मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और कुछ अधिकारियों की नीयत पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) साहब को आठ हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पटना से आई निगरानी विभाग की विशेष टीम ने रंगे हाथों दबोच लिया। समझिए, हुआ यूं कि एक मामूली से विवाद में मदद करने और 'केस डायरी' को 'मैनेज' करने के नाम पर इन एएसआई साहब ने ऐसी चाल चली कि खुद ही अपने बुने जाल में बुरी तरह फंस गए।
ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है मुजफ्फरपुर के साहेबगंज स्थित राजेपुर ओपी की, जहां तैनात थे एएसआई मुन्ना। असल में, ये पूरा मामला बरूराज के फुलवरिया गांव के बबन पासवान का था।
उनका पड़ोसी मोहन पासवान से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। अब ऐसे विवादों में अक्सर पुलिस की एंट्री होती है, और थाने में केस दर्ज होने या कार्रवाई के नाम पर 'मैनेजमेंट' की बातें भी खूब सुनाई पड़ती हैं।
इस बार इसी 'मैनेजमेंट' का जिम्मा एएसआई मुन्ना यादव ने अपने कंधों पर लिया, लेकिन उसकी कीमत उन्होंने दस हजार रुपए तय कर दी।
रिश्वत का खेल और शिकायत
पीड़ित बबन पासवान के अनुसार, एएसआई मुन्ना यादव इस मामले के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (आईओ) थे। केस डायरी में चीजों को अपने मनमुताबिक चढ़ाने या 'मैनेज' करने के नाम पर उन्होंने बबन पासवान से दस हजार रुपए की रिश्वत की मांग की।
शुरुआती मांग दस हजार की थी, लेकिन मोलभाव के बाद मामला आठ हजार रुपए पर आकर टिका। लेकिन बबन पासवान, शायद इन सब बातों से तंग आ चुके थे या फिर उन्होंने तय कर लिया था कि गलत के आगे झुकना नहीं है।
उन्होंने रिश्वत देने के बजाय एक दूसरा रास्ता चुना, जो सीधा पटना स्थित निगरानी विभाग के दफ्तर तक पहुंचता था।
बबन पासवान ने हिम्मत दिखाई और पटना जाकर निगरानी विभाग में अपनी शिकायत दर्ज कराई। निगरानी विभाग किसी भी शिकायत को ऐसे ही हवा में नहीं लेता।
पहले पूरी जांच-पड़ताल की जाती है और शिकायत के तथ्यों का सत्यापन किया जाता है। विभाग ने बबन पासवान की शिकायत का सत्यापन किया और पाया कि एएसआई मुन्ना वाकई रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
जब सच्चाई पुख्ता हो गई, तो निगरानी विभाग की टीम ने अपने 'ऑपरेशन' की तैयारी शुरू कर दी।
जाल बिछाया और धर दबोचा
शिकायत सही पाए जाने के बाद निगरानी की टीम ने एक फुलप्रूफ प्लान बनाया। जैसे फिल्मों में होता है, वैसे ही यहां भी केमिकल लगे नोटों का इंतजाम किया गया।
शिकायतकर्ता बबन पासवान को आठ हजार रुपए दिए गए, जिन पर खास तरह का केमिकल लगा हुआ था। निर्देश साफ थे – एएसआई मुन्ना को ये पैसे राजेपुर ओपी में ही देने हैं।
निगरानी विभाग की टीम पूरी तैयारी के साथ पहले से ही मौके पर मौजूद थी, बस सही वक्त का इंतजार कर रही थी।
निर्धारित समय पर, योजना के मुताबिक, बबन पासवान राजेपुर ओपी पहुंचे और एएसआई मुन्ना को आठ हजार रुपए थमा दिए। जैसे ही मुन्ना ने रिश्वत के पैसे अपने हाथों में लिए, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम हरकत में आ गई।
उन्होंने बिना देर किए एएसआई मुन्ना को रंगे हाथ दबोच लिया। ये नजारा थाने के भीतर या बाहर जो भी देख रहा था, वो हैरान था।
किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऐसी कार्रवाई इतनी अचानक और इतने नाटकीय ढंग से हो सकती है।
हाथ धुलाने पर हुआ खुलासा
रंगे हाथ पकड़ने के बाद रिश्वतखोरी की पुष्टि के लिए एक खास प्रक्रिया अपनाई गई, जो ऐसे मामलों में अक्सर होती है। एएसआई मुन्ना के हाथों को केमिकल वाले पानी में धुलवाया गया।
जैसे ही उनके हाथ पानी में गए, पानी का रंग लाल हो गया। यह इस बात का पुख्ता और अकाट्य सबूत था कि उन्होंने केमिकल लगे नोटों को छुआ था और रिश्वत ली थी।
अब बचने का कोई रास्ता नहीं था और सारी बहस बेमानी हो गई थी।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद, निगरानी विभाग की टीम आरोपी एएसआई मुन्ना को अपने साथ लेकर पटना के लिए रवाना हो गई। पटना में उनसे आगे की पूछताछ होगी, जिसमें उनसे इस पूरे मामले और उनके अन्य संभावित संदिग्ध लेन-देन के बारे में विस्तार से सवाल-जवाब किए जाएंगे।
यह पूछताछ कई और खुलासे करा सकती है, यह भी मुमकिन है कि ऐसे और भी मामले सामने आएं जिनमें 'मैनेजमेंट' का खेल चल रहा हो। पूछताछ पूरी होने के बाद मुन्ना को विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा, जहां कानून अपना काम करेगा और उनके भविष्य का फैसला होगा।
पुलिस महकमे में हलचल
इस कार्रवाई से मुजफ्फरपुर के पुलिस महकमे में खासी चर्चा है। एक तरफ ईमानदार पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ता है, तो दूसरी तरफ उन लोगों में डर बैठता है जो खाकी की आड़ में ऐसी हरकतों को अंजाम देते हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि भ्रष्टाचार किस कदर हमारे सिस्टम में जड़ें जमा चुका है और कैसे इसे उखाड़ फेंकने के लिए लगातार ऐसी ही सख्ती और निगरानी की जरूरत है। बबन पासवान की हिम्मत और निगरानी विभाग की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि अगर कोई ठान ले, तो सिस्टम को साफ किया जा सकता है।
अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है और एएसआई मुन्ना यादव को कितनी सजा मिलती है।

