नई दिल्ली: अगर आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं और सोचते हैं कि भारतीय पासपोर्ट से दुनिया की सैर आसान है, तो ताजा आंकड़े आपको थोड़ा सोचने पर मजबूर कर देंगे। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की नई रैंकिंग आ गई है और इस बार भारत की स्थिति थोड़ी और नीचे खिसक गई है। भारत अब दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट की लिस्ट में 125वें पायदान पर पहुंच गया है।
हैरानी की बात यह है कि साल 2025 में भारत 124वें नंबर पर था, लेकिन एक साल के भीतर हम एक पायदान और पीछे चले गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह रैंकिंग तय कैसे होती है और भारत क्यों पीछे है? दरअसल, यह इंडेक्स इस आधार पर तैयार किया जाता है कि किसी देश के पासपोर्ट होल्डर को कितनी जगहों पर बिना वीजा (Visa-free) जाने की आजादी है।
इसके साथ ही निवेश के मौके और वहां के लिविंग स्टैंडर्ड को भी देखा जाता है।
ग्लोबल सिटीजन सोल्यूशन (GCS) द्वारा जारी इस लिस्ट में टॉप 10 में ज्यादातर यूरोपीय और विकसित एशियाई देशों का कब्जा है। स्वीडन, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क, आयरलैंड, यूके, नॉर्वे और सिंगापुर जैसे देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए चुनौती यह है कि अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, चीन, अंडोरा और यूएई जैसे करीब 88 प्रमुख देशों में जाने के लिए अब भी वीजा की कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
लोक कला की दिग्गज तीजन बाई का निधन
एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग की खबरें हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत ने अपनी एक महान सांस्कृतिक आवाज खो दी है। छत्तीसगढ़ की मशहूर पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ.
तीजन बाई का 4 जुलाई को निधन हो गया। 70 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।
तीजन बाई सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जिस तरह जीवंत किया, उसने पंडवानी कला को सात समंदर पार तक पहुंचाया।
उनकी आवाज का जादू ऐसा था कि लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनके इसी योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें समय-समय पर बड़े सम्मानों से नवाजा।
1987 में उन्हें पद्मश्री मिला, 2003 में पद्म भूषण और साल 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, 1995 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
15 साल के वैभव ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड
खेल की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जिसने क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित कर दिया है। 15 साल और 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने टीम इंडिया के लिए अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेलकर इतिहास रच दिया है।
वैभव अब भारत के सबसे कम उम्र के डेब्यू करने वाले क्रिकेटर बन गए हैं।
इस उपलब्धि के साथ ही वैभव ने क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शेफाली ने 15 साल 239 दिन और सचिन ने 16 साल 205 दिन की उम्र में अपना पहला मैच खेला था।
वैभव का यह डेब्यू इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में चल रही T-20 सीरीज के दौरान हुआ।
वैभव का सफर काफी प्रभावशाली रहा है। दिसंबर 2024 में उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी से लिस्ट-ए क्रिकेट की शुरुआत की थी।
साथ ही, ICC U-19 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया था।
अमेरिका में INS सुदर्शिनी की धाक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मौजूदगी सिर्फ खेल या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि नौसेना ने भी अपनी ताकत दिखाई है। 5 जुलाई को भारतीय नौसेना का सेलिंग पोर्ट INS सुदर्शिनी अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बना।
न्यूयॉर्क की हडसन नदी पर INS सुदर्शिनी की मौजूदगी ने भारतीय नौसेना की वैश्विक पहुंच और गरिमा को दुनिया के सामने पेश किया।






































