। जैसे, अनुमंडल कार्यालय सदर में तैनात मनोज कुमार को अब जिला आपदा प्रबंधन शाखा की ज़िम्मेदारी दी गई है।
ज़रा सोचिए, आपदा प्रबंधन, कितना महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग! वहीं, जिला आपदा प्रबंधन शाखा में अपनी सेवाएं दे रहे राजीव रंजन को अनुमंडल कार्यालय सदर भेजा गया है, यानी एक तरह से अदला-बदली की गई है। इसी क्रम में, जिला नजारत शाखा में कार्यरत सुरेश महतो का स्थानांतरण जिला राजस्व शाखा में किया गया है।
राजस्व शाखा, जिसका सीधा संबंध जनता से होता है।
यह फेरबदल सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। सदर अनुमंडल के प्रधान लिपिक सुरेश मंडल को अब जिला पंचायत राज कार्यालय का रुख करना होगा।
जिला पंचायत राज कार्यालय की अनिता कुमारी को जिला सामान्य शाखा की ज़िम्मेदारी मिली है। जिला राजस्व शाखा में तैनात मोहम्मद नेहाल अहमद को जिला कोषागार कार्यालय भेजा गया है, जबकि कुमार दीपक को जिला कोषागार से जिला राजस्व शाखा में ट्रांसफर किया गया है।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव में, श्याम चंद्र मिश्र को अनुमंडल कार्यालय, सदर से सीधे जिला कोषागार कार्यालय भेजा गया है। कोषागार, जहां सरकारी धन का हिसाब-किताब रहता है, वहां की ज़िम्मेदारी बहुत अहम होती है।
सिर्फ बड़े दफ्तर नहीं; प्रखंडों तक असर
कई बार लगता है कि ऐसे फेरबदल सिर्फ बड़े शहर के मुख्य दफ्तरों तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन दरभंगा का यह ट्रांसफर ड्राइव दिखा रहा है कि गांव-देहात के प्रखंड और अंचल कार्यालय भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। जिले के बहादुरपुर, तारडीह, बेनीपुर, बिरौल, जाले, मनीगाछी, अलीनगर, हनुमाननगर, बहेड़ी, केवटी, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, किरतपुर, सिंहवाड़ा, घनश्यामपुर, गौड़ाबौराम और हायाघाट जैसे तमाम प्रखंड और अंचल कार्यालयों में बड़ी संख्या में लिपिकों का परस्पर स्थानांतरण हुआ है।
इसका मतलब है कि ज़मीनी स्तर पर भी प्रशासन अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और कार्यप्रणाली में बदलाव की उम्मीद कर रहा है।
कुछ और नामों पर गौर करें तो पता चलता है कि यह लिस्ट कितनी विस्तृत है। राजा कुमार पासवान को बहादुरपुर प्रखंड से जिला नजारत शाखा में भेजा गया है।
विनोद पासवान, जो अनुमंडल कार्यालय, बेनीपुर में थे, अब बहादुरपुर प्रखंड में अपनी सेवाएं देंगे। प्रवीण कुमार कर्ण को हनुमाननगर प्रखंड से बिरौल प्रखंड में स्थानांतरित किया गया है।
अरुण कुमार चौधरी को जिला कोषागार से हनुमाननगर प्रखंड की ज़िम्मेदारी मिली है, वहीं पवन कुमार मिश्र बहादुरपुर अंचल से घनश्यामपुर अंचल पहुंचे हैं। दीपक कुमार को बिरौल अंचल से तारडीह प्रखंड भेजा गया है।
ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि कैसे एक कुर्सी से दूसरी कुर्सी तक कर्मचारियों की अदला-बदली हुई है।
विभिन्न शाखाओं में भी हुआ फेरबदल
यह प्रशासनिक फेरबदल सिर्फ राजस्व या पंचायत राज तक सीमित नहीं है। राज कुमार सिन्हा को सिंहवाड़ा अंचल से जिला स्थापना शाखा में पदस्थापित किया गया है।
शिवेंद्र कुमार को जिला राजस्व शाखा से जिला आपूर्ति कार्यालय में नई भूमिका मिली है, जबकि नयन रंजन को जिला स्थापना शाखा से जिला पंचायत राज कार्यालय भेजा गया है। चंदन कुमार सिन्हा, जो पहले जिला कोषागार में थे, उन्हें अब जिला भू-अर्जन कार्यालय की ज़िम्मेदारी संभालनी होगी।
भू-अर्जन कार्यालय का काम भी काफी संवेदनशील होता है, खासकर जब विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की बात आती है।
इसके अलावा, जिला गोपनीय शाखा, जिला लोक सूचना कार्यालय, जिला कला संस्कृति कार्यालय, जिला उपभोक्ता फोरम, किशोर न्याय बोर्ड और बिहार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों में भी कर्मचारियों की नई प्रतिनियुक्ति की गई है। इससे साफ है कि प्रशासन पूरे ज़िले में एक नई ऊर्जा और नई कार्यशैली स्थापित करना चाहता है।
अब इन सभी 131 कर्मचारियों को अगले तीन दिनों के भीतर अपने पुराने पद का प्रभार सौंपकर नई जगह पर योगदान देना होगा। यह एक चुनौती भरा समय है, जब उन्हें पुरानी जिम्मेदारियां समेटकर नई भूमिकाओं में ढलना होगा।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस फेरबदल से कार्यकुशलता बढ़ेगी और जनता को बेहतर सेवाएं मिल पाएंगी।


