ललितपुर: बुधवार की सुबह ललितपुर में एक अलग ही रौनक थी। शहर के नगर संसाधन केंद्र परिसर में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे, उनके चेहरों पर उत्साह और हाथों में तख्तियां लिए खड़े थे। इन तख्तियों पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा था, 'स्कूल चलो', 'शिक्षा हमारा अधिकार है', 'कोई बच्चा छूटे न' और ऐसे ही शिक्षा का महत्व बताने वाले नारे। यह नजारा था 'स्कूल चलो अभियान' के शुभारंभ का, एक ऐसी पहल जिसका सीधा मकसद है ये सुनिश्चित करना कि हमारे देश का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए, चाहे वो कितना भी दूरदराज के इलाके में रहता हो।
ठीक सुबह 10 बजे, जिलाधिकारी सत्य प्रकाश खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों के जोश को देखा और उनके साथ इस महत्वपूर्ण यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी दिखाई।
यह सिर्फ एक औपचारिक झंडी नहीं थी, बल्कि शिक्षा के प्रति एक बड़े संकल्प की शुरुआत थी, एक संदेश था कि हर बच्चे तक स्कूल की दहलीज पहुंचे, और हर घर में ज्ञान का दीपक जले।
एक अभियान; एक सपना: हर बच्चा स्कूल पहुंचे
जिस पल जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने रैली को हरी झंडी दिखाई, उस पल नगर संसाधन केंद्र परिसर बच्चों के नारों से गूँज उठा। पांच अलग-अलग विद्यालयों से आए छात्र-छात्राएं कतारबद्ध होकर खड़े थे, सबने एक साथ 'स्कूल चलो, स्कूल चलो' के नारे लगाए।
उनकी यह ऊर्जा बता रही थी कि वे न सिर्फ इस अभियान का हिस्सा हैं, बल्कि इसके सबसे महत्वपूर्ण संदेशवाहक भी हैं। रैली नगर संसाधन केंद्र परिसर से शुरू होकर शहर की कसाई मंडी स्थित पानी की टंकी तक निकाली गई।
इस पूरे रास्ते में बच्चों ने अपने हाथों में थामी तख्तियों के जरिए आम जनता को शिक्षा का महत्व समझाया। राह चलते लोग रुक-रुककर बच्चों की इस रैली को देखते और उनके उत्साह को सराहते नजर आए।
इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने अभियान के मूल उद्देश्य को बड़े साफ शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि “स्कूल चलो अभियान” का सबसे बड़ा लक्ष्य उन बच्चों को ढूंढना और स्कूलों में दाखिला दिलाना है, जो अभी भी शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हैं।
खासकर ग्रामीण इलाकों में, जहाँ कई बार जागरूकता की कमी या आर्थिक तंगी के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, उन तक पहुंचना इस अभियान की प्राथमिकता है। डीएम साहब ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, “कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
यह हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाएं, क्योंकि उनका भविष्य ही हमारे देश का भविष्य है।” उनके इन शब्दों में शिक्षा के प्रति सरकार और प्रशासन की गंभीरता साफ झलक रही थी।
ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान और चुनौती
यह अभियान सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी असली चुनौती और सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी है। अक्सर गांवों में बच्चों को खेतों में या घरों के कामों में हाथ बंटाना पड़ता है, और उनकी पढ़ाई पीछे छूट जाती है।
कई बार तो ऐसे बच्चों की गिनती भी नहीं हो पाती, जिनकी उम्र स्कूल जाने की है लेकिन वे कभी स्कूल का मुंह नहीं देख पाते। “स्कूल चलो अभियान” इन्हीं गुमनाम बच्चों को पहचान कर उन्हें शिक्षा की रोशनी से जोड़ने का काम करेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर ऐसे बच्चों का सर्वे करेंगी और उनके माता-पिता को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगी। यह सिर्फ दाखिले की बात नहीं है, बल्कि बच्चों को स्कूल में टिके रहने और अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की भी चुनौती है।
इस पहल में सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और आम जनता की भागीदारी भी बहुत जरूरी है। जिलाधिकारी ने सभी से अपील की कि अगर वे अपने आसपास किसी ऐसे बच्चे को देखें जो स्कूल नहीं जा पा रहा है, तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
हर नागरिक की जागरूकता और जिम्मेदारी ही इस अभियान को सही मायने में सफल बना सकती है। यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है जिसे हर स्तर पर सहयोग की जरूरत है।
अफसरों की मौजूदगी और आगे की रणनीति
इस महत्वपूर्ण मौके पर जिले के कई बड़े अधिकारी और शिक्षा विभाग के दिग्गज भी मौजूद थे। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) शेषनाथ सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रत्नेश कुमार और एबीएसए (Assistant Basic Shiksha Adhikari) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस बात के गवाह थे कि यह अभियान कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
उनके साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षक भी मौजूद थे, जो बच्चों के भविष्य को गढ़ने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। सभी ने एक स्वर में इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
इन अधिकारियों और शिक्षकों की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि ललितपुर जिले का शिक्षा विभाग और प्रशासन इस नेक काम के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
आने वाले दिनों में यह अभियान और जोर पकड़ेगा। स्कूलों में नए बच्चों के दाखिले को सुनिश्चित करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने और बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है ताकि ललितपुर में कोई भी बच्चा शिक्षा की मूलभूत सुविधा से वंचित न रह जाए।
यह सिर्फ एक अभियान नहीं है, बल्कि एक बेहतर और शिक्षित समाज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसकी शुरुआत आज बच्चों के नारों और डीएम की हरी झंडी से हुई, और जिसका लक्ष्य हर बच्चे के चेहरे पर शिक्षा की मुस्कान लाना है।

