पटना: राजधानी पटना से सटे पालीगंज अनुमंडल में मंगलवार की देर रात एक ऐसी वारदात हुई, जिसने लोगों को चौंका दिया। मध निषेध विभाग की एक टीम शराबियों को पकड़कर थाने लौट रही थी, तभी अख्तियारपुर पुल के पास घात लगाए अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। ये घटना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी, जहां सरकारी गाड़ी पर गोलियां बरसाई गईं, लेकिन गनीमत रही कि गाड़ी में सवार सभी जवान और अधिकारी बाल-बाल बच गए। गोली सीधे गाड़ी की खिड़की पर लगी, जिसने बताया कि हमलावरों का इरादा कितना खतरनाक था।
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये टीम रात के अंधेरे में कर क्या रही थी और हमला क्यों हुआ? दरअसल, बिहार में शराबबंदी लागू है और इसे सख्ती से लागू कराने की जिम्मेदारी मध निषेध विभाग की भी होती है। इसी क्रम में विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
ये घटना उसी कार्रवाई का एक सीधा परिणाम लगती है, जब शराब माफिया या उनसे जुड़े लोग कानून तोड़ने वालों को बचाने के लिए सीधे कानून के रखवालों से भिड़ गए।
मामला देर रात का है, जब पालीगंज अनुमंडल के आबकारी विभाग की टीम अपने रूटीन गश्त पर थी। उनका मकसद था उन इलाकों में छापेमारी करना जहां शराबबंदी कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
टीम ने महाराजगंज मुसहरी इलाके से कुछ शराबियों को पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद उन सभी को लेकर टीम वापस थाने लौट रही थी।
रात का सन्नाटा था और शायद टीम ने सोचा भी नहीं होगा कि आगे क्या होने वाला है।
छापेमारी से लौटते वक्त हमला
पालीगंज अनुमंडल के आबकारी विभाग के अधिकारी बैद्यनाथ यादव ने घटना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम इलाके के अलग-अलग मुसहरी इलाकों में शराबबंदी कानून के तहत अभियान चला रही थी।
इसी कड़ी में महाराजगंज मुसहरी से कुछ शराबियों को पकड़ा गया था। इन पकड़े गए लोगों को लेकर टीम वापस अपने ठिकाने पर लौट रही थी।
तभी अख्तियारपुर पुल के पास अचानक उनकी गाड़ी पर गोलीबारी शुरू हो गई। बैद्यनाथ यादव के मुताबिक, हमलावरों ने सीधे गाड़ी को निशाना बनाकर फायरिंग की।
यह तो किस्मत अच्छी थी कि किसी भी कर्मी को गोली नहीं लगी और सभी सुरक्षित बच निकले। यह हमला एक सुनियोजित तरीके से किया गया लग रहा था, क्योंकि हमलावर बिल्कुल सही जगह पर घात लगाकर बैठे थे।
घटना के चश्मदीदों में से एक होमगार्ड जवान प्रिंस कुमार भी उस गाड़ी में मौजूद थे। उन्होंने आंखों देखा हाल बताते हुए कहा, "हम सब लोग शराबियों को पकड़कर थाने ला रहे थे।
सब ठीकठाक चल रहा था, तभी अचानक हमारी गाड़ी पर गोलियां चलनी शुरू हो गईं। यह इतना अचानक हुआ कि संभलने का मौका भी नहीं मिला।
बस यही कह सकता हूं कि भगवान का शुक्र है कि हम सभी लोग सुरक्षित बच गए। गोली हमारी गाड़ी की खिड़की पर लगी, अगर थोड़ा भी इधर-उधर होता तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
" उनकी बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस वक्त माहौल कितना खौफनाक रहा होगा और टीम पर कितना दबाव आ गया होगा।
घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई
इस गोलीबारी की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। तुरंत ही स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के पालीगंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
फायरिंग करने वाले अज्ञात हमलावर मौके से फरार हो चुके थे। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और गाड़ी को हुए नुकसान का जायजा लिया।
गाड़ी पर गोली लगने के निशान साफ दिख रहे थे, जो इस बात का सबूत थे कि वाकई वहां फायरिंग हुई थी।
पालीगंज थाना प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, "देर रात अख्तियारपुर पुल के पास मध निषेध विभाग की टीम पर हमला हुआ था। हमारी टीम को सूचना मिली और तुरंत ही हम मौके पर पहुंचे।
लेकिन अपराधी अंधेरे का फायदा उठाकर पहले ही फरार हो चुके थे। गाड़ी के ऊपर एक गोली लगी है, जिससे साफ है कि यह गोलीबारी की ही घटना थी।
विभाग की तरफ से जैसे ही हमें इस संबंध में कोई लिखित शिकायत मिलती है, हम आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। फिलहाल, पुलिस घटनास्थल के आसपास की जानकारियां जुटाने और इन अज्ञात हमलावरों की पहचान करने के प्रयास में लगी हुई है।
पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि हमलावरों तक पहुंचा जा सके।" यह घटना बताती है कि बिहार में शराबबंदी को लागू कराना कितना चुनौतीपूर्ण काम है और इसमें ड्यूटी पर तैनात जवानों को किस तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है।

