मधुबनी: बिहार का मधुबनी जिला। कभी यहां की चीनी मिलों की गूँज दूर-दूर तक सुनाई देती थी, खेतों में गन्ने की फसलें लहराती थीं और किसान से लेकर मजदूर तक के चेहरे पर रौनक रहती थी। लेकिन फिर एक ऐसा दौर आया जब इन मिलों पर ताले लटक गए, मशीनें शांत हो गईं और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे। अब कई साल बाद, एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। जिले की बंद पड़ी तीन चीनी मिलों— सकरी, रैयाम और लोहट को इसी साल फिर से शुरू करने का ऐलान किया गया है। यह घोषणा किसी और ने नहीं, बल्कि खुद मधुबनी के विधायक माधव आनंद ने की है, और उनके साथ बिहार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान ने भी इस पर अपनी मुहर लगाई है।
यह सिर्फ एक ऐलान भर नहीं है, बल्कि दशकों से इस इलाके के किसानों और युवाओं की एक बड़ी उम्मीद है। विधानसभा चुनाव के दौरान माधव आनंद ने जनता से वादा किया था कि वे इन बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू करवाएंगे।
अब जब कार्यकाल लगभग आधे रास्ते पर है, तो विधायक जी अपने वादे को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं। उनका कहना है कि इस साल के अंत तक इन तीनों मिलों से फिर से चीनी उत्पादन शुरू हो जाएगा, जिससे न केवल गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हजारों लोगों को सीधा रोजगार भी मिलेगा।
मंगलवार की सुबह करीब 10:30 बजे, मधुबनी के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक आनंद ने इस योजना का पूरा खाका समझाया। उन्होंने साफ कहा कि चीनी उद्योग के दोबारा पटरी पर आने से गन्ना किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिलेगा।
अभी तक उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता था, जिसमें लागत भी ज्यादा आती थी और मुनाफा भी कम होता था। अब यह परेशानी खत्म होने वाली है।
इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जो अक्सर काम की तलाश में पलायन करने को मजबूर होते हैं।
जिले की अर्थव्यवस्था को मिलेगा 'बूस्टर डोज'
विधायक माधव आनंद ने बड़े विश्वास के साथ कहा कि इन चीनी मिलों का सिर्फ किसानों और मजदूरों पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि पूरे जिले की अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी। जब मिलें चलेंगी, तो उनसे जुड़ी सहायक इंडस्ट्रीज भी पनपेंगी।
बाजार में चहल-पहल बढ़ेगी, व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और जिले का आर्थिक पहिया और तेजी से घूमेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खुद चीनी उद्योग को फिर से खड़ा करने के लिए बहुत गंभीरता से काम कर रही है।
इसके लिए लगातार बैठकें हो रही हैं और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं ताकि तय समय पर मिलों को चालू किया जा सके।
माधव आनंद ने भरोसा दिलाया कि सभी आवश्यक कागजी कार्रवाई और तकनीकी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ मेरे चुनाव का वादा नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास की आधारशिला है।
हमारी सरकार और मैं खुद इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इन परियोजनाओं के शुरू होने से वर्षों से धूल फांक रहे चीनी उद्योग को नई पहचान मिलेगी और गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अब दूर-दराज के क्षेत्रों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
" उनकी बात में एक ऐसी आशा थी, जो लंबे समय से दबी पड़ी थी।
इस घोषणा को और मजबूती तब मिली जब बीते सोमवार को बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान खुद मधुबनी पहुंचे थे। मंत्री जी ने भी पत्रकारों से बातचीत में साफ-साफ कहा था कि सकरी और रैयाम चीनी मिलों को इसी वर्ष चालू कर दिया जाएगा।
विधायक माधव आनंद ने उनकी इस घोषणा को एक कदम आगे बढ़ाते हुए लोहट चीनी मिल को भी इसी वर्ष शुरू करने की बात कहकर उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। यह दिखाता है कि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि दोनों ही इस मुद्दे पर एक राय होकर काम कर रहे हैं।
विधायक आनंद ने अपनी प्राथमिकताओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि उनका सबसे पहला और महत्वपूर्ण लक्ष्य है क्षेत्र के गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
दूसरा लक्ष्य है स्थानीय युवाओं को उनके ही जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, ताकि उन्हें अपने घर-परिवार से दूर न जाना पड़े। उन्होंने कहा, "चीनी मिलों के संचालन से मधुबनी के विकास को एक नई दिशा मिलेगी।
यह लोगों की बहुत लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जिसे अब पूरा करने का समय आ गया है।"
पिछले कई दशकों से मधुबनी के किसान और मजदूर इन मिलों के फिर से खुलने का इंतजार कर रहे थे। एक वक्त था जब यह इलाका चीनी उत्पादन के लिए जाना जाता था।
गन्ने की खेती यहां के ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग थी। मिलें बंद होने के बाद गन्ना किसानों को मजबूरन दूसरी फसलें उगानी पड़ीं या फिर गन्ने को कम दाम पर बाहर बेचना पड़ा।
अब जब फिर से ये मिलें चलने की बात हो रही है, तो किसानों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। यह सिर्फ फैक्ट्रियां नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों की उम्मीदें हैं, जो एक बार फिर से जगमगाने लगी हैं।

