भोजपुर: बुधवार की रात भोजपुर की सड़कों पर एक ऐसी खूनी कहानी लिखी गई, जिसने कोर्ट में गवाही देकर लौट रहे चाचा-भतीजे के रिश्ते को ताउम्र के लिए खत्म कर दिया. सूरज राय, उम्र 45 साल, अपने भतीजे दीपक के साथ कोर्ट से वापस आ रहे थे. गवाही का झंझट खत्म हुआ था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मौत उनका पीछा कर रही है. अंधेरा घिर चुका था और कोईलवर थाना क्षेत्र के धर्मपुर बाधार के पास, बाइक पर सवार हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया. गोलियां चलीं और सूरज राय वहीं, मौके पर ही ढेर हो गए. उनके सिर और पेट में गोली लगी थी. वहीं, 22 साल के भतीजे दीपक के घुटने के नीचे बुलेट जा धंसी. खून से लथपथ दीपक ने जैसे-तैसे SDPO-2 को फोन कर घटना की जानकारी दी. सूचना मिलते ही कोईलवर थानाध्यक्ष नरोत्तम चंद्र अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल दीपक को अस्पताल पहुंचाया गया. एक पल में सब कुछ बिखर चुका था. दीपक ने अस्पताल से बताया कि उन पर यह हमला 4 बीघा जमीन विवाद और अपहरण के एक पुराने मामले में कोर्ट में गवाही देने के कारण हुआ है. यानी, ये कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश, जिसकी जड़ें परिवार के भीतर ही थीं. जमीन का वो टुकड़ा, जिसका बंटवारा कभी सुलझ नहीं पाया, आखिरकार खून से लाल हो गया. इस घटना ने इंग्लिशपुर गांव में एक बार फिर पुराने जख्म हरे कर दिए हैं, जहां सूरज राय अपनी जिंदगी बिताते थे.
जमीन का वो पेच जिसकी कीमत जान से चुकानी पड़ी
इंग्लिशपुर गांव के 45 वर्षीय सूरज राय की शादी नहीं हुई थी. उनके दो भाई थे - कामता राय और सुदर्शन राय.
सूरज ने अपनी हिस्से की जमीन अपने भाइयों के नाम कर दी थी. घायल दीपक, सुदर्शन राय का ही बेटा है.
दीपक ने बताया कि विवाद की जड़ें तब और गहरी हो गईं जब उनके चाचा कामता राय उसी जमीन पर अपना घर बनवा रहे थे. कामता ने कथित तौर पर दीपक के पिता सुदर्शन राय को रोका और कहा, "तुम अभी घर मत बनवाओ, जैसे हमलोग कहेंगे, उसी तरह से काम करना.
" इस बात पर दोनों भाइयों के बीच भयंकर विवाद शुरू हो गया.
दीपक के आरोप के मुताबिक, कामता राय और उनके बेटे पिंटू, मनीष और नीरज ने मिलकर उन्हें घर बनाने से रोका. कामता का सीधा कहना था कि सूरज ने जो जमीन दी है, उस पर वह अकेले घर बनाएंगे, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहें.
इस जमीन विवाद को सुलझाने के लिए गांव में कई बार पंचायतें भी हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. जब बात हाथ से निकल गई, तो सुदर्शन राय ने BDO, अंचलाधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को न्याय के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन ये विवाद सुलझने की बजाय और उलझता गया, और आखिरकार एक खूनी मोड़ पर आ खड़ा हुआ.
पहले भी हो चुका था हमला और अपहरण
यह हमला किसी एक दिन का गुस्सा नहीं था, बल्कि एक लंबी रंजिश का नतीजा था. घायल युवक दीपक ने बताया कि 21 अप्रैल 2026 की सुबह, यानी इस खूनी रात से बहुत पहले, आरोपियों ने उनके घर में घुसकर जमकर मारपीट की थी.
सिर्फ मारपीट ही नहीं, उन्होंने घर का ताला तोड़कर लाखों रुपए नगद, जेवरात और एक टीवी भी लूट लिया था. दीपक को तो वे उठा कर कोईलवर ले गए थे, जहां उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई.
किसी तरह दीपक वहां से भाग निकले और बबुरा थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया.
इस पूरे मामले में सूरज राय ही सबसे प्रमुख गवाह थे. दीपक का आरोप है कि इतनी गंभीर शिकायत के बावजूद, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
थक-हारकर दीपक ने पुलिस अधीक्षक और बिहार के DGP तक को लिखित आवेदन भेजे, लेकिन जैसा कि दीपक का कहना है, कोई ठोस नतीजा नहीं निकला और विवाद जस का तस बना रहा, धीरे-धीरे एक बड़े खतरे में बदलता रहा.
गवाही देकर लौटते वक्त घात लगाकर हमला
बुधवार को दीपक और उनके चाचा सूरज राय इसी पुराने मारपीट और अपहरण मामले में आरा कोर्ट में गवाही देने आए थे. गवाही निपटाने के बाद, दोनों एक ऑटो में बैठकर पचैना-काजीचक स्थित अपनी बुआ पतासो देवी के घर गए.
वहां उन्होंने बुआ के बेटे विनोद राय से भी मुलाकात की. इसके बाद दोनों पैदल ही अपने गांव की ओर लौट रहे थे.
अंधेरी रात में, धर्मपुर बाधार के पास, जब वे बेफिक्र होकर चल रहे थे, बाइक सवार बदमाशों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया. सूरज राय को सिर और पेट में गोली लगी और वे मौके पर ही गिर पड़े.
दीपक के घुटने के नीचे गोली लगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और घटना की सूचना तुरंत अधिकारियों को दी.
पुलिस की पड़ताल और अब तक की स्थिति
घटना की जानकारी मिलते ही SDPO-2 रंजीत कुमार तुरंत सदर अस्पताल पहुंचे और घायल दीपक से पूरी घटना के बारे में जानकारी ली. हालांकि, हमलावरों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है.
पुलिस अब तकनीकी अनुसंधान का सहारा ले रही है. टावर डंप एनालिसिस, CCTV फुटेज और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बदमाशों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
एक बेकसूर की जान चली गई है और एक भतीजा घायल है. अब देखना होगा कि पुलिस इस जमीन विवाद के खूनी अंत के पीछे के चेहरों को कब तक बेनकाब कर पाती है.
न्याय की उम्मीद अभी भी बाकी है, भले ही एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया हो.


