औरंगाबाद: हर रोज़ की तरह बुधवार की शाम भी माली थाना क्षेत्र के भड़कुड़ियां गांव के रहने वाले 62 वर्षीय ललन पासवान अपनी गायों को चराकर घर लौटने की तैयारी में थे। आसमान में बादल घुमड़ रहे थे, और मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा था। हल्की-फुल्की फुहारों ने इशारा कर दिया था कि अब बारिश कभी भी तेज हो सकती है। आम तौर पर ऐसे मौसम में ललन जी तुरंत अपने मवेशियों को लेकर घर लौट आते थे, लेकिन उस शाम शायद प्रकृति के पास कुछ और ही लिखा था। अचानक तेज हुई बारिश से बचने के लिए उन्होंने पास के एक पेड़ का सहारा लिया। उन्हें क्या पता था कि यही सहारा उनके जीवन का आखिरी क्षण बन जाएगा। कुछ ही पलों में आसमान चीरती हुई आकाशीय बिजली गिरी और उनकी हंसती-खेलती ज़िंदगी पलक झपकते ही थम गई।
बुधवार की यह घटना पूरे औरंगाबाद जिले को हिला गई। ललन पासवान, जो अपने सरल और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे, अब बस एक दुखद याद बन गए हैं।
उनके परिवार के लिए यह वज्रपात सिर्फ बिजली का गिरना नहीं, बल्कि उनके जीवन पर टूटा दुखों का पहाड़ है। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसे थम चुकी थीं।
अब गांव में हर कोई बस यही बात कर रहा है कि कैसे एक पल में सब कुछ खत्म हो गया।
हादसे का पूरा ब्योरा
भड़कुड़ियां गांव, जहां ललन पासवान का घर है, एक शांत और ग्रामीण इलाका है। ललन जी का जीवन मवेशी चराने और खेती-बाड़ी में ही बीता था।
अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी वे पूरी तरह सक्रिय थे और अपने परिवार का सहारा बने हुए थे। बुधवार की शाम को जब वे अपनी गायों को चराकर लौट रहे थे, तो अचानक मौसम ने करवट ली।
काले बादलों ने पूरे आसमान को घेर लिया और झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बेमौसम बारिश से बचने के लिए, और शायद अपने मवेशियों को भी सुरक्षित रखने के लिए, ललन पासवान पास के एक घने पेड़ के नीचे जा खड़े हुए।
यह एक आम ग्रामीण दृश्य है जहां लोग बारिश या धूप से बचने के लिए पेड़ों की छांव तलाशते हैं। लेकिन इस बार यह निर्णय घातक साबित हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, बारिश तेज होने के ठीक बाद, एक भयानक गरज के साथ आकाशीय बिजली उस पेड़ पर गिरी जिसके नीचे ललन पासवान खड़े थे। बिजली इतनी तीव्र थी कि उन्हें संभलने का एक मौका भी नहीं मिला।
वे तुरंत गंभीर रूप से झुलस गए और जमीन पर गिर पड़े। आसपास के लोग जो बारिश थमने का इंतजार कर रहे थे, धमाके की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे।
उन्होंने देखा कि ललन पासवान अचेत पड़े हैं और उनके शरीर पर बिजली गिरने के निशान स्पष्ट दिख रहे हैं। बिना देरी किए, ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत उठाया और जितना जल्दी हो सके, औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंचाया।
लेकिन, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर गांव में आग की तरह फैली और देखते ही देखते अस्पताल परिसर में उनके परिजनों और गांव वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।
गांव में शोक और परिजनों का हाल
औरंगाबाद सदर अस्पताल के बाहर का मंजर बेहद हृदय विदारक था। ललन पासवान के परिवार के सदस्य, जिनमें उनकी पत्नी रीता देवी, भतीजे राजेंद्र पासवान, गणेश पासवान, प्रमोद पासवान, गुड्डू पासवान और दामाद श्रवण कुमार शामिल हैं, बिलख-बिलख कर रो रहे थे।
उनकी पत्नी रीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार बेहोश हो रही थीं, मानो नियति ने उनसे उनका सबसे बड़ा सहारा छीन लिया हो।
गांव के लोग भी गहरे सदमे में थे। ललन पासवान केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे गांव की एक जानी-मानी और सम्मानजनक हस्ती थे।
गांव के बुजुर्गों ने बताया, "ललन पासवान बेहद सरल, मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। वे कभी किसी के काम से पीछे नहीं हटते थे।
गांव में किसी के भी सुख-दुख में सबसे पहले खड़े रहने वालों में से एक थे।" उनकी छवि इतनी अच्छी थी कि उनकी असामयिक मौत ने पूरे भड़कुड़ियां गांव को शोक में डुबो दिया है।
लोग ललन जी के परिवार को ढांढस बंधाने और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह घाव इतना गहरा है कि भरना आसान नहीं होगा। गांव में हर तरफ बस एक ही सन्नाटा पसरा हुआ है, और हर आंख में आंसू हैं।
मुआवजे की मांग और आपदा प्रबंधन पर जोर
इस दुखद घटना पर नबीनगर के पूर्व विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है और प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि ललन पासवान के परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाली आपदा राहत सहायता तत्काल और शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि इस मुश्किल घड़ी में परिवार को कुछ आर्थिक संबल मिल सके।
ग्रामीणों ने भी इस अवसर पर लोगों से अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे खराब मौसम में, खासकर जब आकाश में बिजली कड़क रही हो, खेतों या खुले स्थानों में जाने से बचना चाहिए।
साथ ही, पेड़ों के नीचे शरण लेना भी जानलेवा साबित हो सकता है। लोगों को चाहिए कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियों का गंभीरता से पालन करें और खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरतें।
ललन पासवान की यह दुखद मौत एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना छोटा है और सावधानी ही बचाव का एकमात्र तरीका है।


