गोरखपुर: भैया, विदेश जाने का सपना न जाने कितने नौजवानों की आंखों में चमकता है। तरक्की, बेहतर ज़िंदगी और खूब सारे पैसे कमाने की आस में वो एजेंटों के चक्कर काटते हैं। लेकिन कई बार ये सपने इतनी बुरी तरह टूटते हैं कि ज़िंदगी भर का घाव दे जाते हैं। गोरखपुर से भी एक ऐसी ही कहानी सामने आई है, जहां दो भाइयों को मलेशिया में नौकरी का झांसा देकर बैंकॉक भेज दिया गया और वहां उन्हें तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। सोचिए, एक अजनबी मुल्क, अजनबी लोग और तीन दिन तक बिना कुछ खाए-पिए एक कमरे में बंद रहना, क्या हाल हुआ होगा उनका!
मामला कुछ यूं है कि देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव के रहने वाले ज्ञानदास ने कैंट थाने में एक तहरीर दी है। ज्ञानदास ने पुलिस को बताया कि उनके भाई भगवानदास और गोपालदास, दोनों विदेश जाकर रोज़गार कमाना चाहते थे।
इस तलाश में उन्हें पता चला कि गोरखपुर के कैंट इलाके के सिंघड़िया में सुग्रीव सिंह और जंगल सखनी के रामानुज यादव नाम के दो लोग विदेश में नौकरी लगवाने का काम करते हैं। इन दोनों का सिंघड़िया में एक बकायदा ऑफिस भी है।
भाइयों को लगा कि शायद यहीं उनकी किस्मत का ताला खुलेगा। वे दोनों सिंघड़िया स्थित उस ऑफिस पहुंचे।
वहां उनकी मुलाकात रामानुज यादव और सूबा बाजार के अमर चौहान से हुई। आरोपियों ने उनसे बात की और मलेशिया में बढ़िया नौकरी दिलवाने का पूरा भरोसा दिलाया।
उन्होंने ऐसे सपने दिखाए कि भगवानदास और गोपालदास उनकी बातों में आ गए।
लाखों रुपये ठगे और टूरिस्ट वीज़ा पर बैंकॉक भेजा
पीड़ित भाइयों की तहरीर के मुताबिक, जालसाजों ने उनसे कुल 2 लाख 52 हज़ार रुपये ले लिए। ये पैसे दो किस्तों में दिए गए - 30 मार्च और 19 अप्रैल 2026 को।
इसमें से 1 लाख 89 हज़ार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए और 63 हज़ार रुपये नकद दिए गए। भाइयों ने पूरा भरोसा करके ये पैसे दिए थे, क्योंकि उन्हें मलेशिया में नौकरी मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन असलियत कुछ और ही थी।
पैसे लेने के दो दिन बाद ही, 21 अप्रैल को इन जालसाजों ने दोनों भाइयों को लखनऊ से बैंकॉक जाने वाली फ्लाइट में बैठा दिया। चौंकने वाली बात ये थी कि उन्हें टूरिस्ट वीज़ा पर भेजा गया था, जबकि वादा मलेशिया में नौकरी का था।
यहीं से खेल शुरू हुआ, जिसकी उन्हें तब तक कोई खबर नहीं थी। वे ये सोचकर खुश थे कि अब उनकी ज़िंदगी बदलने वाली है।
बैंकॉक में तीन दिन का नर्क
बैंकॉक पहुंचने पर जो हुआ, वो किसी बुरे सपने से कम नहीं था। एयरपोर्ट पर पहले से मौजूद कुछ लोग उन्हें अपने साथ ले गए।
इन लोगों ने सीधे उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। ज्ञानदास के भाइयों का आरोप है कि उन्हें तीन दिनों तक उस कमरे में बंधक बनाकर रखा गया।
सबसे डरावनी बात ये थी कि उन्हें इन तीन दिनों में खाने-पीने को कुछ भी नहीं दिया गया।
सोचिए, एक नया देश, जहां की भाषा नहीं आती, कोई जानने वाला नहीं और ऊपर से बिना किसी जानकारी के बंद कर देना। उनका क्या हाल हुआ होगा? वे बहुत ज़्यादा डरे हुए थे।
उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो कहां हैं, उन्हें क्यों बंधक बनाया गया है और आगे उनके साथ क्या होने वाला है। हर पल एक खौफ में बीत रहा था।
उन्हें अपनी जान का डर सता रहा था।
किसी तरह जान बचाकर भागे और घर वापस लौटे
कहते हैं, जब जान पर बन आती है, तो इंसान कुछ भी कर सकता है। ऐसे ही कुछ उन दोनों भाइयों के साथ हुआ।
उन्होंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और दिमाग लगाकर उस जगह से भागने में कामयाब रहे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने किसी तरह अपने घरवालों से संपर्क किया।
घर पर मौजूद परिवार ने जैसे-तैसे पैसों का इंतज़ाम किया और उनकी वापसी का बंदोबस्त किया। तब जाकर वे अपनी जान बचाकर भारत वापस लौट पाए।
ये उनके लिए एक नया जन्म जैसा था।
रुपये वापस मांगे तो मिली जान से मारने की धमकी
भारत आने के बाद, जब इन दोनों भाइयों ने सुग्रीव सिंह, रामानुज यादव और अमर चौहान से अपने ठगे गए 2 लाख 52 हज़ार रुपये वापस मांगे, तो जवाब में उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने लगी। आरोपियों ने साफ कह दिया कि अगर उन्होंने ज़्यादा होशियारी दिखाई, तो उसका अंजाम बुरा होगा।
अब जहां एक तरफ ज़िंदगी बचाने की खुशी थी, वहीं दूसरी तरफ अपने ही देश में धमकियों का डर।
इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित ज्ञानदास ने कैंट थाने में आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि वे इस पूरे फ्रॉड की सच्चाई का पता लगा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देखना होगा कि इन ठगों को कब तक कानून के शिकंजे में लाया जाता है और पीड़ित भाइयों को कब तक इंसाफ मिल पाता है।




































