श्रावस्ती: मंगलवार की सुबह करीब 4 बजे, जब पूरा श्रावस्ती जिला गहरी नींद में डूबा था, इकौना बाईपास पर सन्नाटा पसरा था, तभी एक जोरदार धमाके ने सब कुछ हिलाकर रख दिया। ये धमाका ऐसा था कि जिसने सुना, उसकी नींद उड़ गई। दरअसल, बहराइच की तरफ से एक तेज रफ्तार ट्रक आ रहा था और उसने बाईपास पर भारत धर्म कांटा के पास खड़ी एक डीसीएम में पीछे से ऐसी टक्कर मारी कि डीसीएम बेकाबू होकर सड़क किनारे एक घर में ही जा घुसी। ये सिर्फ एक हादसा नहीं था, ये उस घर के मालिक, अधिवक्ता राकेश पांडेय के लिए एक खौफनाक सुबह की शुरुआत थी, जिसकी चारदीवारी और बाउंड्रीवाल, रेलिंग सब कुछ चंद सेकेंड में मलबे में तब्दील हो गए।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डीसीएम बस वहीं खड़ी नहीं रह पाई। वो उछलकर बेकाबू हुई और किसी बुलेट ट्रेन की तरह सीधा सड़क किनारे बने घर में घुस गई।
सोचिए, सुबह-सुबह जब आप आराम कर रहे हों और अचानक एक विशालकाय वाहन आपके घर की दीवार तोड़कर अंदर घुस आए! गनीमत ये रही कि उस वक्त घर के अंदर कोई उस हिस्से में नहीं था, वरना मंजर और भी भयानक हो सकता था। इस हादसे की जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े।
धूल और धुएं के गुबार के बीच जो सामने आया, वो किसी युद्ध के मैदान से कम नहीं था – एक तरफ क्षतिग्रस्त डीसीएम, दूसरी तरफ ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह से पिचका हुआ, और बीच में अधिवक्ता राकेश पांडेय का टूटा हुआ मकान।
जो लोग मौके पर पहुंचे, उन्होंने देखा कि ट्रक का क्लीनर घायल अवस्था में पड़ा था। उसे तुरंत मदद दी गई और एंबुलेंस बुलाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकौना भेजा गया, जहाँ उसका इलाज किया गया।
शुक्र है कि ड्राइवर को गंभीर चोटें नहीं आईं और क्लीनर की जान बच गई। लेकिन, यह घटना एक बार फिर नेशनल हाईवे 730 पर बढ़ती लापरवाही और तेज रफ्तार की ओर इशारा करती है, जहां आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं और कई बार तो लोग अपनी जान तक गंवा बैठते हैं।
हादसे के बाद का मंजर और पुलिस की कार्रवाई
इस हादसे की खबर तुरंत ही पुलिस को दी गई। इकौना हाईवे पुलिस प्रभारी विनोद कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने सबसे पहले राहत और बचाव का काम संभाला। क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया गया ताकि यातायात फिर से सुचारू हो सके।
बाईपास पर सुबह का समय होने की वजह से लोगों की भीड़ कम थी, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अगर ये हादसा दिन के वक्त होता, तो शायद परिणाम कुछ और ही होते। पुलिस ने तुरंत अपनी जांच शुरू कर दी है, ताकि पता लगाया जा सके कि आखिर इतनी लापरवाही से ट्रक कौन चला रहा था और क्या कारण थे कि वह खड़ी डीसीएम को देख नहीं पाया या नियंत्रित नहीं कर पाया।
अधिवक्ता राकेश पांडेय, जिनका मकान इस हादसे का शिकार हुआ, उन्होंने बताया कि यह दुर्घटना उनके लिए एक बड़ा आर्थिक नुकसान लेकर आई है। 30 जून की तड़के करीब 4 बजे, ट्रक संख्या HR 58 F 2388 ने उनके मकान की बाउंड्री वॉल, रेलिंग गेट, विद्युत वायरिंग और गेट लाइट को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया।
राकेश पांडेय ने पुलिस को एक तहरीर दी है, जिसमें उन्होंने संबंधित ट्रक चालक और वाहन स्वामी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और अपनी क्षतिग्रस्त संपत्ति के लिए उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनकी मांग वाजिब भी है, आखिर उनका बेगुनाह घर ऐसे हादसे का शिकार क्यों हो? पुलिस ने उनकी तहरीर के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।
नेशनल हाईवे 730 पर बेकाबू रफ्तार का कहर
नेशनल हाईवे 730 पर यह कोई इकलौता हादसा नहीं है। यह हाईवे अपनी तेज रफ्तार और वाहन चालकों की लापरवाही के लिए कुख्यात हो चुका है।
आए दिन यहां दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें कई बार लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। ऐसा लगता है कि वाहन चालक यहां ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाते हैं और तेज रफ्तार ही उनकी पहचान बन चुकी है।
श्रावस्ती का यह इलाका पहले से ही सड़क हादसों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है और इस तरह के हादसे इसकी पुष्टि भी करते हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से इस संबंध में सख्त कदम उठाने की मांग की है, लेकिन हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक लोग सड़क पर यूं ही अपनी जान गंवाते रहेंगे और कब तक घरों को ऐसे ही नुकसान होता रहेगा? क्या नेशनल हाईवे पर स्पीड कंट्रोल के लिए कोई प्रभावी मैकेनिज्म नहीं है? क्या पुलिस और परिवहन विभाग को और सख्त होने की जरूरत नहीं है, ताकि बेकाबू रफ्तार पर लगाम लग सके? अधिवक्ता राकेश पांडेय का यह मामला सिर्फ एक घर के नुकसान का नहीं है, यह उस बड़ी समस्या का प्रतीक है जिससे नेशनल हाईवे 730 के किनारे रहने वाले लोग और उस पर यात्रा करने वाले यात्री हर दिन जूझते हैं। अब देखना ये है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और अधिवक्ता राकेश पांडेय को कब तक न्याय मिल पाता है।
जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की असली वजह और जिम्मेदार लोगों का खुलासा हो पाएगा।

