बांका: बिहार के बांका जिले में रविवार की शाम एक ऐसी खबर आई जिसने कटोरिया प्रखंड के आनंदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भैरोगंज गांव को सन्न कर दिया। 24 साल की एक होनहार बेटी, जिसने समाज सेवा और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा था, अचानक अपने ही घर में फंदे से लटकी मिली। यह कहानी है जीविका की सामुदायिक समन्वयक प्रेमलता देवी की, जिनकी मौत ने पूरे इलाके में एक अजीब खामोशी और कई सवाल छोड़ दिए हैं।
प्रेमलता देवी, भैरोगंज निवासी पंकज यादव की पत्नी थीं और जीविका में सामुदायिक समन्वयक (CM) के पद पर कार्यरत थीं। रविवार का दिन भी उनके लिए बाकी दिनों जैसा ही था।
वो अपनी जीविका दीदियों के साथ एक बैठक में शामिल हुई थीं। बैठक में मौजूद महिलाओं ने बताया कि उस दौरान प्रेमलता बिल्कुल सामान्य दिख रही थीं, उनके चेहरे पर कोई शिकन या परेशानी का भाव नहीं था।
शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ घंटों बाद यह हँसता-खेलता चेहरा हमेशा के लिए शांत हो जाएगा।
बैठक खत्म हुई और प्रेमलता अपने घर लौटीं। घर आने के बाद वो सीधे अपने कमरे में चली गईं।
कुछ देर तक जब वो कमरे से बाहर नहीं निकलीं, तो परिजनों को चिंता हुई। अनहोनी की आशंका से परिजनों ने दरवाजा खोलकर देखा।
अंदर का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था – प्रेमलता देवी कमरे में फांसी के फंदे से लटकी हुई थीं। यह देखकर घर में कोहराम मच गया।
चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी जमा होने लगे और गांव में मातम छा गया।
घटनास्थल पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम
इस हृदय विदारक घटना की सूचना तुरंत आनंदपुर थाना अध्यक्ष विनोद कुमार को दी गई। थाना अध्यक्ष अपनी पुलिस टीम के साथ बिना देर किए घटनास्थल पर पहुंचे।
परिजनों की मदद से प्रेमलता के शव को फंदे से नीचे उतारा गया। माहौल गमगीन था और हर कोई इस अप्रत्याशित घटना से स्तब्ध था।
पुलिस ने तुरंत अपनी जांच शुरू की और शुरुआती पड़ताल के बाद फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच की और आवश्यक साक्ष्य जुटाए। ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह घटना के पीछे के कारणों और परिस्थितियों को समझने में मदद करती है।
टीम ने कमरे के चप्पे-चप्पे को खंगाला ताकि कोई भी छोटा-सा सुराग छूट न जाए। इस बीच, मृतका के पिता केशव यादव और मायके पक्ष के अन्य लोग भी खबर सुनकर भैरोगंज पहुंच गए।
बेटी की मौत की खबर सुनते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया। ससुराल और मायके दोनों पक्षों का रो-रोकर बुरा हाल था, हर कोई इस त्रासदी से टूट चुका था।
घरेलू कलह: एक अनकही त्रासदी
पुलिस की शुरुआती जांच में इस घटना का कारण 'घरेलू कलह' बताया जा रहा है। 'घरेलू कलह' एक ऐसा शब्द है जो अक्सर चार दीवारी के भीतर दबे अनगिनत दुखों और अनकही कहानियों को समेटे होता है।
यह एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे इंसान को अंदर से खोखला कर देती है और कई बार इसका अंत इतना दर्दनाक होता है, जैसा कि प्रेमलता देवी के साथ हुआ। अक्सर, महिलाएं ऐसी परिस्थितियों में अकेले जूझती रहती हैं और समाज या परिवार से खुलकर बात नहीं कर पातीं, जिससे तनाव और बढ़ जाता है।
प्रेमलता देवी जैसी जीविका कार्यकर्ता, जो खुद महिलाओं को सशक्त करने का काम करती थीं, का घरेलू कलह के चलते इतना बड़ा कदम उठाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह दिखाता है कि समाज में कितनी ही ऐसी महिलाएं होंगी जो बाहरी तौर पर मजबूत दिखती हैं, लेकिन अंदर से किसी अनकही पीड़ा से जूझ रही होती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर घरेलू विवादों के गंभीर परिणामों पर सोचने को मजबूर किया है, जहां एक पल की अशांति पूरी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।
पुलिस की कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में मृतका के पिता केशव यादव के बयान पर 'यूडी केस' (Unnatural Death Case) यानी अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है। यह एक मानक प्रक्रिया है जब किसी व्यक्ति की मृत्यु सामान्य कारणों से न होकर संदिग्ध परिस्थितियों में होती है।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के असल कारणों का पता चल सके और किसी भी तरह की आशंका को दूर किया जा सके।
आनंदपुर थाना अध्यक्ष विनोद कुमार ने मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि यूडी केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी।
इस घटना ने गांव और आस-पास के इलाकों में शोक की लहर फैला दी है। एक युवा जीवन का यूं अचानक समाप्त हो जाना हर किसी को झकझोर गया है।
परिवार अब सिर्फ न्याय और सच्चाई की उम्मीद कर रहा है कि आखिर प्रेमलता ने यह कदम क्यों उठाया, और क्या सचमुच घरेलू कलह ही इसकी एकमात्र वजह थी?




































