लखनऊ: उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में मंगलवार की देर रात एक हलचल मची। रात के अंधेरे में एक ऐसा आदेश आया जिसने 29 प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों की किस्मत पलट दी। ये वो अधिकारी हैं जिनकी वर्षों की तपस्या अब फल गई है, क्योंकि इन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोट कर दिया गया है। सोचिए, जब ये खबर आई होगी तो कितने परिवारों में खुशियां आई होंगी, कितने अधिकारियों की रातों की नींद उड़ गई होगी, और कितनों की उम्मीदें जाग उठी होंगी। इन तरक्की पाए अधिकारियों में रेजिडेंट कमिश्नर, विशेष सचिव, अपर आयुक्त, एडीएम, सचिव जैसे कई बड़े पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। लेकिन, इस खुशी के माहौल में एक नाम ऐसा भी था, जिसके न होने की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। ये नाम है 2002 बैच की पीसीएस अधिकारी अंजू कटारिया का, जिनका प्रमोशन लिस्ट में नाम नहीं है। वही अंजू कटारिया, जो एक वक्त यूपीपीसीएस की टॉपर रह चुकी हैं और जिनकी कहानी पेपर लीक जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ चुकी है।
देर रात आया आदेश, बदला अधिकारियों का भविष्य
मंगलवार की देर रात उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से जो आदेश जारी हुआ, उसने कई अधिकारियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। ये 29 पीसीएस अधिकारी अब IAS बन चुके हैं।
इनमें 2010, 2011 और 2012 बैच के कई चेहरे हैं, जिनके कंधों पर अब और बड़ी जिम्मेदारियां आएंगी। जिन अधिकारियों को यह सुनहरा मौका मिला है, उनमें आलोक वर्मा, डॉ.
विश्राम, पुष्पराज सिंह, विवेक श्रीवास्तव, योगानंद पांडेय, अमित कुमार, डॉ. सुनील कुमार वर्मा, गरिमा स्वरूप और संदीप कुमार जैसे कई महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं।
इन तरक्कियों का सीधा मतलब है कि प्रदेश के कई जिलों, मंडलों और अलग-अलग विभागों में अब प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इन नए IAS अधिकारियों को जल्द ही उनकी नई तैनाती और नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
किसकी हुई तरक्की, कौन कहां संभाल रहा था मोर्चा?
- डॉक्टर विश्राम (2010 बैच): ये साहब पहले मिर्जापुर में अपर आयुक्त थे, अब इनकी नई पारी IAS के तौर पर शुरू होगी।
- पुष्पराज सिंह (2010 बैच): गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) में सचिव का पद संभाल रहे थे, अब और बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी।
- विवेक श्रीवास्तव (2011 बैच): लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के सचिव थे।
- योगानंद पांडेय (2011 बैच): अयोध्या में ADM सिटी का पद संभाल रहे थे, अब IAS बन गए हैं।
- अमित कुमार (2011 बैच): मेरठ मंडल में अपर आयुक्त के तौर पर काम कर रहे थे।
- डॉ. सुनील कुमार वर्मा (2011 बैच): लखनऊ में GST के एडिशनल कमिश्नर थे।
- गरिमा स्वरूप (2011 बैच): लखनऊ में चुनाव आयोग में OSD थीं।
- संदीप कुमार (2011 बैच): हापुड़ में ADM FR का पद संभाल रहे थे।
