धाराशिव: सोचिए, हर सुबह जिस दूध को आप अमृत समझकर पी रहे हैं, या अपने बच्चों को पिला रहे हैं, वो असल में जहर हो! जी हां, महाराष्ट्र के धाराशिव जिले से एक ऐसी ही चौकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। यहां दूध में इतनी बड़ी मिलावट पकड़ी गई है कि आंकड़े सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। एजेंसियों को शक है कि पिछले छह महीनों में करोड़ों लीटर नकली दूध लोगों को बेचा गया है।
यह पूरा खेल भूम तहसील में एक दूध मिलावट रैकेट के पर्दाफाश होने के बाद सामने आया। पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की संयुक्त टीम ने जब इस मामले की तह तक जाना शुरू किया, तो पता चला कि ये तो गोरखधंधे का एक पूरा साम्राज्य था।
ये सिर्फ छोटे-मोटे मिलावटखोर नहीं थे, बल्कि पूरे सिस्टम को धता बताकर जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे थे।
जांच अधिकारियों ने आरोपियों के पास से जो बिक्री रजिस्टर जब्त किए, उन्हें देखकर तो उनकी भी आंखें फटी रह गईं। इन रजिस्टरों से खुलासा हुआ कि पिछले सिर्फ छह महीनों में लगभग 2,30,470 किलोग्राम घटिया क्वालिटी का मिल्क पाउडर इस्तेमाल करके करीब 23.04 लाख लीटर नकली यानी सिंथेटिक दूध तैयार किया गया।
आप अंदाजा लगाइए, इतनी बड़ी मात्रा में दूध बनाया गया और उसकी अनुमानित कीमत 9.22 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह तो सिर्फ एक आंकड़ा है, असल खेल इससे कहीं बड़ा होने का शक है।
आखिर यह नकली दूध बनता कैसे था और इसमें क्या मिलाया जाता था?
अब आप सोच रहे होंगे कि इतना सारा दूध आखिर बनता कैसे था? जांच में जो सामने आया है, वो और भी ज्यादा भयावह है। ये मिलावटखोर हर 100 लीटर शुद्ध दूध में लगभग 10 लीटर नकली (सिंथेटिक) दूध मिला देते थे।
यानी, सीधे-सीधे 10 प्रतिशत की मिलावट! अगर अधिकारियों की मानें, तो भूम के दूध संग्रह केंद्रों से इसी तरीके से महाराष्ट्र के कई इलाकों में 2.3 करोड़ लीटर से भी ज्यादा मिलावटी दूध सप्लाई किया गया हो सकता है। अब आप खुद सोचिए, 2.3 करोड़ लीटर! इतनी बड़ी मात्रा में लोगों ने नकली दूध पिया होगा।
इस नकली दूध को असली जैसा दिखाने के लिए, और उसमें दूध जैसी ‘फैट’ (वसा) की मात्रा बनाए रखने के लिए, आरोपी कुछ बेहद ही खतरनाक चीजों का इस्तेमाल करते थे। इसमें डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल और घटिया क्वालिटी के रासायनिक पाउडर शामिल थे।
ये वो चीजें हैं, जिनका खाने-पीने की किसी भी चीज में इस्तेमाल करना जानलेवा हो सकता है। लेकिन इन लोगों को सिर्फ अपने फायदे से मतलब था, लोगों की जान से नहीं।
इस जानलेवा खेल में कौन-कौन शामिल हैं और पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस ने इस पूरे मामले में कुल सात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। लेकिन यहां एक बड़ी 'टेंशन' वाली बात यह है कि एफआईआर दर्ज हुए आठ दिन बीत चुके हैं, और सभी आरोपी अब तक फरार हैं।
ये सुनकर आम आदमी के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतने बड़े रैकेट के आरोपी इतनी आसानी से कैसे फरार हो गए और अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?
पुलिस भी हरकत में है। उनकी तरफ से बताया गया है कि आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस इंस्पेक्टर की निगरानी में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई गई है।
यह एसआईटी लगातार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। उम्मीद यही की जा रही है कि जल्द ही ये सभी गुनहगार कानून के शिकंजे में होंगे।
इस नकली दूध का हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है?
अब बात करते हैं सबसे गंभीर पहलू की— हमारी और आपके परिवार की सेहत की। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि डिटर्जेंट, पाम ऑयल और खतरनाक रसायनों से बना यह मिलावटी दूध अगर लंबे समय तक पिया जाए, तो यह लिवर (यकृत), किडनी (गुर्दे) और पाचन तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। ये शरीर के वो अंग हैं, जिनके बिना जिंदगी की कल्पना करना भी मुश्किल है।
इस जानलेवा मिलावटी दूध का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को होता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, और ऐसे में यह नकली दूध उनकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है।
सोचिए, एक मासूम बच्चा जिसे हम ताकतवर बनाने के लिए दूध पिलाते हैं, उसे अगर यही जहर मिल जाए तो उसका क्या होगा?
क्या कहते हैं कानून के जानकार?
कानून भी इस तरह के संगीन अपराधों को लेकर बहुत सख्त है। खाद्य सुरक्षा और मानक कानून के तहत, खाने-पीने की चीजों में इस तरह की खतरनाक मिलावट करने पर दोषियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
इतना ही नहीं, उन पर 10 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि क्या फरार आरोपी पकड़े जाते हैं और उन्हें उनके किए की पूरी सजा मिलती है, ताकि भविष्य में कोई और इतनी हिम्मत न कर सके कि जनता की सेहत से खिलवाड़ करे।



































