सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में बुधवार का दिन सदर अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। सुबह-सुबह अचानक जिले के मुखिया, यानी जिलाधिकारी रिची पांडे, अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। यह कोई सामान्य दौरा नहीं था, बल्कि एक ताबड़तोड़ एक्शन वाला इंस्पेक्शन था, जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलते ही कई सख्त फैसले लिए गए।
डीएम साहब ने अस्पताल के हर कोने का बारीकी से जायजा लिया, मरीजों से बात की और सुविधाओं की पड़ताल की। जो सामने आया, वो चिंताजनक था।
लापरवाही और अनुशासनहीनता के कई मामले सामने आने के बाद डीएम का पारा चढ़ गया। नतीजा ये हुआ कि एक ANM को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश दे दिया गया और तीन डॉक्टरों का वेतन रोक दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
अचानक पहुंचे डीएम; खुली लापरवाही की परतें
दरअसल, बुधवार सुबह जिलाधिकारी रिची पांडे बिना किसी पूर्व सूचना के सदर अस्पताल पहुंच गए। उनका मकसद था यह देखना कि मरीजों को वास्तव में कैसी सेवाएं मिल रही हैं।
उन्होंने OPD से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक, और वार्डों से लेकर दवा वितरण केंद्र तक, हर विभाग का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने कई मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद भी किया, ताकि ज़मीनी हकीकत का पता चल सके।
निरीक्षण के दौरान कई जगह काम में ढिलाई और कर्मियों की गैर-जिम्मेदारी सामने आई। ये सब कुछ इस कदर अव्यवस्थित था कि डीएम को तुरंत कड़े कदम उठाने पड़े।
एक ANM निलंबित, तीन डॉक्टरों का वेतन रोका गया
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले गाज गिरी ANM रितु कुमारी पर। उनके कार्य में घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता पाई गई।
जिलाधिकारी ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अस्पताल उपाधीक्षक को तुरंत उन्हें निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही सीधे तौर पर मरीजों की जान और स्वास्थ्य से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इतना ही नहीं, तीन डॉक्टरों की अनधिकृत अनुपस्थिति को भी जिलाधिकारी ने बेहद गंभीरता से लिया। डॉ.
निवेदिता, डॉ. रीता महतो और डॉ.
अनुजा प्रीतम बिना किसी सूचना के अपनी ड्यूटी से नदारद थीं। डीएम ने तत्काल प्रभाव से इन तीनों चिकित्सकों का वेतन रोकने का आदेश दिया।
साथ ही, संबंधित विभाग को इस मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन (रिपोर्ट) भेजने को भी कहा गया। डीएम ने जोर देकर कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी है, तभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिल पाएगी।
ये कड़ा कदम उन सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक सख्त संदेश है जो अपनी ड्यूटी को गंभीरता से नहीं लेते।
रोगी कल्याण समिति की बैठक और अहम फैसले
औचक निरीक्षण के बाद, जिलाधिकारी ने अस्पताल परिसर में ही रोगी कल्याण समिति की एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई और निर्देश जारी किए गए।
- संस्थागत प्रसव पर जोर: डीएम ने संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने और गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिले।
- नियमित जांच और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी: गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भधारण (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) की समय पर पहचान करने की समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि ऐसी महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचें: जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी गर्भवती महिलाओं का प्रथम त्रैमास (पहले तीन माह) में ही अल्ट्रासाउंड कराया जाए। साथ ही, गर्भावस्था से जुड़ी अन्य आवश्यक जांचों की संख्या भी बढ़ाई जाए। इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं को समय रहते पहचान कर उनका उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
CT स्कैन सेवा और दवा उपलब्धता पर भी नजर
बैठक के दौरान अस्पताल में चल रही सीटी स्कैन सेवा की भी गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित एजेंसी को साफ निर्देश दिए कि मरीजों की जांच समय पर की जाए और उनकी रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने चेताया कि जांच रिपोर्ट में अनावश्यक देरी से मरीजों के इलाज में बाधा आती है, इसलिए इस व्यवस्था में किसी भी तरह की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी डीएम गंभीर दिखे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं बिना किसी परेशानी के और समय पर मिलें।
दवाओं की कमी से मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
इमरजेंसी सेवाओं और कर्मचारियों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान
जिलाधिकारी रिची पांडे ने इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तुरंत और प्रभावी इलाज मिलना चाहिए।
इसके लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति और उनकी मुस्तैदी बेहद जरूरी है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि इमरजेंसी वार्ड में चौबीसों घंटे पर्याप्त स्टाफ और आवश्यक उपकरण उपलब्ध रहें।
डीएम के इस औचक निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि सीतामढ़ी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन गंभीर है और भविष्य में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है, ताकि मरीजों को उनका हक मिल सके और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेदारियों को समझें।


