लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में माता-पिता के चेहरे पर एक नई उम्मीद की किरण जगी है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके बच्चे न्यूरो-डाइवर्स चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। गोमती नगर में ‘माइंड राइज चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर’ का धूमधाम से उद्घाटन हुआ है। ये सिर्फ एक नई बिल्डिंग नहीं, बल्कि उन सैकड़ों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ा सहारा बनने वाला है, जिन्हें ऑटिज्म, एडीएचडी (ADHD), ग्लोबल डेवलपमेंटल डिले या सेरेब्रल पाल्सी जैसी जटिल समस्याओं से जूझना पड़ता है। अब तक ऐसे बच्चों को सही और पूरी मदद के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन 'स्वास्थ्योदय ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड' के तहत शुरू हुआ ये सेंटर एक ही छत के नीचे तमाम विशेषज्ञ सेवाएं देने का दावा कर रहा है।
ज़रा सोचिए, जब कोई बच्चा आम बच्चों की तरह बातचीत करने या सीखने में दिक्कत महसूस करता है, तो माता-पिता का दिल बैठ सा जाता है। उन्हें समझ नहीं आता कि कहां जाएं, किससे मिलें।
उत्तर प्रदेश में ऐसे न्यूरो डाइवर्स बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसी के साथ बढ़ती है विशेषज्ञ थेरेपी और देखभाल की ज़रूरत। लेकिन दिक्कत ये थी कि इन खास बच्चों के लिए लखनऊ या आस-पास के इलाकों में सही सुविधाएं मिलना टेढ़ी खीर थी।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए, ‘माइंड राइज चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर’ को एक ऐसे ठौर के रूप में तैयार किया गया है, जहां इन बच्चों के संपूर्ण विकास पर फोकस किया जा सके।
न्यूरो डाइवर्स बच्चों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं की कमी
सेंटर हेड पारितोष गुप्ता ने इस मौके पर एक अहम बात कही। उन्होंने बताया कि जिस तरह से प्रदेश में, खास तौर पर लखनऊ जैसे बड़े शहरों में न्यूरो डाइवर्स बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है, उसी हिसाब से उनके लिए विशेषज्ञ थेरेपी सेवाओं की उपलब्धता अभी भी काफी कम है।
एक तरह से देखा जाए तो डिमांड बहुत ज़्यादा है और सप्लाई कम। इसी खाई को पाटने के लिए 'माइंड राइज चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर' को शुरू करने का फैसला लिया गया है।
इसका सीधा मकसद ये है कि हर बच्चे को उसकी ज़रूरत के हिसाब से सही इलाज और थेरेपी मिल सके, ताकि वो अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच सके।
पारितोष गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि सेंटर में अनुभवी विशेषज्ञों की एक पूरी टीम होगी, जो बच्चों के साथ काम करेगी। यह टीम बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के हर पहलू पर बारीकी से ध्यान देगी।
इसका मतलब ये है कि यहाँ सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि बच्चों की ओवरऑल पर्सनालिटी और स्किल्स को डेवलप करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे समाज में घुल-मिल सकें और अपनी ज़िंदगी को बेहतर तरीके से जी सकें।
माइंड राइज सेंटर में मिलेंगी कौन-कौन सी सुविधाएं?
