अहमदाबाद: भारत में IIM अहमदाबाद का नाम सुनते ही दिमाग में चमक-धमक, बेहतरीन करियर और लाखों-करोड़ों के पैकेज की तस्वीर घूमने लगती है। ये वो संस्थान है जहां देश के सबसे होशियार दिमाग अपना भविष्य गढ़ने आते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इस चकाचौंध के पीछे, यहां पढ़ने वाले छात्रों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी होती होगी? उनके खर्चों का हिसाब-किताब कैसा रहता होगा?
इसी पर्दे के पीछे की कहानी को सामने लाए हैं IIM अहमदाबाद के एक छात्र विवेक कुंडू। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने महीने भर के बजट का पूरा लेखा-जोखा शेयर किया है, जिसके बाद से लोगों के होश उड़े हुए हैं।
विवेक ने बताया कि कैंपस में रहने और पढ़ाई करने के दौरान खाने-पीने, ट्रैवल और बाकी जरूरतों पर आखिर कितना पैसा खर्च हो जाता है। उनकी इस पोस्ट ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में पढ़ाई का 'असली खर्च' कितना होता है!
IIM अहमदाबाद में आखिर कैसे मैनेज होता है महीने का खर्च?
विवेक ने अपनी पोस्ट में साफ-साफ बताया कि उनकी कोशिश रहती है कि उनका मासिक खर्च 25 हजार रुपये के अंदर ही रहे। हालांकि, कभी-कभी कुछ महीनों में यह सीमा थोड़ी पार भी हो जाती है, लेकिन इस बार उन्होंने करीब 24 हजार रुपये में अपना पूरा बजट बढ़िया से मैनेज कर लिया।
उनकी यह पोस्ट इसलिए वायरल हो रही है क्योंकि इसमें किसी लग्जरी या फालतू के खर्चों का जिक्र नहीं है, बल्कि यह तो रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च है जो हर छात्र को करना पड़ता है।
आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी कौन-कौन सी चीजें हैं, जिन पर इतना पैसा खर्च हो जाता है? तो चलिए, विवेक के बजट के हिसाब से एक-एक करके सारी डीटेल्स समझते हैं।
खाने-पीने पर ही क्यों होता है सबसे ज्यादा खर्च?
विवेक के बजट में अगर कोई सबसे बड़ा 'खर्चीला आइटम' है, तो वो है खाना। उन्होंने बताया कि हर महीने करीब 14 हजार रुपये सिर्फ भोजन पर खर्च हो जाते हैं।
अब आप सोचिए, यह खर्च मैथ्स या इकोनॉमिक्स की किताबों पर नहीं, बल्कि पेट भरने पर होता है। यह रकम शायद मेस या हॉस्टल कैंटीन के खाने-पीने की होगी, जो छात्रों के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे अपनी पढ़ाई पर फोकस कर सकें।
इसके अलावा, करीब 3,500 रुपये Swiggy जैसे ऑनलाइन फूड ऑर्डर और DMart से खरीदारी में जाते हैं। इसमें सिर्फ बाहर का खाना ही नहीं, बल्कि किराने का सामान, घर की छोटी-मोटी जरूरतें और कभी-कभार कुछ पर्सनल चीजें भी शामिल होती हैं।
अब बिजी शेड्यूल में छात्र हमेशा मार्केट नहीं जा सकते, ऐसे में ऑनलाइन डिलीवरी और स्टोर्स काफी काम आते हैं। कुल मिलाकर, खाने-पीने का हिसाब-किताब ही करीब 17,500 रुपये तक पहुंच जाता है, जो वाकई एक बड़ी रकम है!
छोटे-छोटे खर्चे, बड़ा बजट – क्या है पूरा गणित?
