समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में अब तक उच्च शिक्षा हासिल करना बहुत से छात्रों, खासकर छात्राओं के लिए एक बड़ा संघर्ष रहा है। दूरदराज के कॉलेज जाना और वहां रहकर पढ़ाई करना, आर्थिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चों पर कई परिवारों के लिए एक चुनौती से कम नहीं था। लेकिन अब समस्तीपुर के छात्रों का यह सपना सच होने जा रहा है। जिले के पांच प्रखंडों में एक साथ सरकारी कॉलेज खुलने की तैयारी है और इस बार पढ़ाई के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि ये कॉलेज उनके घरों के करीब ही होंगे।
कल्पना कीजिए, एक छात्रा जो पहले लंबी दूरी या परिवहन के अभाव के कारण ग्रेजुएशन की पढ़ाई नहीं कर पाती थी, अब उसे अपने गांव या कस्बे से कुछ ही किलोमीटर दूर नया कॉलेज मिल जाएगा। यह सिर्फ शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि हजारों सपनों को पंख देने जैसा है।
इन पांच नए राजकीय महाविद्यालयों में इसी सत्र से यानी इसी साल से दाखिले शुरू हो जाएंगे, जिससे छात्रों को बिना देरी के उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा।
इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने से पहले वहां क्या-क्या व्यवस्थाएं हैं, ये देखने खुद जिले के मुखिया यानी डीएम रोशन कुशवाहा मोर्चा संभाले हुए हैं। वो कॉलेज के उद्घाटन से पहले हर छोटी-बड़ी चीज पर खुद नजर रख रहे हैं।
उनकी टीम और वो खुद यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब छात्र इन नए कॉलेजों में आएं, तो उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
कॉलेज खुलने से पहले डीएम का मैराथन निरीक्षण
बुधवार शाम को समस्तीपुर के डीएम रोशन कुशवाहा ने जिले के खानपुर और कल्याणपुर प्रखंडों में बन रहे प्रस्तावित कॉलेज स्थलों का दौरा किया। यह कोई सामान्य दौरा नहीं था, बल्कि एक विस्तृत और गहन निरीक्षण था जहां उन्होंने संचालन संबंधी तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की।
उनकी टीम ने उनके साथ हर एक पहलू को परखा, मानो वे खुद छात्र हों और इन कॉलेजों में पढ़ने आने वाले हों।
डीएम ने देखा कि क्या इमारतें तैयार हैं? फर्नीचर आ गया है या नहीं? छात्रों के बैठने की व्यवस्था कैसी है? लैब और लाइब्रेरी के लिए उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं? शिक्षकों की नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति की स्थिति क्या है, ताकि पढ़ाई में कोई रुकावट न आए? पीने के पानी से लेकर बिजली और साफ-सुथरे शौचालयों तक, हर मूलभूत सुविधा पर उनकी नजर थी। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि पढ़ाई का माहौल ऐसा हो, जहां छात्र बिना किसी चिंता के सिर्फ अपने भविष्य पर ध्यान दे सकें।
एक-एक बिंदु पर बारीकी से जांच; शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
निरीक्षण के दौरान, डीएम ने सिर्फ भवनों की दीवारें नहीं देखीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और संरचनात्मक मजबूती पर भी ध्यान दिया। फर्नीचर की उपलब्धता पर खास जोर दिया गया, क्योंकि आरामदायक पढ़ाई के लिए सही फर्नीचर बेहद जरूरी है।
उन्होंने आवश्यक उपस्करों की खरीद और आपूर्ति की प्रगति की भी जांच की, ताकि नए सत्र में कोई कमी न रह जाए। शिक्षकों की पदस्थापना या प्रतिनियुक्ति के बारे में अपर समाहर्ता, समस्तीपुर सह नोडल पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रेम शंकर झा व संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्यों से बिंदुवार जानकारी ली।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य शिक्षकों का होना सबसे महत्वपूर्ण है, और डीएम ने इस बात को गंभीरता से लिया।
खासकर, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और शौचालयों की व्यवस्था पर विशेष बल दिया गया। छात्राओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय एक अनिवार्य आवश्यकता है, और डीएम ने इसकी सुनिश्चितता के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
यह सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्थान बनाना है जहाँ हर छात्र बिना किसी हिचकिचाहट के आ सके और शिक्षा ग्रहण कर सके।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं: डीएम का कड़ा निर्देश
डीएम रोशन कुशवाहा ने साफ-साफ कहा कि सरकार की मंशा है कि उच्च शिक्षा हर छात्र की पहुंच में हो और इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से शेष कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया।
उनका कहना था कि इन महाविद्यालयों का नियमित संचालन तय समय पर शुरू होना चाहिए और इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं चलेगा।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे आपसी समन्वय स्थापित करें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करें। यह सिर्फ सरकारी आदेश नहीं, बल्कि एक प्रण है कि समस्तीपुर के छात्रों को अब गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए तरसना नहीं पड़ेगा।
इन कॉलेजों के खुलने से न सिर्फ छात्रों को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और जिले में शैक्षणिक माहौल बेहतर होगा। अब निगाहें इन कॉलेजों में शुरू होने वाले नए सत्र पर टिकी हैं, जब हजारों छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई का नया अध्याय शुरू करेंगे।


