बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक नौजवान की संदिग्ध मौत ने ऐसा उबाल ला दिया कि गांव की शांति देखते ही देखते रणभूमि में बदल गई। कटियारा गांव में जैसे ही जितेंद्र चौहान का शव घर पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों का सब्र टूट गया। मौत के रहस्य और पुलिस की कथित ढिलाई से भड़के लोग सड़कों पर उतर आए, और अगले तीन घंटे तक बाराबंकी-बहराइच हाइवे पर जो कुछ हुआ, वो किसी भी कहानी से कम नहीं था। गुस्सा इतना था कि भीड़ ने न सिर्फ सड़क जाम की, बल्कि पुलिस वालों को भी सीधे चुनौती दे डाली। नतीजा ये हुआ कि लाठी-डंडों और पत्थरों से पुलिस पर हमला हो गया, जिसमें कई खाकी वर्दी वाले चोटिल हो गए। मामला शांत कराने के लिए पुलिस को आखिरकार बल प्रयोग करना पड़ा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और अब पुलिस ने 15 नामजद और करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
ये पूरा मामला रामनगर कोतवाली क्षेत्र का है, जहां जितेंद्र चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतक के परिवार और गांव वालों का आरोप है कि जितेंद्र की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कुछ और ही कहानी है।
जैसे ही जितेंद्र का पार्थिव शरीर उसके घर लाया गया, गांव में आक्रोश फैल गया। गांव वालों ने तुरंत अपनी नाराजगी जताते हुए बाराबंकी-बहराइच मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया।
उनका मकसद था कि प्रशासन और पुलिस उनकी आवाज सुने और जितेंद्र की मौत की सही वजह सामने लाए।
शुरुआत में तो यह एक आम विरोध प्रदर्शन लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और पुलिस मौके पर पहुंची, स्थिति और बिगड़ती चली गई। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना गहरा था कि उन्हें रास्ते की परवाह नहीं थी। वे अपनी बात मनवाने पर अड़े थे।
पुलिस ने भीड़ को समझाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। उलटा, भीड़ ने पुलिसकर्मियों के साथ बहस शुरू कर दी और देखते ही देखते यह बहस टकराव में बदल गई।
विरोध प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप और पुलिस पर हमला
बाराबंकी की सड़कों पर जो विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, उसने कुछ ही देर में हिंसक रूप धारण कर लिया। बाराबंकी-बहराइच मार्ग पर प्रदर्शन कर रही भीड़ ने पुलिस को सीधे तौर पर ललकारना शुरू कर दिया।
ये सिर्फ जुबानी जंग नहीं थी, बल्कि जल्द ही प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाठी-डंडे आ गए और उन्होंने पुलिस बल पर हमला कर दिया। इसके बाद तो वहां सिर्फ चीख-पुकार और पत्थरबाजी का शोर सुनाई दे रहा था।
भीड़ ने जमकर पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं। खाकी वर्दीधारी जवान, जो हालात संभालने गए थे, खुद हमले का शिकार बन गए।
इस हमले में रामनगर के प्रभारी निरीक्षक (SHO) अरुण प्रताप सिंह को भी चोटें आईं, और उनके साथ-साथ कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए। पुलिस की गाड़ियां भी इस पथराव का निशाना बनीं।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि पुलिस के पास कोई और विकल्प नहीं बचा। भीड़ बेकाबू हो चुकी थी और किसी भी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं थी।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा था और पुलिसकर्मियों पर लगातार हमला हो रहा था। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
पुलिस का जवाबी एक्शन: लाठीचार्ज और सड़क बहाल
हालात जब पूरी तरह से हाथ से निकलने लगे, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया। लाठीचार्ज के बाद ही प्रदर्शनकारियों की भीड़ वहां से हटनी शुरू हुई।
पुलिस की इस कार्रवाई से आखिरकार तीन घंटे से अधिक समय से बाधित बाराबंकी-बहराइच मार्ग पर यातायात बहाल हो सका। घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
इस घटना ने पुलिस प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि किस तरह एक विरोध प्रदर्शन कब हिंसक भीड़ में बदल सकता है। पुलिस ने साफ किया कि उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
एसपी बाराबंकी ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस ने मौके से मिले सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान का काम शुरू कर दिया है। घायल पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं, जो इस केस में महत्वपूर्ण सबूत साबित होंगे।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: FIR और आगे की जांच
इस पूरे बवाल के बाद बाराबंकी पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है। रामनगर कोतवाली में 15 नामजद लोगों के खिलाफ और 40 से 50 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इन धाराओं में सड़क जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने, मारपीट और पथराव जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टीमें बनाकर उपद्रवियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई करेंगे। वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद, जो भी लोग इस हिंसा और सरकारी काम में बाधा डालने के दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाराबंकी में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
जितेंद्र चौहान की मौत की जांच भी समानांतर रूप से जारी है ताकि उसकी मौत का रहस्य भी सुलझ सके और दोषियों को सजा मिल सके। गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