खाने-पीने के बाद बाकी के खर्चे अलग-अलग चीजों में बंट जाते हैं, जो मिलकर एक बड़ा बजट बनाते हैं। विवेक के अनुसार, इन खर्चों का ब्रेकडाउन कुछ इस तरह है:
- करीब 2,000 रुपये सोशल एक्टिविटीज पर खर्च होते हैं। एक बिजनेस स्कूल में नेटवर्किंग और सहपाठियों के साथ मेलजोल बहुत जरूरी होता है। ये सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि करियर के लिए भी एक तरह का इन्वेस्टमेंट माना जाता है।
- 1,000 रुपये ट्रांसपोर्ट पर जाते हैं। IIM अहमदाबाद का कैंपस बहुत बड़ा है, और कभी-कभी कैंपस के बाहर भी आना-जाना पड़ जाता है। ऐसे में लोकल ट्रैवल या राइड-शेयरिंग पर ये पैसे खर्च हो जाते हैं।
- 1,000 रुपये हेयरकट और ग्रूमिंग पर खर्च होते हैं। बड़े कॉर्पोरेट्स में प्लेसमेंट के लिए अपीयरेंस भी उतनी ही मायने रखती है, जितनी आपकी स्किल्स। इसलिए छात्रों को अपनी ग्रूमिंग पर भी ध्यान देना पड़ता है।
- 1,000 रुपये दवाइयों और अन्य जरूरतों पर खर्च होते हैं। पढ़ाई के दौरान तबीयत खराब होना या अचानक किसी जरूरी सामान की जरूरत पड़ जाना आम बात है। ये पैसे ऐसी इमरजेंसी के लिए होते हैं।
- 500-500 रुपये स्टेशनरी, स्पोर्ट्स एक्टिविटी और सब्सक्रिप्शन पर खर्च होते हैं। स्टेशनरी यानी नोटबुक, पेन, प्रिंटआउट वगैरह। स्पोर्ट्स एक्टिविटी का मतलब तनाव कम करना और फिजिकली फिट रहना। और सब्सक्रिप्शन में शायद कोई ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म, ओटीटी या कोई न्यूज सर्विस शामिल हो सकती है।
इन सभी छोटे-छोटे खर्चों को जब आप जोड़ते हैं, तो विवेक का मासिक बजट करीब 24 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। यह रकम सिर्फ फीस के ऊपर की है!
क्या मिडिल क्लास छात्रों के लिए IIM की पढ़ाई बहुत महंगी है?
विवेक की पोस्ट वायरल होने के बाद, कई लोगों ने IIM अहमदाबाद की कुल लागत को लेकर गणित लगाना शुरू कर दिया। एक सोशल मीडिया यूजर ने तो सवाल ही उठा दिया कि अगर 24 हजार रुपये महीने का खर्च 24 महीनों तक जोड़ा जाए (जो IIM का दो साल का कोर्स होता है), तो फीस के अलावा करीब 5.76 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
ऐसे में सवाल ये है कि क्या इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट एक मिडिल क्लास छात्र या परिवार के लिए सही फैसला है?
यह सवाल वाजिब भी है। अक्सर लोग IIM की भारी फीस तो जानते हैं, लेकिन ये रोजमर्रा के खर्चे कई बार नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जो लंबी अवधि में एक बहुत बड़ी रकम बन जाते हैं।
क्या लाखों का लोन लेकर इतनी बड़ी पढ़ाई करना, फिर इतने रोजमर्रा के खर्च मैनेज करना, हर किसी के बस की बात है?
विवेक ने बताया – खर्च कम किया जा सकता है!
लोगों के इन सवालों पर विवेक कुंडू ने भी अपनी राय दी। उन्होंने बताया कि उनका बताया गया खर्च एक 'महंगे महीने' का उदाहरण था, यानी उस महीने शायद कुछ ज्यादा ही खर्च हो गया होगा।
उनका कहना है कि बेहतर प्लानिंग और समझदारी से इन खर्चों को कम भी किया जा सकता है। जैसे, बाहर का खाना कम कर देना, कैंपस की सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना और फालतू के खर्चों से बचना।
कुल मिलाकर, विवेक की इस पोस्ट ने IIM जैसे टॉप संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की जिंदगी का एक नया पहलू सामने रखा है। यह बताता है कि सिर्फ दाखिला मिलना या बड़ी फीस देना ही काफी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खर्चों को मैनेज करना भी एक बड़ा चैलेंज होता है।
लेकिन फिर भी, ये अनुभव और यहां से मिलने वाला भविष्य, इस इन्वेस्टमेंट को कई छात्रों के लिए सफल बना देता है।






































