बाजार डेस्क: भैया, शेयर बाजार की अपनी ही चाल होती है। कभी उछाल ऐसी कि इन्वेस्टर्स के चेहरे खिल जाएं, तो कभी गिरावट ऐसी कि अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। ऐसा ही कुछ हुआ बीते 14 जुलाई को, जब बैंक निफ्टी इंडेक्स में अचानक से भारी गिरावट देखने को मिली। तीन दिन से जो बैंक निफ्टी जोश में दौड़ रहा था, उसकी चाल अचानक से थम गई। मामला कुछ ऐसा बिगड़ा कि एक ही दिन में इंडेक्स 1% से ज्यादा नीचे लुढ़क गया।
जो लोग सोच रहे थे कि अब तो बस बैंक निफ्टी रिकॉर्ड बना रहा है, उन्हें इस गिरावट ने तगड़ा झटका दिया। एक झटके में तीन दिन की सारी कमाई पर पानी फिर गया।
आखिर ऐसा क्या हो गया जो कल तक की रौनक आज गम में बदल गई? चलिए, पूरी कहानी को आसान भाषा में समझते हैं.
बैंक निफ्टी की गिरावट के पीछे की असली वजह क्या है?
अब आप सोचेंगे कि आखिर भारतीय बैंकों का इंडेक्स अचानक क्यों फिसल गया? इसकी वजह सिर्फ हमारी इकॉनमी नहीं, बल्कि दूर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टेंशन है। कहानी कुछ यूं है कि इन दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।
कच्चा तेल जैसे-जैसे महंगा होता है, दुनियाभर के बाजारों पर उसका असर दिखना शुरू हो जाता है, और हमारा बैंक निफ्टी भी इससे अछूता नहीं रहा।
आपको बता दें कि 14 जुलाई को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत कुछ देर के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर निकल गई थी। अगर आपको याद हो, तो 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का एक समझौता हुआ था।
उस समझौते के बाद से यह कच्चे तेल की सबसे ऊंची कीमत थी। यानी, शांति की उम्मीदों पर फिर से टेंशन का साया मंडराने लगा।
मामला यहीं नहीं रुका। खबरें आईं कि सोमवार को अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमला किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान पर फिर से कड़े हो गए हैं। उन्होंने ईरानी शिपिंग पर फिर से बैन लगा दिए हैं और तो और, होर्मुज जलडमरूमध्य (जो तेल के शिपमेंट के लिए एक बहुत अहम रास्ता है) की सुरक्षा के नाम पर 20% शुल्क लगाने का प्रपोजल भी दे दिया है।
अब सोचिए, जब कच्चा तेल महंगा होगा, तो हर चीज महंगी होगी, और इसका सीधा असर मार्केट पर पड़ेगा ही।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बैंकों से क्या कनेक्शन है?
अब आप कहेंगे कि तेल की कीमतों का बैंकों से क्या लेना-देना? दरअसल, कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है कि इकोनॉमी में उधार लेने की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर बॉन्ड यील्ड पर होता है, जो ऊपर जाती है।
वहीं, ट्रेजरी से होने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है। जब उधार महंगा होता है और मुनाफे की उम्मीदें कम होती हैं, तो जाहिर है बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बनता है।
बैंक वो कंपनियां हैं जो पैसे उधार देती हैं और लेती हैं, तो इन पर सीधा असर पड़ता है। जब बैंकों की बैलेंस शीट पर प्रेशर आता है, तो उनके शेयर भी नीचे आने लगते हैं।
इसी वजह से 14 जुलाई को बैंकिंग शेयरों में तगड़ी गिरावट देखी गई।
कौन से बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों को सबसे तगड़ा झटका लगा?
इस गिरावट में कई बड़े बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। अगर बात करें उन बैंकों की, जिन्होंने इस गिरावट में सबसे ज्यादा 'योगदान' दिया, तो इसमें केनरा बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का नाम सबसे ऊपर आता है।
केनरा बैंक के शेयर 2% तक नीचे आ गए, कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में 1.6% की गिरावट दर्ज की गई, वहीं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक 1.3% नीचे आ गया।
इनके अलावा, देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और फेडरल बैंक के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। सिर्फ बैंक ही नहीं, फाइनेंशियल सर्विस देने वाली कंपनियां भी इस चपेट में आईं।
श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व जैसी कंपनियों के शेयर भी 1 से 2% तक कमजोर होकर ट्रेड कर रहे थे। दोपहर 1.25 बजे के आसपास तो बैंक निफ्टी 1.15 फीसदी की गिरावट के साथ 57,475 के आसपास मंडरा रहा था।
मतलब, एक तरह से बाजार में टेंशन का माहौल बन गया था।
आगे बैंक निफ्टी का क्या हाल रह सकता है?
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आगे क्या? मार्केट एक्सपर्ट्स इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ, 58,700 का लेवल (जो जून का हाई था) अभी भी एक मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।
यानी, इस लेवल को तोड़ना बैंक निफ्टी के लिए एक चैलेंज है।
अगर इंडेक्स इस 58,700 के लेवल के ऊपर मजबूती से बंद हो जाता है, तो फिर समझो कि जो कंसोलिडेशन (एक दायरे में घूमना) चल रहा था, उससे ब्रेकआउट हो जाएगा। ऐसे में आने वाले हफ्तों में बैंक निफ्टी 59,300 और फिर 60,000 के लेवल तक रैली कर सकता है।
लेकिन, अगर बैंक निफ्टी 58,700 के ऊपर नहीं जा पाता है, तो इसका मतलब होगा कि पिछले 4 हफ्तों से जो कंसोलिडेशन चल रहा है, वो अभी और जारी रहेगा। मतलब, बाजार एक दायरे में ही घूमता रहेगा, ज्यादा बड़ी हलचल नहीं दिखेगी।
नीचे की तरफ देखें तो, 57,400-57,500 के लेवल को तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ये वो लेवल है जहां गुरुवार का गैप-अप जोन और सोमवार का निचला स्तर एक साथ आते हैं।
इसके बाद अगला अहम सपोर्ट 56,500 पर है, जो 20 हफ्ते और 50-हफ्ते के EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) और पिछले हफ्ते के निचले स्तर को मिलाकर बनता है। एक्सपर्ट्स इसे एक मजबूत डिमांड जोन मान रहे हैं, जहां से खरीदारी आने की उम्मीद है।
वहीं, LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का भी कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 57,500 पर तत्काल सपोर्ट मौजूद है। इसके नीचे 57,200 का लेवल भी एक अहम सपोर्ट का काम कर सकता है।
कुल मिलाकर, फिलहाल बैंक निफ्टी के लिए ऊपर चढ़ना एक चुनौती है, और नीचे गिरने पर कुछ अहम सपोर्ट लेवल्स हैं जो उसे थाम सकते हैं। इन्वेस्टर्स को इन लेवल्स पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि सही फैसले ले सकें।




































