पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) आज अपना 30वां स्थापना दिवस मना रहा है। सोचिए जरा, तीन दशक का सफर! पटना में पार्टी का दफ्तर इस वक्त किसी महोत्सव स्थल से कम नहीं लग रहा। चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियां, बड़े-बड़े पोस्टर और झंडे हवा में लहरा रहे हैं, जो दूर से ही बता रहे हैं कि यहां कोई बड़ा जश्न चल रहा है। ढोल-नगाड़ों की गूंज और कार्यकर्ताओं का शोर बता रहा है कि आज का दिन सिर्फ एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय के लिए भी खास है। इस मौके पर पार्टी के मुखिया लालू यादव, उनके बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ राबड़ी देवी और पार्टी के तमाम दिग्गज नेता यहां जुटे हैं।
पार्टी कार्यालय को इस तरह सजाया गया है जैसे किसी घर में कोई बड़ा उत्सव हो। अंदर और बाहर, हर जगह लालटेन (जो पार्टी का चुनाव चिह्न भी है) को रंगीन लाइटों से जगमग किया गया है।
कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए हर मुमकिन कोशिश की गई है। राजधानी की गर्मी को देखते हुए खास इंतजाम किए गए हैं, जिसमें 11 AC और 15 कूलर शामिल हैं ताकि कार्यक्रम में आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
ये दिखाता है कि पार्टी इस मौके को कितना गंभीर और भव्य बनाना चाहती है। बाहर लगे विशाल बैनरों पर लालू, राबड़ी और तेजस्वी की मुस्कुराती तस्वीरें हैं, मानो वे खुद इस जश्न में सबका स्वागत कर रहे हों।
उत्सव का माहौल और खास इंतजाम
राजद का 30वां स्थापना दिवस, पार्टी के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बीते तीन दशकों के संघर्ष, सफलता और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन का भी मौका है। सुबह से ही पार्टी दफ्तर में चहल-पहल शुरू हो चुकी थी।
पार्टी के छोटे-बड़े नेता, कार्यकर्ता, और समर्थक सभी इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने पहुंचे हैं। जहां एक तरफ लाउडस्पीकर पर पार्टी के गीत बज रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं।
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। मंच पर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की विशाल तस्वीरें लगाई गई हैं, जिसके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भी तस्वीरें मौजूद हैं।
यह मंच ही आज पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला है।
कंगन विवाद वाले सिंगर छोटू छलिया की मौजूदगी
इस बड़े जलसे में एक खास मेहमान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है, और उनका नाम है सिंगर छोटू छलिया। वही छोटू छलिया, जो कुछ वक्त पहले तब सुर्खियों में आए थे जब लालू यादव के जन्मदिन पर राबड़ी देवी ने उन्हें अपने कंगन बतौर तोहफा दिए थे।
छलिया ने तब उन कंगन को 'हीरे का' बताया था, जिसके बाद ये मामला खूब उछला और कई नेताओं ने इस पर सवाल उठाए थे। उनकी इस कार्यक्रम में मौजूदगी ने एक बार फिर पुराने विवाद को ताजा कर दिया है, लेकिन आज वे सिर्फ एक सिंगर नहीं, बल्कि एक मुखर टिप्पणीकार के तौर पर सामने आए हैं।
छोटू छलिया ने यहां पहुंचते ही बिहार की राजनीति और हालिया घटनाओं पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने हाल ही में हुए 'भरत एनकाउंटर' की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "जब भरत ने सरेंडर कर दिया तो गोली नहीं मारनी चाहिए थी।
" उनका ये बयान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसके साथ ही, उन्होंने बिहार में कथित तौर पर बढ़ते 'जातिवाद' पर भी अपनी चिंता जताई और एक गीत भी सुनाया, "नाही चाली तोहरो तानाशाहीया, जागल बा बिहरिया.
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"। यह बताता है कि आज के कार्यक्रम में सिर्फ जश्न ही नहीं, बल्कि ज्वलंत मुद्दों पर भी बात हो रही है।
छलिया का यह अंदाज, एक आम आदमी की जुबान में सियासी मुद्दों पर राय रखना, लोगों को काफी पसंद आ रहा है।
भोज का भी इंतजाम और आगे की रणनीति
पार्टी ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भोजन का भी प्रबंध किया है। यानी, पेट पूजा भी होगी और पार्टी की नई दिशा पर मंथन भी।
तेजस्वी यादव, जिनका बिहार की राजनीति में कद लगातार बढ़ रहा है, आज इसी मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करेंगे। उम्मीद है कि वे आगामी चुनावों और पार्टी की रणनीति को लेकर कुछ बड़े ऐलान कर सकते हैं।
पार्टी के अंदरखाने से आ रही खबरों की मानें तो आज का दिन सिर्फ स्थापना दिवस का जश्न नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की एक नई शुरुआत भी है। पार्टी के पुराने और नए दोनों तरह के नेताओं को एकजुट करने की कोशिश दिख रही है।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है, सबकी निगाहें मंच पर टिकी हैं। लालू यादव का आशीर्वाद, तेजस्वी यादव का विजन और कार्यकर्ताओं का उत्साह, सब मिलकर इस 30वें स्थापना दिवस को एक यादगार इवेंट बनाने में लगे हैं।
पटना का RJD दफ्तर आज बिहार की सियासत का केंद्र बिंदु बना हुआ है, जहां से आने वाले दिनों में कई बड़े संदेश निकलेंगे।

