बेगूसराय: रात के करीब साढ़े बारह बजे थे। ठंडी हवा में डीजे के गानों की धुनें अभी भी गूंज रही थीं। करण कुमार अपने दोस्तों के साथ केक काट चुका था, जन्मदिन की खुमारी अभी उतरी नहीं थी। पार्टी खत्म हुई तो दोस्तों ने सोचा, क्यों न इस खुशी को गंगा स्नान कर और पवित्र किया जाए? सिमरिया गंगा घाट की ओर निकलने की बात हुई। छह दोस्त एक स्कॉर्पियो में सवार हुए, पता नहीं था कि यह उनकी आखिरी राइड होने वाली है। कुछ ही मिनटों बाद नेशनल हाईवे 31 पर अंग्रेजी ढाला के पास, उनकी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो एक दूसरी स्कॉर्पियो से ऐसी टकराई कि पलभर में चार जिंदगी के चिराग बुझ गए। तीन दोस्त – ऋषभ, सन्नी और हिमांशु – मौके पर ही दम तोड़ गए। दूसरी स्कॉर्पियो का ड्राइवर भी इस हादसे में काल के गाल में समा गया। इस दर्दनाक हादसे में आठ लोग घायल भी हुए, जिनमें खुद बर्थडे बॉय करण भी शामिल है, जिसके सिर में 28 टांके लगे हैं और हालत गंभीर बनी हुई है।
घायलों में से एक ज्योतिष कुमार, जो बारात वाली स्कॉर्पियो में सवार थे, ने बाद में बताया कि उनके ड्राइवर ने गूगल मैप में गांव की लोकेशन लगा रखी थी। गूगल मैप उन्हें अंग्रेजी ढाला से दाहिने मुड़ने का रास्ता बता रहा था, जबकि उनकी योजना सिंघौल से पहले ही मुड़ने की थी।
ज्योतिष कुमार का मानना है कि अगर ड्राइवर गूगल मैप के बताए रास्ते पर नहीं चलता तो शायद यह हादसा टल सकता था। यह सिर्फ ज्योतिष की बात नहीं, बल्कि कई घायलों का यही कहना है कि गूगल मैप ने गलत मोड़ बताया, जिसकी वजह से ये भीषण टक्कर हुई।
एक तरफ गूगल मैप पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ दोस्तों की स्कॉर्पियो की रफ्तार भी कम नहीं थी, जो करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ रही थी।
खुशियों की रात, मातम में बदली सुबह
रविवार का दिन करण कुमार के लिए बेहद खास था। उनका जन्मदिन था।
पोखरिया मोहल्ले में दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने केक काटा, डीजे पर नाच-गाना हुआ और जमकर पार्टी हुई। रात जब अपने परवान पर थी, करीब साढ़े बारह बजे, पूर्णिमा से पहले सिमरिया गंगा घाट पर एक और केक काटने की योजना बनी।
छह जिगरी दोस्त — करण, ऋषभ, सन्नी, हिमांशु और दो अन्य – स्कॉर्पियो में सवार होकर सिमरिया के लिए निकल पड़े। उन्हें क्या पता था कि यह जश्न उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द देने वाला है।
अंतिम सफर की शुरुआती अड़चनें
दोस्तों की स्कॉर्पियो पोखरिया मोहल्ले में एक मंदिर के पास से गुजरी। रात के सन्नाटे में कुछ लोग मंदिर के पास बैठे थे।
उन्होंने बताया कि गाड़ी महज 50 मीटर ही आगे बढ़ी होगी कि अचानक बंद हो गई। सन्नी ने गाड़ी स्टार्ट करने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा।
फिर पांच युवकों ने उतरकर धक्का देना शुरू किया। करीब 10 मिनट तक वे सब गाड़ी को धक्का देते रहे, लेकिन वो स्टार्ट नहीं हुई।
आखिरकार, काफी मशक्कत के बाद गाड़ी फिर से चालू हुई। वहां से निकले अभी एक घंटा भी नहीं हुआ था कि पूरे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई।
खबर आई कि स्कॉर्पियो का भीषण एक्सीडेंट हो गया है।
गूगल मैप ने दिखाई मौत की राह?
