फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में पिछले कई दिनों से सूरज भैया आग उगल रहे थे। गर्मी का आलम ये था कि मानो आसमान से अंगारे बरस रहे हों। सड़कें दोपहर में सूनी पड़ जाती थीं और रात में भी बिस्तर से चैन नहीं मिल रहा था। तापमान का मीटर 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक लगातार चढ़ा हुआ था, जिसने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। लेकिन फिर बुधवार को देहात के इलाकों में काले बादलों ने डेरा डाला और झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश ने न सिर्फ गर्मी से बेहाल लोगों को चैन की सांस दी, बल्कि किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान लौटा दी है, क्योंकि धान की रोपाई के लिए यही पानी संजीवनी बनकर आया है।
फर्रुखाबाद में बीते कई दिनों से मौसम का मिजाज ऐसा था कि मानो प्रकृति इम्तिहान ले रही हो। दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडराता रहता था और रात में भी पारा 30 से 32 डिग्री सेल्सियस से नीचे आने का नाम नहीं ले रहा था।
ऐसे में पंखे और कूलर भी काम नहीं आ रहे थे। लोग दिनभर घरों में दुबके रहने को मजबूर थे, जरूरी काम पर निकलने से पहले सौ बार सोचते थे।
मंगलवार को भी आसमान में बादल तो छाए थे, लेकिन वो सिर्फ उम्मीदें जगाकर चले गए, बिन बरसे ही। इससे लोगों की निराशा और बढ़ गई थी।
गर्मी से तपे लोगों को मिली बड़ी राहत
जिस पल का फर्रुखाबाद के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वो बुधवार को आखिरकार आ ही गया। खासकर जिले के ग्रामीण इलाकों में, जहां सूरज की तपिश और ज़्यादा महसूस होती है।
दोपहर होते-होते आसमान में घने बादल छाने लगे और फिर देखते ही देखते नवाबगंज, कम्पिल, कायमगंज और राजेपुर जैसे इलाकों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया।
कम्पिल और कायमगंज में तो बारिश ने अपनी पूरी ताकत दिखा दी। यहां इतनी तेज बरसात हुई कि कायमगंज की कई गलियों और सड़कों पर पानी भर गया।
लोग घरों से निकलकर इस मौसम का लुत्फ लेते दिखे। नवाबगंज में भी लगभग 40 मिनट तक लगातार तेज बारिश होती रही, जिसके बाद फुहारों का दौर चलता रहा।
राजेपुर क्षेत्र में भी बादलों ने जमकर मेहरबानी की, जिससे वहां भी खेतों और सड़कों पर पानी बह निकला। यह नजारा ग्रामीण इलाकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था, जहां लोग गर्मी से निजात पाने के लिए प्रार्थना कर रहे थे।
शहर का मौसम भी हुआ सुहाना; किसानों के लिए खुशखबरी
एक तरफ जहां देहात में झमाझम बारिश ने कहर बरपाया, वहीं फर्रुखाबाद शहर का मिजाज थोड़ा अलग रहा। शहर में दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और रह-रहकर ठंडी हवा चलती रही।
हालांकि शहर में देहात जैसी तेज बारिश नहीं हुई, लेकिन बादलों और ठंडी हवा ने शहरवासियों को भी भीषण गर्मी से काफी राहत पहुंचाई। लोगों ने ठंडी हवा में सांस ली और सुहाने मौसम का लुत्फ उठाया।
इस बारिश का सबसे ज़्यादा फायदा किसानों को मिलने वाला है। पिछले कुछ हफ्तों से किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे थे।
धान की फसल की रोपाई का समय आ गया है और इसके लिए पानी की बहुत ज़रूरत होती है। इस झमाझम बारिश ने किसानों की चिंताएं दूर कर दी हैं।
अब वे बिना किसी देरी के धान के पौधों की रोपाई शुरू कर पाएंगे।
किसानों का कहना है कि यह बारिश धान की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अच्छी बारिश से धान की फसल की पैदावार भी बेहतर होती है, जिससे उनकी मेहनत का पूरा फल मिलता है।
अगर समय पर और पर्याप्त बारिश हो जाए, तो किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद बंध जाती है, जो उनकी आर्थिक स्थिति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह बारिश न सिर्फ वर्तमान धान की रोपाई के लिए मुफीद है, बल्कि यह मिट्टी को भी उपजाऊ बनाने में मदद करेगी और आने वाली फसलों के लिए भी बेहतर ज़मीन तैयार करेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह बारिश एक बड़ी उम्मीद बनकर आई है। अब खेत-खलिहानों में रौनक लौटेगी और किसान नए उत्साह के साथ अपने काम में जुट जाएंगे।

