मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाएगा. बात है दहेज की, शादी के पवित्र बंधन को तोड़ने की और एक जिंदगी को बेरहमी से खत्म कर देने की. मनियारी थाना क्षेत्र के जमहरुआ गांव में एक विवाहिता जूली देवी की कथित तौर पर दहेज के लिए हत्या कर दी गई और फिर सबूत मिटाने के इरादे से उसकी लाश को आनन-फानन में जला भी दिया गया. दिल्ली में बैठी मां को आखिरी बार बेटी का फोन आया था, जिसमें बेटी ने रोते हुए बताया था, "मां, ये लोग मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं." मां को क्या पता था कि ये फोन उसकी बेटी की आखिरी बात होगी.
जूली की मां रंजू देवी, जो दिल्ली में अपने बेटे के साथ रहती हैं, ने बताया कि 25 जून को उनकी बेटी से बात हुई थी. जूली ने तब अपनी आपबीती सुनाई थी कि कैसे ससुराल वाले उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं और अब तो जान से मारने की धमकियां भी मिल रही हैं.
रंजू देवी के मुताबिक, शादी के आठ साल बाद भी उनकी बेटी के ससुराल वालों की दहेज की भूख खत्म नहीं हुई थी और इसी लालच ने उनकी बेटी की जान ले ली.
शादी के बाद भी नहीं खत्म हुई दहेज की भूख
जूली देवी की शादी 18 अप्रैल 2018 को मनियारी थाना क्षेत्र के जमहरुआ गांव निवासी उमेश राय के साथ हुई थी. रंजू देवी बताती हैं कि उन्होंने अपनी हैसियत के हिसाब से शादी में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.
3 लाख रुपए नकद दिए थे, सोने की चेन, अंगूठी, बाली के साथ-साथ गृहस्थी का सारा सामान भी दिया था, ताकि उनकी बेटी को ससुराल में कोई दिक्कत न हो और उसका नया जीवन सुखमय रहे. लेकिन कहते हैं न, कुछ लोगों की लालच की कोई सीमा नहीं होती.
शादी के कुछ समय बाद से ही जूली को ससुराल में प्रताड़ित किया जाने लगा. बार-बार उससे एक बाइक की डिमांड की जाती थी.
जब बाइक की यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया गया. जूली पर तरह-तरह के ताने कसे जाते, उसे बात-बात पर नीचा दिखाया जाता और अक्सर मारपीट भी की जाती थी.
बेटी ने कई बार अपनी मां को फोन करके इस बारे में बताया था, लेकिन हर बार यही उम्मीद की जाती थी कि शायद सब ठीक हो जाएगा, रिश्ते सुधर जाएंगे और ससुराल वाले समझ जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, बल्कि स्थिति और बिगड़ती चली गई.
आखिरी फोन कॉल और फिर मौत की खबर
रंजू देवी ने बताया कि जब बेटी ने उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने की बात बताई, तो उन्होंने और उनके बेटे ने मिलकर जूली के पति उमेश राय और बाकी ससुराल वालों को समझाने की काफी कोशिश की. उन्हें लगा कि शायद उनकी बात का कोई असर होगा, लेकिन दहेज के लोभियों पर कोई असर नहीं पड़ा.
उन्होंने बेटी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सभी कोशिशें नाकाम रहीं. 25 जून के बाद कुछ ही दिनों में, रंजू देवी को गांव से एक फोन आया, जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी.
फोन पर बताया गया कि उनकी बेटी जूली की हत्या कर दी गई है. यह सुनकर मां बेहाल हो गईं, उनके दुनिया उजड़ गई.
जैसे-तैसे दिल्ली से मुजफ्फरपुर के लिए निकलीं, लेकिन जब तक वे पहुंचतीं, ससुराल वालों ने बेटी का अंतिम संस्कार भी कर दिया था. रंजू देवी का आरोप है कि ये सब सबूत मिटाने के लिए किया गया था.
एक मां होने के नाते, उनका सबसे बड़ा दर्द यही था कि वे अपनी बेटी को आखिरी बार देख भी नहीं पाईं, उसे छू भी नहीं पाईं. अंतिम संस्कार में उनकी गैर-मौजूदगी ने इस पूरे मामले को और भी ज्यादा संदिग्ध बना दिया है, और यह सीधे तौर पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ का मामला लग रहा है.
बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में?
जूली देवी की मौत के बाद, उसकी मां रंजू देवी को अपनी नातिन अनामिका और दोनों नातियों आर्यन-दीपांशु की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है. उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई है कि बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए.
इन छोटे बच्चों ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया है और अब उनके भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है. दादी को डर है कि कहीं इन मासूमों के साथ भी कुछ बुरा न हो जाए, या उन्हें भी उनके अधिकार से वंचित न कर दिया जाए.
एक पल में उनकी दुनिया बदल गई है, और अब उन्हें न सिर्फ मां का प्यार नसीब नहीं होगा, बल्कि सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है.
अब पुलिस के सामने क्या है चुनौती?
रंजू देवी की शिकायत पर मनियारी पुलिस थाने में जूली के पति उमेश राय, सास-ससुर और जेठ समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने FIR तो दर्ज कर ली है, लेकिन सभी आरोपी घर छोड़कर फरार हो चुके हैं.
पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी हुई है और जगह-जगह छापेमारी कर रही है. इस मामले में पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि जूली का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया है.
क्योंकि ससुराल वालों ने आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, इसलिए हत्या के सीधे और पुख्ता सबूत जुटाना मुश्किल हो गया है. अब पुलिस को इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए अन्य साक्ष्यों, जैसे कि गवाहों के बयान, फोन कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों पर ज्यादा निर्भर रहना होगा.
यह एक जटिल जांच है, जिसमें पुलिस को बहुत सावधानी और तत्परता से काम करना होगा, ताकि जूली को न्याय मिल सके और उसके हत्यारों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके. यह मामला दिखाता है कि कैसे दहेज की लालच आज भी समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए है और मासूम जिंदगियों को लील रही है, जिससे परिवारों में मातम पसर रहा है और न्याय की गुहार लगाई जा रही है.

