हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई में रात के सन्नाटे में एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। देर रात आसमान में बिजली कड़क रही थी, तेज हवाएं पेड़ों से टकरा रही थीं और मूसलाधार बारिश ने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया था। इस भयानक आंधी-तूफान और घने अंधेरे के बीच, शहर कोतवाली क्षेत्र के लालपालपुर के मजरा कंहेटा में एक घर की छत से 70 साल के बुजुर्ग कपड़ा व्यापारी रामलखन पाल अचानक नीचे आ गिरे। यह सब इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। वजह थी रात का घना अंधेरा और आंधी-पानी, जिसने उन्हें इतना भ्रमित कर दिया कि वे सीढ़ियों की बजाय, सीधे सड़क की तरफ बढ़ गए और मौत के मुंह में समा गए।
सोमवार देर रात करीब डेढ़ बजे हरदोई शहर में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। तेज आंधी ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया, मानो कोई अदृश्य शक्ति सब कुछ उड़ा ले जाने को तैयार हो।
मूसलाधार बारिश ऐसी कि मानो आसमान फट पड़ा हो और पानी की चादर बिछ गई हो। इस भयानक रात में बिजली ने भी साथ छोड़ दिया।
चारों तरफ घना अंधेरा छा गया, इतना घना कि अपना हाथ भी मुश्किल से दिखाई दे। ऐसे ही माहौल में लालपालपुर के मजरा कंहेटा में रहने वाले 70 वर्षीय रामलखन पाल अपने नए मकान की पहली मंजिल की छत पर थे।
रूटीन और रात का अंधकार
मृतक रामलखन पाल के बेटे आशीष पाल ने बताया कि अहिरोरी रोड पर उनका एक नया, एक मंजिला मकान है। सुरक्षा कारणों से रामलखन पाल की ये रोज की आदत थी कि वे रात में अपने इसी नए मकान में सोने जाते थे, जबकि उनका बाकी परिवार लालपालपुर चौराहे के पास अपने पुराने घर में रहता था।
यह एक सामान्य दिनचर्या थी, जो उन्हें सुरक्षित महसूस कराती थी। लेकिन सोमवार की वो रात, उनकी इस दिनचर्या पर भारी पड़ गई।
आधी रात के बाद जब आंधी और बारिश ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू किया, तब रामलखन पाल ने शायद नीचे आने का फैसला किया होगा।
रात का अंधेरा, ऊपर से बिजली गुल, और तेज आंधी-बारिश की आवाज़..
. इन सबने मिलकर एक ऐसा माहौल बना दिया था कि इंसान का दिमाग भी भ्रमित हो जाए।
70 साल के रामलखन पाल के साथ भी यही हुआ। अंधेरे में उन्हें ठीक से रास्ता नहीं सूझा।
सीढ़ियों की दिशा में जाने के बजाय, वे अनजाने में सड़क की दिशा में बढ़ गए। एक कदम, दूसरा कदम और फिर अचानक, उन्होंने अपना संतुलन खो दिया।
वे पहली मंजिल से सीधे नीचे सड़क पर जा गिरे।
पड़ोसियों का अलर्ट और मेडिकल इमरजेंसी
रामलखन पाल के नीचे गिरने की तेज आवाज़ ने रात के सन्नाटे को तोड़ दिया। आस-पड़ोस के लोग, जो शायद आंधी-बारिश के शोर में भी कुछ अनहोनी का आभास कर रहे थे, इस आवाज़ से तुरंत अलर्ट हो गए।
वे फौरन मौके पर पहुंचे और जो देखा, उससे उनके होश उड़ गए। रामलखन पाल गंभीर रूप से घायल सड़क पर पड़े थे।
पड़ोसियों ने तुरंत इसकी सूचना उनके परिजनों को दी। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
घायल रामलखन पाल को परिवार के लोग बिना एक पल गंवाए तुरंत मेडिकल कॉलेज लेकर भागे। वहां डॉक्टरों ने उनकी हालत देखी और प्राथमिक उपचार भी दिया, लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें फौरन लखनऊ रेफर कर दिया।
शायद डॉक्टरों को लगा कि लखनऊ में बेहतर और विशेषज्ञ इलाज मिल पाएगा।
अस्पताल का सफर और अंतिम विदाई
मगर, परिवार की शायद अपनी कुछ मजबूरियां थीं, या शायद वे इतनी रात में शहर से बाहर लखनऊ नहीं जाना चाहते थे। इसलिए परिजन उन्हें लखनऊ ले जाने की बजाय, हरदोई शहर के ही एक निजी अस्पताल में ले गए।
वहां भी डॉक्टरों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, हर संभव उपचार दिया, मगर चोट इतनी गहरी थी कि रामलखन पाल ने इलाज के दौरान ही अपनी आखिरी सांस ली। इस खबर ने परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ तोड़ दिया।
रामलखन पाल अपने पीछे पत्नी सुदामा देवी, तीन विवाहित बेटियां और एक विवाहित बेटा आशीष पाल छोड़ गए हैं। एक हंसता-खेलता परिवार इस अचानक हुई घटना से पूरी तरह टूट गया था।
इस दुख की घड़ी में, परिवार ने एक बेहद मुश्किल फैसला लिया। उन्होंने आपसी सहमति से तय किया कि वे अपने पिता के शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे।
शायद वे नहीं चाहते थे कि इस दर्दनाक घटना के बाद उनके प्रियजन के शरीर को किसी और प्रक्रिया से गुजरना पड़े, वे उन्हें शांति से अंतिम विदाई देना चाहते थे। इस निर्णय के बाद, शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव ले जाया गया, जहां भारी मन से और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
यह घटना हरदोई में कई दिनों तक चर्चा का विषय बनी रही, एक याद दिलाती हुई कि प्रकृति की मार और एक पल की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।

