मथुरा: वृंदावन की शांत गलियों में जहाँ हर रोज़ भक्ति और आस्था का मेला लगता है, बुधवार शाम एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे माहौल में शोक की लहर दौड़ा दी। एक 13 साल की मासूम बच्ची पूर्वा, जो अपने घर की खिड़की से बड़े प्यार से बंदरों को कुछ खिला रही थी, अचानक काल का ग्रास बन गई। एक झटके में संतुलन बिगड़ा और वह करीब 15 फीट नीचे सड़क पर जा गिरी। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।.
यह दिल दहला देने वाली घटना बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे वृंदावन के बांके बिहारी पुलिस चौकी क्षेत्र की संत कॉलोनी में हुई। अगले दिन, यानी गुरुवार सुबह जब इस हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया।
फुटेज में साफ दिख रहा है कि कैसे पलक झपकते ही हंसती-खेलती जिंदगी मौत के आगोश में समा गई। पूर्वा के माता-पिता, जो दिहाड़ी मज़दूर थे, अपने काम पर गए हुए थे और घर पर पूर्वा अपने छोटे भाई के साथ थी।
उन्हें क्या पता था कि जिस घर से वो रोज़गार के लिए निकलते हैं, वहीं एक ऐसा हादसा उनका इंतज़ार कर रहा है, जो उनकी दुनिया उजाड़ देगा।
वृंदावन का वो आम नज़ारा और फिर मौत का झपट्टा
ये कहानी है अयोध्या से आकर वृंदावन में बसे अनिल पांडे और उनके परिवार की। अनिल अपनी पत्नी, बेटे और गोद ली हुई बेटी पूर्वा के साथ संत कॉलोनी में एक किराए के मकान की पहली मंजिल पर रहते थे।
वृंदावन में बंदरों का जमावड़ा कोई नई बात नहीं है, और पूर्वा अक्सर घर की खिड़की से उन्हें कुछ न कुछ खिलाती रहती थी। बुधवार सुबह भी अनिल और उनकी पत्नी परिक्रमा मार्ग पर अपना खाने का ठेला लगाने चले गए थे, जैसा वे हर रोज़ करते थे।
घर पर सिर्फ पूर्वा और उसका छोटा भाई थे। किसी को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि ये आम सा लगने वाला दिन एक भयावह त्रासदी में बदल जाएगा।
शाम का वक्त था, पूर्वा पहली मंजिल पर अपने कमरे की खिड़की से बंदरों को खाना खिला रही थी। खिड़की पर लोहे की ग्रिल लगी थी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था।
सीसीटीवी फुटेज में जो दिखा, वो किसी की भी रूह कंपा देने के लिए काफी है। एक बंदर खाने के लालच में अचानक पूर्वा पर झपटा।
इस अप्रत्याशित झपट्टे से पूर्वा का संतुलन बिगड़ गया। वह चीख भी न पाई और लगभग 15 फीट नीचे सीधे सड़क पर जा गिरी।
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सीसीटीवी ने खोले हादसे के राज़
जो सीसीटीवी फुटेज इस घटना का गवाह बना है, उसमें तीन मंजिला इमारत साफ दिख रही है। पहली मंजिल की खिड़की पर लोहे की ग्रिल है, और पूर्वा वहीं से बंदरों को खाना दे रही है।
गली में नीचे एक सफेद कार खड़ी है, और घर के ठीक बाहर एक युवक बैठा हुआ दिख रहा है। अचानक से सब कुछ सामान्य चल रहा होता है और अगले ही पल, पूर्वा पहली मंजिल से सीधे सड़क पर गिर जाती है।
गिरने की तेज़ आवाज़ सुनते ही बाहर बैठा युवक घबराकर उठता है और बाहर की ओर दौड़ता है। कुछ ही सेकंड में आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो जाती है।
यह फुटेज बताता है कि कैसे एक पल में सब कुछ बदल गया।
ज़मीन पर गिरी पूर्वा को देखकर आसपास के लोग तुरंत हरकत में आए। घर के बाहर बैठे युवक और कुछ पड़ोसियों ने बिना एक पल गंवाए पूर्वा को उठाया।
बताया जाता है कि उस छात्र ने ही आसपास के लोगों को लड़की के गिरने की जानकारी दी। एक युवक ने अपने कंधे पर उठाकर उसे अस्पताल की ओर दौड़ लगाई।
उम्मीद थी कि शायद जान बच जाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल में डॉक्टर्स ने किया मृत घोषित, परिवार ने उठाया ये कदम
पूर्वा को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सिर में गंभीर चोटें आई थीं, और इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।
यह खबर सुनते ही परिवार पर मानों पहाड़ टूट पड़ा। अनिल और उनकी पत्नी को जब पड़ोसी का फोन आया कि उनकी बेटी सड़क पर गिर गई है और उसे अस्पताल ले जाया जा रहा है, तो उनके होश उड़ गए।
अस्पताल पहुँचते ही उन्हें सबसे बुरी खबर मिली।
सूचना मिलने पर बांके बिहारी चौकी प्रभारी शिव कुमार शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे और जांच-पड़ताल शुरू की। उन्होंने बताया कि पूर्वा की मौत बिल्डिंग की पहली मंजिल से गिरने के कारण हुई है।
पुलिस के अनुसार, परिजनों ने यह भी बताया कि बच्ची मानसिक रूप से अस्वस्थ थी। हालांकि, परिजनों ने इस पूरे मामले में किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई कराने से साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद, पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पूर्वा का शव परिवार को सौंप दिया। एक छोटे से परिवार की खुशियाँ एक पल में ऐसे बिखर गईं कि ज़िंदगी भर इस दर्द को भुला पाना मुमकिन नहीं होगा।
यह घटना वृंदावन में बंदरों के आतंक और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करती है।