यह सेंटर न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स से प्रभावित बच्चों के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है। यहाँ सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि कई तरह की थेरेपी और एजुकेशनल सपोर्ट सिस्टम मौजूद होंगे।
- स्पीच थेरेपी: उन बच्चों के लिए जो बोलने, समझने या संवाद करने में कठिनाई महसूस करते हैं। यह थेरेपी उन्हें अपनी बात कहने और दूसरों की बात समझने में मदद करेगी।
- बिहेवियर थेरेपी: उन बच्चों के लिए जिन्हें सामाजिक व्यवहार या भावनात्मक नियंत्रण में दिक्कत आती है। इस थेरेपी से उन्हें सही व्यवहार पैटर्न सीखने और नकारात्मक आदतों को छोड़ने में मदद मिलेगी।
- ऑक्युपेशनल थेरेपी: यह थेरेपी बच्चों को दैनिक गतिविधियों जैसे खाना-पीना, कपड़े पहनना, खेलना और स्कूल के कामों में आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। यह उनकी फाइन मोटर और ग्रॉस मोटर स्किल्स को सुधारने में मदद करती है।
- स्पेशल एजुकेशन: उन बच्चों के लिए जिन्हें पारंपरिक स्कूलिंग में दिक्कत आती है। यहाँ उनकी सीखने की शैली और क्षमता के हिसाब से खास पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियाँ अपनाई जाएंगी।
इन सभी सेवाओं का एक ही लक्ष्य है – बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना और उसे समाज में सम्मान के साथ जीना सिखाना। यह एक ऐसा माहौल बनाने की कोशिश है जहाँ हर बच्चा अपनी गति से सीख सके और अपनी क्षमताओं को पहचान सके।
विदेशी विशेषज्ञों की राय और आधुनिक थेरेपी का साथ
आजकल की दुनिया में टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता की कोई सीमा नहीं है। इसी सोच के साथ ‘माइंड राइज चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर’ ने एक बड़ा कदम उठाया है।
केंद्र के निदेशक दिव्यांशु कुमार ने बताया कि कुछ जटिल मामले ऐसे होते हैं, जहाँ देश में उपलब्ध विशेषज्ञता भी पर्याप्त नहीं होती। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए सेंटर ने अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था 'ओमनी हेल्थ केयर सर्विसेज' (Omni Health Care Services) के साथ हाथ मिलाया है। इस सहयोग के ज़रिए, विदेशी विशेषज्ञों द्वारा बच्चों और उनके परिवारों को ऑनलाइन परामर्श सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि इससे दूर बैठे भी सर्वश्रेष्ठ सलाह मिल पाएगी।
इसके साथ ही, प्रबंध निदेशक डॉ. प्रीति कुरील ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि सेंटर समय-समय पर लेजर थेरेपी, हाइड्रो थेरेपी, हिप्पो थेरेपी और एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस (ABA) जैसी कुछ सबसे आधुनिक उपचार पद्धतियों पर आधारित विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी देगा। ये सभी थेरेपीज़ न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स वाले बच्चों के लिए दुनिया भर में प्रभावी मानी जाती हैं।
- लेजर थेरेपी: शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर कम तीव्रता वाली लेजर लाइट का उपयोग करके दर्द कम करने और उपचार को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
- हाइड्रो थेरेपी: पानी के भीतर व्यायाम और उपचार, जो बच्चों को कम दबाव में अपनी मांसपेशियों और गतिशीलता में सुधार करने में मदद करता है।
- हिप्पो थेरेपी: घोड़े की चाल के माध्यम से बच्चों की मुद्रा, संतुलन, समन्वय और ताकत में सुधार किया जाता है। यह भावनात्मक और संवेदी लाभ भी प्रदान करता है।
- एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस (ABA): यह एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित थेरेपी है जो बच्चों में सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण व्यवहारों को सिखाने और चुनौतीपूर्ण व्यवहारों को कम करने पर केंद्रित है। यह खास तौर पर ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों के लिए बहुत प्रभावी मानी जाती है।
डॉ. प्रीति कुरील का कहना है कि इन नई तकनीकों और विशेषज्ञ सलाह के माध्यम से बच्चों के विकास में न केवल बेहतर, बल्कि अपेक्षाकृत तेज परिणाम प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे परिवारों को लंबे समय तक इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा और उनके बच्चे तेज़ी से सामान्य जीवन की ओर बढ़ सकेंगे। लखनऊ में 'माइंड राइज चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर' का खुलना इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, जो न्यूरो डाइवर्स बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का वादा करता है।

