दिल्ली: भैया, आजकल एक ही सवाल सबके दिमाग में घूम रहा है – पेट्रोल-डीजल के बाद अब सिलेंडर सस्ता हुआ कि नहीं? खासकर घर चलाने वाली गृहिणियों के लिए तो ये हर महीने की सबसे बड़ी टेंशन है। रसोई गैस का दाम जैसे ही बढ़ता है, बजट बिगड़ जाता है। और जब घटने की उम्मीद जगती है, तो आंखें तरस जाती हैं। तो क्या आज, 7 जुलाई 2026 को, आपको अपनी रसोई गैस के दाम में कोई राहत मिली है? आइए जानते हैं क्या चल रहा है मार्केट में और सरकारी कंपनियां क्या कह रही हैं।
बता दें कि आज यानी 7 जुलाई को, 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ये दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं, जैसा पिछले कुछ हफ्तों से चल रहा है।
लेकिन हां, एक अच्छी खबर 1 जुलाई को जरूर आई थी, हालांकि वो उन लोगों के लिए थी जो 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए दामों में 183.50 रुपये की अच्छी-खासी कटौती की गई थी।
क्या कमर्शियल सिलेंडर वालों के लिए राहत है?
याद होगा आपको, पिछले दिनों पश्चिम एशिया में माहौल काफी गरमाया हुआ था। इसी टेंशन का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा था।
19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम तो बढ़कर 3100 रुपये के पार पहुंच गए थे, जिसने व्यापार जगत की कमर तोड़ दी थी। ऐसे में 1 जुलाई की वो कटौती एक बड़ी राहत लेकर आई थी।
अब कारोबारियों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कुछ कम हो गया है, जो कहीं न कहीं मार्केट के लिए भी एक पॉजिटिव साइन है।
अब आप पूछेंगे कि घरेलू सिलेंडर वालों को आखिरी बार कब खुशी मिली थी? तो भैया, आखिरी बार रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव जून के महीने में हुआ था। उस वक्त मामूली ही सही, लेकिन 29 रुपये तक की कमी की गई थी।
हालांकि, महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए ये 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा ही था। लेकिन कहते हैं न, बूंद-बूंद से सागर भरता है, तो शायद ये छोटी कटौती भी कुछ राहत दे गई होगी।
आपके शहर में सिलेंडर कितने का है?
चलिए, अब फटाफट एक नज़र डाल लेते हैं कि देश के बड़े शहरों में अभी सिलेंडर कितने का मिल रहा है। दिल्ली में 14.2 किलो वाला सिलेंडर आपको 942 रुपये में मिलेगा, वहीं 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये का है।
मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.5 रुपये का और कमर्शियल 2885.5 रुपये का। कोलकाता में 968 रुपये (घरेलू) और 3082 रुपये (कमर्शियल)।
चेन्नई में 957.5 रुपये (घरेलू) और 3106 रुपये (कमर्शियल)। नोएडा में 939.50 रुपये (घरेलू) और 2917 रुपये (कमर्शियल)।
देहरादून में 961 रुपये (घरेलू) और 2983.5 रुपये (कमर्शियल)। हैदराबाद में 934 रुपये (घरेलू) और 2052.5 रुपये (कमर्शियल)।
गोवा पणजी में 956 रुपये (घरेलू) और 3006.5 रुपये (कमर्शियल)। और तिरुवनंतपुरम में 951 रुपये (घरेलू) और 2970.5 रुपये (कमर्शियल)।
कुल मिलाकर, घरेलू सिलेंडर के दाम अभी भी 900 रुपये से ऊपर बने हुए हैं, जो आम जनता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ये कीमतें लगातार लोगों के बजट पर बोझ बन रही हैं, और हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर कब राहत मिलेगी।
कच्चे तेल को लेकर सऊदी अरब ने क्या बड़ा ऐलान किया है?
लेकिन अब एक और बड़ी खबर है जो कहीं न कहीं आने वाले समय में आपके सिलेंडर के दामों पर असर डाल सकती है। ये खबर आई है सऊदी अरब से।
उन्होंने एशियाई देशों में अपने खरीदारों को कम कीमत पर कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया है। ये कोई छोटा-मोटा फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें हैं जो इंटरनेशनल मार्केट के समीकरण बदल रही हैं।
इस फैसले के पीछे मुख्य वजह ये है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अब हालात पहले जैसे तनावपूर्ण नहीं रहे। यानी, वहां सब सामान्य हो गया है और तेल की आवाजाही बिना किसी डर के हो रही है।
इसके साथ ही, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई भी पहले से बढ़ गई है। जब किसी चीज़ की सप्लाई बढ़ जाती है और मांग उतनी नहीं रहती, तो स्वाभाविक है कि बेचने वाली कंपनियों के बीच तगड़ा कॉम्पटीशन शुरू हो जाता है।
सऊदी अरब भी इसी कॉम्पटीशन का फायदा उठा रहा है और ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए दाम घटा रहा है। उन्हें पता है कि अगर वो सस्ते में तेल देंगे, तो ग्राहक उनके पास ही आएंगे।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की मानें, तो सोमवार को जारी प्राइस लिस्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने अगले महीने के लिए अपने सबसे खास ग्रेड 'अरब लाइट' कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने का ऐलान किया है। सोचिए, 11 डॉलर! ये कोई छोटी बात नहीं है।
ये कटौती तेल इंडस्ट्री में एक बड़ा भूचाल ला सकती है। नई कीमत क्षेत्रीय बेंचमार्क से भी करीब 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम होगी।
रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि साल 2000 के बाद ये पहली बार है जब किसी एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी कटौती की गई है। मतलब, एशियाई खरीदारों के लिए तो बल्ले-बल्ले हो गई है।
उन्हें सस्ते दाम पर तेल मिलने की उम्मीद जग गई है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
क्या भारत में अब LPG के दाम घटेंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल – क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का सीधा फायदा भारत को मिलेगा? क्या तुरंत पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम कम हो जाएंगे? जवाब है, थोड़ा सब्र रखिए। हमारा सिस्टम थोड़ा अलग तरीके से काम करता है।
जानकार बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद भी भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम तुरंत कम नहीं होते। इसका एक लंबा-चौड़ा सिस्टम होता है।
तेल कंपनियों को पहले अपने पुराने स्टॉक को खपाना होता है, फिर नई कीमतों के हिसाब से एडजस्टमेंट होता है। इसमें थोड़ा टाइम लगता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्चा तेल इसी निचले स्तर पर लंबे समय तक बना रहता है, तो जुलाई के अंत या फिर अगस्त के महीने में हमें घरेलू कीमतों में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। तब तक के लिए उम्मीद लगाए रखनी होगी और अपनी जेब थोड़ी ढीली रखनी पड़ेगी।
कुल मिलाकर, फिलहाल तो आपकी रसोई का बजट जस का तस रहेगा, लेकिन आने वाले कुछ हफ्तों में शायद कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल जाए। ये खबर ही आम जनता के लिए एक बड़ी उम्मीद है, क्योंकि रसोई के बढ़ते खर्चों से हर कोई परेशान है।






































