मथुरा: राजनीति के गलियारों में और खास तौर पर मथुरा की ज़मीं पर, इन दिनों राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के कार्यकर्ताओं में गजब का जोश और एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। बीते शनिवार की शाम, जब रालोद के नव-नियुक्त जिलाध्यक्ष प्रीतम प्रमुख पहली बार अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के बाद मथुरा पहुंचे, तो उनका स्वागत किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। शाम के करीब 8 बजे का वक्त था, और राया कट पर मानो पूरा शहर ही उमड़ पड़ा था।
हज़ारों की संख्या में रालोद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ब्रजवासी उन्हें फूल-मालाएं पहनाने और नारों के साथ उनका अभिनंदन करने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। 'जयंत चौधरी जिंदाबाद', 'प्रीतम प्रमुख आगे बढ़ो' जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह सिर्फ एक जिलाध्यक्ष का स्वागत नहीं था, बल्कि पार्टी के प्रति गहरी निष्ठा और एक नए नेतृत्व पर भरोसे का इज़हार था।
राया कट पर इस भव्य स्वागत के बाद, काफिला औरंगाबाद स्थित रजवाड़ा रिजॉर्ट की ओर बढ़ा, जहाँ एक और शानदार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।
रालोद में नई उम्मीद और युवा नेतृत्व
प्रीतम प्रमुख को मथुरा जिले की कमान सौंपे जाने का फैसला रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने किया है, और इस फैसले ने पूरे जिले के कार्यकर्ताओं में एक नई जान फूंक दी है। पार्टी के पुराने और नए, सभी कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रीतम प्रमुख लंबे समय से संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे हैं।
उनकी सक्रिय कार्यशैली और ज़मीनी जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। शायद यही वजह है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन पर इतना भरोसा जताया है और उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रीतम प्रमुख की नियुक्ति मथुरा में रालोद को और भी मज़बूत करेगी। पार्टी की नीतियों को गांव-गांव तक, हर घर तक पहुंचाने में उनका नेतृत्व अहम भूमिका निभाएगा।
रिजॉर्ट में आयोजित सम्मान समारोह में, जिलेभर से आए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार साफा, पटुका और फूल-मालाएं पहनाकर प्रीतम प्रमुख का सम्मान किया। इस दौरान हर किसी के चेहरे पर खुशी और संतोष का भाव साफ झलक रहा था।
प्रीतम प्रमुख का वादा: निष्ठा और ईमानदारी से काम
अपने संबोधन में, नवनियुक्त जिलाध्यक्ष प्रीतम प्रमुख ने सबसे पहले रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है और जो बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे।
यह सिर्फ कहने भर की बात नहीं थी, बल्कि उनकी आवाज़ में संकल्प और समर्पण साफ झलक रहा था।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। उनका मानना है कि किसी भी संगठन की रीढ़ उसके कार्यकर्ता होते हैं, और उनके बिना कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
प्रीतम प्रमुख ने यह भी आश्वासन दिया कि वे जिले में संगठन को और अधिक मज़बूत करने के लिए सभी को साथ लेकर चलेंगे, किसी को पीछे नहीं छोड़ेंगे। उनका उद्देश्य मथुरा में रालोद को सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर एक मजबूत ताक़त बनाना है।
अपने भाषण के दौरान, प्रीतम प्रमुख ने किसानों, युवाओं और आमजन की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का भी भरोसा दिलाया। मथुरा जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में किसानों के मुद्दे और बढ़ती युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर, ये ऐसे विषय हैं जिन पर रालोद लगातार मुखर रहा है।
प्रीतम प्रमुख ने संकेत दिया कि इन मुद्दों पर पार्टी और भी aggressively काम करेगी।
एकता और शक्ति प्रदर्शन: कौन-कौन रहा मौजूद
यह सम्मान समारोह सिर्फ एक व्यक्ति के स्वागत तक सीमित नहीं था, बल्कि यह रालोद की मथुरा इकाई की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का भी मंच बन गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ठाकुर तेजपाल ने की, जिन्होंने अपने अनुभव और मार्गदर्शन से पूरे आयोजन को सफल बनाया।
इस अवसर पर पार्टी के कई दिग्गज नेता और महत्वपूर्ण पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने प्रीतम प्रमुख को अपनी शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में काम करने का संकल्प दोहराया। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल भरंगर, बाबूलाल प्रमुख, यशपाल बघेल, एमएलसी योगेश नौहवार, अनूप चौधरी, रामरसपाल पोनिया, सुरेश भगत, यशपाल चेयरमैन, सुखवीर प्रधान और सुजीत प्रधान जैसे बड़े नाम शामिल थे।
इन सभी नेताओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि मथुरा में रालोद अब एक नई दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है, और प्रीतम प्रमुख का नेतृत्व इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पार्टी का लक्ष्य है कि आने वाले समय में मथुरा में रालोद की पकड़ और मजबूत हो, ताकि किसानों, युवाओं और हर आम व्यक्ति की आवाज़ को और बुलंद किया जा सके।
यह आयोजन रालोद के लिए न सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव का प्रतीक था, बल्कि मथुरा की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत का भी संकेत दे रहा था। कार्यकर्ताओं का जोश और नेतृत्व का संकल्प, दोनों मिलकर पार्टी को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।




































