पटना: बिहार की सियासी गलियों में आज एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का जलवा देखने को मिला। मौका था पार्टी के 30वें स्थापना दिवस का, जिसे पूरे बिहार में बड़े ही धूमधाम और जोश के साथ मनाया गया। सूबे के 38 जिलों में कार्यक्रम हुए, कार्यकर्ताओं ने लालटेन को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पार्टी कार्यालय गुलजार रहे। लेकिन इस जश्न के बीच एक दिलचस्प तस्वीर भी दिखी – पार्टी के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने जहां दिल्ली से ही बिहार की जनता और अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के नाम एक विस्तृत और मार्मिक संदेश जारी किया, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष और लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव यूरोप की सैर पर थे। उनकी गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी, जबकि लालू के संदेश ने एक बार फिर पार्टी के मूल सिद्धांतों और भविष्य की राह को स्पष्ट किया।
लालू प्रसाद यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने पार्टी के गौरवशाली अतीत, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य के लक्ष्यों का खाका खींचा। उन्होंने 5 जुलाई की तारीख को बिहार और देश की राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया, वह तारीख जब 1997 में RJD की नींव रखी गई थी।
पार्टी कार्यालय में तो एक जुलाई को ही तेजस्वी यादव की मौजूदगी में मुख्य कार्यक्रम हो गया था, लेकिन असली रौनक तो आज, यानी 5 जुलाई को थी, जब लालू यादव का संदेश पूरे बिहार में गूंजा। पटना में पार्टी मुख्यालय को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए AC-कूलर का इंतजाम किया गया था ताकि तपती गर्मी में भी उत्साह कम न हो। वरिष्ठ नेताओं ने लालू को प्रतीक के तौर पर लालटेन भेंट की, जबकि तेजस्वी को मखाने का हार पहनाकर सम्मान दिया गया था।
लालू यादव का जनता के नाम भावुक संदेश
अपने संदेश में, जिसे लालू यादव ने ‘बिहार की राजनीति का ऐतिहासिक दिन’ करार दिया, उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना के पीछे के उद्देश्यों को दोहराया। उन्होंने साफ कहा कि 5 जुलाई, 1997 को यह पार्टी सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि ‘गरीबों, शोषितों, दलितों, पिछड़ों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई’ लड़ने के लिए बनी थी।
यह तारीख बिहार और देश की राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाली थी, ऐसा लालू का मानना है।
कार्यकर्ताओं के त्याग और संघर्ष को नमन
लालू प्रसाद यादव ने पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं के ‘त्याग, संघर्ष और मेहनत’ को सलाम किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल का विस्तार इन्हीं निष्ठावान सिपाहियों की बदौलत हुआ है।
उन्होंने पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। यह बात उन्होंने ऐसे समय में कही है, जब पार्टी नए दौर की चुनौतियों का सामना कर रही है और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना बेहद जरूरी है।
विकास का RJD मॉडल: हवाई अड्डे नहीं, आम आदमी
अपने संदेश में, लालू यादव ने ‘विकास’ की एक नई परिभाषा पेश की। उन्होंने साफ किया कि RJD का विकास मॉडल केवल ‘चमकते हवाई अड्डों, मॉल और बड़े होटलों’ तक सीमित नहीं है।
उनका मानना है कि सच्चा विकास वह है जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो। लालू के शब्दों में, पार्टी ऐसे विकास में विश्वास करती है जो आम आदमी के जीवन में बदलाव लाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘मजदूरों, किसानों, कारीगरों और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही राजद का उद्देश्य है।’ यह एक तरह से वर्तमान सरकार के विकास मॉडल पर सीधा सवाल था, जहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अक्सर विकास का पर्याय बताया जाता है।
लोकतंत्र और संविधान पर गहरी चिंता
लालू यादव ने अपने संदेश में देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘देश में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और लोकतंत्र नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
’ यह एक गंभीर आरोप है जो अक्सर विपक्षी दल सरकार पर लगाते रहे हैं। लालू ने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
उन्होंने RJD को सिर्फ ‘चुनाव लड़ने वाली मशीन’ न बताकर, बल्कि ‘सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन’ कहा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच लगातार सक्रिय रहें और उनके मुद्दों को ‘संसद से लेकर सड़क तक’ उठाएं।
यह संदेश साफ करता है कि RJD अपने आपको केवल एक चुनावी पार्टी नहीं, बल्कि एक सामाजिक न्याय के प्रहरी के रूप में देखती है।
तेजस्वी की यूरोप यात्रा और सियासी घमासान
एक तरफ जहां लालू प्रसाद यादव अपने संदेश से कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है और ऐसे महत्वपूर्ण समय में तेजस्वी का विदेश जाना सत्तापक्ष को हमला करने का मौका दे गया।
सरकार के मंत्री लगातार तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने भी तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘जब सदन चलता है, तब तेजस्वी गायब रहते हैं।
’ इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
दरअसल, तेजस्वी यादव के विदेश दौरे पर जाने से पहले ही RJD ने मुख्य स्थापना दिवस समारोह 1 जुलाई को ही पार्टी कार्यालय में आयोजित कर लिया था, ताकि उनकी उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। उस दिन भी लालू यादव और तेजस्वी यादव दोनों ने कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया था और पार्टी के जश्न में शामिल हुए थे।
कुल मिलाकर, RJD का 30वां स्थापना दिवस पार्टी के लिए आत्मनिरीक्षण और आगे की रणनीति बनाने का अवसर लेकर आया। लालू यादव का संदेश, तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर सवाल और कार्यकर्ताओं का उत्साह — ये सब बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को बनाए रखने वाले पहलू हैं।
आने वाले समय में देखना होगा कि लालू के इन संदेशों का पार्टी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता पर कितना असर होता है और तेजस्वी यादव अपनी यूरोप यात्रा से लौटने के बाद इन राजनीतिक सवालों का कैसे जवाब देते हैं।




































