पटना: भैया! इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का टाइम आने वाला है, और इस बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सैलरी वालों के लिए एक नया 'चैलेंज' फेंक दिया है. खासकर उन लोगों के लिए जो अपने घर-बार से दूर किसी दूसरे शहर में किराए पर रहते हैं और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का फायदा लेते हैं. अगर आप भी इनमें से एक हैं, तो कान खोलकर सुन लीजिए, क्योंकि इस नए नियम को हल्के में लिया तो आपका रिफंड अटक सकता है, और डिपार्टमेंट से 'टेंशन' भी मिल सकती है.
बात दरअसल ये है कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए जो नए ITR फॉर्म्स आए हैं, उनमें एक नया कॉलम जोड़ दिया गया है. अब आपको अपने मेन एड्रेस के साथ-साथ एक 'दूसरा पता' भी बताना होगा.
अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या बड़ी बात है? लेकिन भैया, ये छोटा सा बदलाव आपकी ITR फाइलिंग की कहानी में बड़ा ट्विस्ट ला सकता है, खासकर आपके HRA क्लेम के लिए.
सोचिए, आप दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं, किराए पर रह रहे हैं, और HRA क्लेम कर रहे हैं. आपका परमानेंट एड्रेस बिहार के किसी गांव का है.
पहले आप सिर्फ एक पता देते थे. अब आपको दोनों बताने होंगे.
ये क्यों हुआ, कैसे होगा, और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा, चलिए सब बताते हैं एकदम सरल भाषा में.
आखिर इस 'दूसरे पते' का खेल क्या है, और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
देखिए, टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो इस 'दूसरे एड्रेस' को मांगने के पीछे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का सीधा-सादा मकसद है - पारदर्शिता बढ़ाना और अपने रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करना. डेलॉयट इंडिया की पार्टनर मौसमी नागरसेनकर ने इस पर रोशनी डालते हुए बताया कि, 'पहले टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक ही पता भरना होता था.
लेकिन अब नए फॉर्म में प्राइमरी और सेकेंडरी एड्रेस का विकल्प उन लोगों के लिए खास है जो एक से ज्यादा जगहों पर रहते हैं या जिनके परमानेंट और अस्थायी पते अलग-अलग होते हैं.'
कहने का मतलब ये है कि इससे डिपार्टमेंट के पास आपकी कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन हमेशा अपडेटेड रहेगी. ऐसा नहीं होगा कि कोई जरूरी नोटिस आया और आपके पुराने या अधूरे पते की वजह से आपको मिल ही न पाया.
अक्सर होता है न कि लोग एक शहर से दूसरे शहर चले जाते हैं, लेकिन ITR में पुराना पता ही चला आता है. अब ऐसी दिक्कत नहीं होगी.
कुल मिलाकर, ये डिपार्टमेंट के लिए एक तरह से आपकी 'लोकेशन ट्रैकिंग' को और पुख्ता करने जैसा है, लेकिन अच्छे मकसद से.
क्या इस 'दूसरे पते' का सीधा कनेक्शन HRA वेरिफिकेशन से है?
भले ही ये नियम सीधे-सीधे HRA क्लेम के लिए न बनाया गया हो, लेकिन एक्सपर्ट्स ये भी कहते हैं कि ये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए HRA क्लेम की जांच करने का काम बहुत आसान कर देगा. समझ रहे हो बात को? ये एक 'मास्टरस्ट्रोक' है, जो HRA के फर्जी क्लेम्स पर लगाम लगाएगा.
पहले क्या होता था? लोग नौकरी करते थे बेंगलुरु में, किराए पर रहते थे वहीं, लेकिन रेंट की रसीदें दिखा देते थे किसी दूसरे शहर की, या अपने पैरेंट्स के घर का पता प्राइमरी एड्रेस में डाल देते थे, जहां वो असल में किराए पर नहीं रहते थे. इससे डिपार्टमेंट के लिए ये पता लगाना मुश्किल हो जाता था कि बंदा सच में कहां किराए पर रह रहा है और क्या उसका HRA क्लेम सही है या नहीं.
अब जब आपके पास दो पते होंगे – एक जहां आप फिलहाल किराए पर रह रहे हैं (प्राइमरी एड्रेस), और दूसरा आपका परमानेंट होमटाउन (सेकेंडरी एड्रेस) – तो डिपार्टमेंट के लिए ये बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर हो जाएगा कि आप असल में कहां रहते हैं और कहां का HRA क्लेम कर रहे हैं. ये उन 'जुगाड़' करने वालों के लिए थोड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है, जो गलत तरीके से HRA का फायदा उठाना चाहते थे.
यानी, अब HRA क्लेम करने से पहले आपको अपनी पूरी कहानी डिपार्टमेंट को ईमानदारी से बतानी होगी.
किसे-किसे भरना पड़ेगा ये 'दूसरा पता'?
ये नया कॉलम हर उस कर्मचारी के लिए जरूरी है जो पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत HRA का फायदा लेना चाहता है. मान लीजिए, आप एक ऐसे शख्स हैं जो दिल्ली में नौकरी करता है और किराए के घर में रहता है, लेकिन आपका परमानेंट घर या होमटाउन बिहार या उत्तर प्रदेश के किसी गांव या शहर में है.
तो इस केस में आप जहां वर्तमान में किराए पर रह रहे हैं (यानी दिल्ली का पता), उसे अपने प्राइमरी एड्रेस के तौर पर दिखा सकते हैं. और अपने होमटाउन या परमानेंट घर का पता सेकेंडरी एड्रेस के कॉलम में भर सकते हैं.
ये उनके लिए भी उपयोगी है जिनके पास एक से ज़्यादा घर हैं, जैसे एक घर जहां वो खुद रहते हैं और दूसरा घर उनके किसी दूसरे परिवार के सदस्य या बच्चों के लिए है. हालांकि, HRA के संदर्भ में इसका सबसे बड़ा असर उन सैलरीड लोगों पर पड़ेगा जो अपने होमटाउन से दूर किसी दूसरे शहर में नौकरी कर रहे हैं और किराए पर रह रहे हैं.
तो भैया, जब ITR फाइल करने बैठो, तो ये 'दूसरा पता' वाला कॉलम बिलकुल ध्यान से भरना. ये सिर्फ एक खानापूर्ति नहीं है, बल्कि आपकी टैक्स फाइलिंग की पारदर्शिता और भविष्य में डिपार्टमेंट से होने वाली किसी भी संभावित पूछताछ से बचने का एक अहम कदम है.
ये कॉलम भर देने से डिपार्टमेंट को ये तो पता चल जाएगा कि आप किराए पर कहां रह रहे थे, लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है. आपको अभी भी सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स (जैसे रेंट रसीदें, रेंट एग्रीमेंट) संभालकर रखने होंगे, क्योंकि कभी भी उनकी जरूरत पड़ सकती है.
कुल मिलाकर, सावधानी हटी, दुर्घटना घटी वाला हिसाब है!






































