खगड़िया: खगड़िया मंडल कारा में रविवार की शाम कुछ ऐसा हुआ जिसने जेल की चारदीवारी के अंदर और बाहर, दोनों जगह एक साथ हलचल मचा दी। एक विचाराधीन कैदी, जो करीब डेढ़ महीने से अपनी किस्मत का फैसला आने का इंतजार कर रहा था, अचानक मौत की आगोश में समा गया। घटना इतनी अचानक और नाटकीय थी कि जब तक उसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जाता, उसकी सांसे थम चुकी थीं। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली और अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खगड़िया की इस जेल में ऐसा क्या हुआ, जिसने एक जिंदगी को खत्म कर दिया?
मरने वाले कैदी का नाम गागो चौधरी था, जो मानसी थाना क्षेत्र के सीघरसमा गांव का रहने वाला था। गागो पर आर्म्स एक्ट और मारपीट का एक गंभीर मामला (कांड संख्या-122/26) दर्ज था।
करीब डेढ़ महीने पहले मानसी थाना पुलिस ने उसे धर दबोचा था और कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में खगड़िया मंडल कारा भेज दिया गया था। उसे शायद उम्मीद थी कि किसी दिन उसे अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिलेगा या कम से कम न्याय मिलेगा, लेकिन रविवार की शाम ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
अचानक सीने में दर्द और मौत का साया
जेल प्रशासन के मुताबिक, रविवार की शाम गागो चौधरी जेल परिसर में अन्य बंदियों के साथ चहलकदमी कर रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक ही गागो के सीने में तेज दर्द उठा।
दर्द इतना भीषण था कि वह मौके पर ही जमीन पर गिर पड़ा। यह देखकर साथ के बंदी घबरा गए और उन्होंने तुरंत जेल प्रशासन को इसकी सूचना दी।
जैसे ही खबर अधिकारियों तक पहुंची, हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जेल के मेडिकल स्टाफ को बुलाया गया और गागो को मंडल कारा अस्पताल ले जाया गया।
मंडल कारा अस्पताल में डॉक्टरों ने गागो चौधरी को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जेल के डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसे बेहतर इलाज के लिए खगड़िया सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
यह एक आपातकालीन स्थिति थी, और जेल प्रशासन ने भी फुर्ती दिखाई, लेकिन शायद देर हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने किया मृत घोषित
गागो चौधरी को तुरंत जेल से खगड़िया सदर अस्पताल ले जाया गया। एंबुलेंस या जो भी वाहन उपलब्ध था, उससे उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की गई।
लेकिन सदर अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी।
पहली नजर में डॉक्टरों और जेल प्रशासन दोनों को यही लगा कि गागो की मौत हार्ट अटैक से हुई है, लेकिन असली वजह का खुलासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
इस घटना के बाद सदर अस्पताल में भी थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गागो चौधरी के परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके थे।
उनके लिए यह खबर एक सदमे से कम नहीं थी। उन्होंने एक विचाराधीन कैदी को जेल भेजा था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह वापस सिर्फ एक मृत शरीर के रूप में लौटेगा।
परिजनों के आंसू और उनका दर्द साफ देखा जा सकता था, जैसा कि तस्वीरों में भी नजर आ रहा था, जहां वे अस्पताल में मौजूद थे।
जेल अधीक्षक का बयान और जांच का आश्वासन
इस पूरे मामले पर खगड़िया मंडल कारा के अधीक्षक राधेश्याम सुमन ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बंदी गागो चौधरी की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन ने तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई।
उन्होंने कहा कि "हमने गागो को प्राथमिक उपचार देने के बाद, उसकी गंभीर हालत को देखते हुए, उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत सदर अस्पताल भेजा।" अधीक्षक सुमन ने आगे कहा कि शुरुआती जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक ही लग रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत मेडिकल जांच के बाद ही की जाएगी।
उनका बयान एक तरह से जेल प्रशासन की तरफ से उठाए गए कदमों को स्पष्ट करने की कोशिश थी।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी। शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
नियमानुसार, मृतक के परिजनों को भी इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो मौत की असली वजह का खुलासा करेगी।
पुलिस और जेल प्रशासन दोनों ही इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटे हैं। यह सिर्फ एक विचाराधीन कैदी की मौत नहीं है, बल्कि जेलों में बंद लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सवाल उठाती है।
जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि क्या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण प्राकृतिक मौत थी, या इसके पीछे कुछ और कारण थे।




































