बांका: बिहार के बांका जिले में इन दिनों एक खूंखार सांड ने गांव वालों की नींद उड़ा रखी है. रविवार की शाम रजौन थाना क्षेत्र के नवटोलिया गांव में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है. यहां मवेशी चराने गए एक किसान डमोली यादव पर उसी पागल सांड ने हमला कर दिया, जिसके आतंक से पहले से ही लोग थर-थर कांप रहे थे. यह हमला इतना खतरनाक था कि डमोली को संभलने का मौका ही नहीं मिला और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. गांव में हर तरफ मातम पसरा है और लोगों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है.
असल में, ये घटना सिर्फ एक सांड के हमले भर की नहीं है, बल्कि एक ऐसे खतरे की कहानी है, जो गांव में कई दिनों से मंडरा रहा था. डमोली यादव रोज की तरह अपने जानवरों को लेकर गांव से लगे बहियार (खुले खेत) में चराने गए थे.
शाम का वक्त था और शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि आज का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा. अचानक वो सांड सामने आया और बिना कोई मौका दिए डमोली पर टूट पड़ा.
सांड ने उन्हें इस कदर रौंदा कि वे वहीं लहुलुहान होकर गिर पड़े.
हमले की खबर सुनते ही गांव में हाहाकार मच गया. डमोली के परिजन और दूसरे ग्रामीण जान की बाजी लगाकर मौके पर पहुंचे.
सांड की आक्रामकता देखकर कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था. लेकिन अपने साथी को बचाने की उम्मीद में ग्रामीणों ने लाठी-डंडों के सहारे जैसे-तैसे सांड को वहां से खदेड़ा.
फौरन घायल डमोली यादव को रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश की. लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि डमोली ने दम तोड़ दिया.
इस खबर के मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों और गांव वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
नवटोलिया में सांड का आतंक: एक जानलेवा अतीत
ये पहली बार नहीं था जब इस सांड ने डमोली यादव को अपना निशाना बनाया था. ग्रामीणों ने बताया कि कुछ महीने पहले भी इसी सांड ने डमोली पर हमला किया था, लेकिन तब किस्मत अच्छी थी और इलाज के बाद वे बच गए थे.
लेकिन इस बार नियति को कुछ और ही मंजूर था. गांव के लोग बताते हैं कि यह सांड सिर्फ डमोली ही नहीं, बल्कि गांव के कई और लोगों पर भी हमला कर चुका है.
इसकी दहशत इतनी ज्यादा है कि अब लोग बहियार या खेतों की तरफ जाने से भी डरते हैं. हर वक्त एक अनजाना खतरा उनके सिर पर मंडराता रहता है.
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "इस सांड ने कई बार लोगों को घायल किया है. हम सब डर के साए में जी रहे हैं.
शाम होते ही कोई घर से निकलने की हिम्मत नहीं करता. बच्चों को भी बाहर जाने से मना कर दिया गया है.
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ग्रामीणों का आरोप: जानबूझकर छोड़ा गया खूंखार जानवर?
इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश है. उनका सीधा आरोप है कि इस सांड का पालन-पोषण गांव के ही कुछ लोगों द्वारा किया जाता था.
लेकिन अब जब यह इतना खतरनाक हो गया है और लोगों की जान का दुश्मन बन गया है, तो इसे यूं ही खुला छोड़ दिया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस सांड पर लगाम लगाई गई होती, तो शायद डमोली यादव की जान बच सकती थी.
वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस खूंखार सांड को तुरंत पकड़ा जाए और जिन लोगों की लापरवाही से यह स्थिति बनी है, उन पर भी कार्रवाई की जाए.
नवटोलिया गांव में इस वक्त तनाव का माहौल है. एक तरफ डमोली यादव के परिवार में मातम पसरा है, तो दूसरी तरफ गांव वाले इस पागल सांड के आतंक से मुक्ति पाने की राह देख रहे हैं.
उनकी चिंता सिर्फ डमोली की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले ऐसे और हमलों को लेकर भी है. रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने भी पुष्टि की कि डमोली यादव की मौत सांड के हमले से हुई गंभीर चोटों के कारण हुई है.
गांव वाले अब प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं.




