हादसे के बाद सामने आई कुछ बातें वाकई चौंकाने वाली हैं। बारात लेकर जा रही स्कॉर्पियो में सवार घायल ज्योतिष कुमार ने जो बताया, वो डिजिटल गाइडेंस पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके ड्राइवर ने मोबाइल पर गूगल मैप में गांव की लोकेशन डाल रखी थी। मैप उन्हें अंग्रेजी ढाला से दाहिने मुड़ने का रास्ता बता रहा था, जबकि उनकी योजना सिंघौल से पहले ही मुड़ने की थी।
ज्योतिष के मुताबिक, अगर ड्राइवर गूगल मैप के इस निर्देश का पालन नहीं करता और अपने तय रास्ते पर चलता, तो शायद यह दिल दहला देने वाला हादसा टल सकता था। यह सिर्फ एक व्यक्ति की राय नहीं है, बल्कि कई घायलों ने भी यही बात दोहराई है कि गूगल मैप की वजह से ही गलत मोड़ लिया गया, जिसने दो गाड़ियों को आमने-सामने ला खड़ा किया।
टकराव और तबाही का मंजर
एनएच-31 फोरलेन पर सिंघौल थाना क्षेत्र के अंग्रेजी ढाला के पास हुआ ये हादसा इतना भीषण था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। तेज रफ्तार में दौड़ रही दोस्तों की स्कॉर्पियो अंग्रेजी ढाला के पास ही कट लेती हुई दूसरी स्कॉर्पियो से जा भिड़ी।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए। एक स्कॉर्पियो का आगे का हिस्सा तो पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया था।
सीटों पर खून के गहरे दाग इस बात की गवाही दे रहे थे कि अंदर बैठे लोगों ने किस कदर दर्द सहा होगा। इस हादसे में तीन दोस्तों – ऋषभ, सन्नी और हिमांशु – ने मौके पर ही अपनी जान गंवा दी।
उनकी मौत की खबर सुनकर पूरे पोखरिया मोहल्ले में मातम छा गया।
एक दोस्त की जिद जिसने बचा ली जान
पोखरिया मोहल्ले के राहुल भी उस जन्मदिन पार्टी में शरीक थे। उन्होंने भी सिमरिया जाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन उनकी एक शर्त थी।
राहुल ने कहा कि स्कॉर्पियो सन्नी नहीं, बल्कि वो खुद चलाएंगे। दोस्तों ने मना कर दिया, उनका कहना था कि सन्नी गाड़ी चलाने में एक्सपर्ट है और वही चलाएगा।
इस बात पर राहुल रूठ गए और वापस अपने घर आ गए। उन दोस्तों के वहां से निकलने के महज 15 मिनट बाद ही हादसे की खबर मिली।
राहुल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। राहुल की वह जिद, जिसने शायद उस वक्त उन्हें नाराज किया होगा, बाद में उनकी जिंदगी बचाने का सबब बन गई।
मासूम जिंदगियों पर काल का साया
इस हादसे ने पोखरिया मोहल्ले से एक साथ तीन नौजवान जिंदगियों को छीन लिया। ऋषभ तीन भाइयों में सबसे छोटा था।
सन्नी चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। वहीं, हिमांशु अपने दो भाइयों में बड़ा था और एसबीएसएस कॉलेज में बीए पार्ट-वन का छात्र था।
इन युवकों की असमय मौत की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम थी, हर जुबान पर बस एक ही सवाल था – आखिर क्यों? वहीं, खुद जन्मदिन मनाने वाले करण कुमार के सिर में 28 टांके लगे हैं और वे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
हादसे का मंजर और उसके बाद का सन्नाटा बताता है कि कैसे एक खुशहाल रात अचानक एक खौफनाक सुबह में बदल गई।