- इसके अलावा अशोक कुमार कनौजिया (युवा कल्याण, लखनऊ), संजय कुमार सिंह (ADM E मुजफ्फरनगर), राज कुमार द्विवेदी (अपर आयुक्त मिर्जापुर), राकेश कुमार पटेल (अपर आयुक्त लखनऊ), सुशीला (अपर आयुक्त कानपुर), आलोक कुमार (ADM FR गोंडा), वैभव मिश्रा (ADM FR कुशीनगर), प्रदीप कुमार यादव (ADM सहारनपुर), पूनम निगम (डिप्टी सेक्रेटरी UPPSC, प्रयागराज), डॉ. नितिन मदान (ADM E रामपुर), हर्ष देव पांडेय (परीक्षा नियंत्रक UPPSC, प्रयागराज), शैलेंद्र कुमार सिंह (OSD यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी), नरेंद्र बहादुर सिंह (ADM FR लखीमपुर खीरी), संतोष बहादुर सिंह (ADM E सहारनपुर), पंकज वर्मा (सचिव मुरादाबाद विकास प्राधिकरण), विजय कुमार सिंह सेकेंड (CRO देवरिया), अतुल कुमार (एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर मुरादाबाद), अमित सिंह (डिप्टी चीफ इलेक्शन ऑफिसर लखनऊ), प्रियंका सिंह (कमांडेंट डिफेंस ट्रेनिंग संस्थान), अमित कुमार (ADM E कानपुर देहात) और राकेश कुमार सिंह (ADM FR लखनऊ) भी इस लिस्ट में शामिल हैं।
कुछ नाम गायब, सबकी जुबान पर एक ही सवाल
जहां कुछ के लिए ये खबर दिवाली से पहले ही पटाखे फोड़ने वाली थी, वहीं कुछ ऐसे नाम भी हैं जो इस लिस्ट से गायब हैं और जिनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं। इनमें 1997 बैच के हरिश चंद्र, 1999 बैच के प्रभूनाथ, 2004 बैच के अमर पाल सिंह, 2008 बैच के आलोक वर्मा, डॉ.
वैभव शर्मा और 2012 बैच के विश्वभूषण मिश्रा शामिल हैं। इन अधिकारियों का प्रमोशन तो लगभग पक्का माना जा रहा था, लेकिन पता नहीं क्यों, आखिरी वक्त पर उनके नाम इस लिस्ट से काट दिए गए।
अंजू कटारिया: टॉपर से आरोपी तक का सफर
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वो है 2002 बैच की पीसीएस अधिकारी अंजू कटारिया का। कन्नौज की रहने वाली अंजू कभी यूपीपीसीएस परीक्षा की टॉपर थीं, एक ऐसी अधिकारी जिसे देखकर बाकी लोग प्रेरणा लेते थे।
लेकिन 2018 में उनकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया, जिसने उनका करियर और नाम, दोनों को झकझोर दिया।
बात 2018 की है, जब अंजू कटारिया यूपी लोक सेवा आयोग (UPPSC) में परीक्षा नियंत्रक के पद पर थीं। इसी दौरान एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया।
इस खबर ने पूरे प्रदेश में हंगामा मचा दिया। परीक्षा देने वाले लाखों छात्र सड़कों पर उतर आए और मामले की गहन जांच की मांग होने लगी।
जांच का जिम्मा यूपी एसटीएफ (UP STF) को सौंपा गया। एसटीएफ ने मामले की तह तक जाकर पड़ताल की और मई 2019 में एक बड़ा खुलासा हुआ।
एसटीएफ ने अंजू कटारिया को पेपर लीक मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। सोचिए, एक टॉपर अधिकारी को जब पुलिस गिरफ्तार करती है तो यह खबर कितनी बड़ी होती है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने तत्काल उन्हें निलंबित कर दिया। कई महीनों तक उन्हें जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा।
करीब 8 महीने बाद, साल 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद उन्हें सेवा में बहाल तो कर दिया गया, लेकिन उनके करियर पर लगा धब्बा आज भी कायम है।
इस बार भी उनका नाम IAS प्रमोशन लिस्ट से गायब है, जो दिखाता है कि वह दाग अभी तक पूरी तरह से धुला नहीं है। भले ही कोर्ट से जमानत मिल गई हो और सेवा में बहाली हो गई हो, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में उनके खिलाफ हुई कार्रवाई का असर अब भी दिख रहा है।
29 पीसीएस अधिकारियों के आईएएस बनने की इस खबर ने जहां कई परिवारों में खुशियों का अंबार लगाया है, वहीं कुछ अधिकारियों के लिए यह खबर मायूसी लेकर आई है। देखना होगा कि इन तरक्की पाए अधिकारियों को कब और कहां नई जिम्मेदारी मिलती है, और जिन अधिकारियों के नाम लिस्ट से गायब हैं, उनके भविष्य का क्या होता है।

