नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, यानी CBSE की दूसरी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने में हो रही देरी ने 10वीं के लाखों बच्चों की सांसे थाम रखी हैं। 15 से 21 मई के बीच हुए इन इम्तिहानों को खत्म हुए 50 दिन से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन नतीजों का दूर-दूर तक अता-पता नहीं। सोचिए, जिन बच्चों ने अपने नंबर सुधारने या कंपार्टमेंट क्लियर करने के लिए फिर से जान लगाई, उनका क्या हाल होगा? हर सुबह अखबार और इंटरनेट पर रिजल्ट की खबर ढूंढते-ढूंढते उनका सब्र अब जवाब दे रहा है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि रिजल्ट इसी हफ्ते जारी हो सकते हैं। लेकिन, बोर्ड की तरफ से कोई ऑफिशियल ऐलान अभी तक नहीं आया है, जिसने छात्रों की बेचैनी और बढ़ा दी है।
आपको बता दें कि इस साल 10वीं क्लास की दूसरी बोर्ड परीक्षा में कुल 6,68,854 बच्चों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। ये कोई छोटे-मोटे आंकड़े नहीं हैं, बल्कि लगभग पौने सात लाख जिंदगी दांव पर लगी हैं।
इनमें से 5,25,655 कैंडिडेट्स तो ऐसे थे, जिन्होंने अपने पहले एग्जाम के स्कोर को बेहतर करने की उम्मीद में दोबारा परीक्षा दी। वहीं, 85,285 छात्र ऐसे भी थे, जिन्हें पहले एग्जाम में कंपार्टमेंट मिला था और वे इसे क्लियर करने की जद्दोजहद में जुटे थे।
अब इन सभी छात्रों की उम्मीदें रिजल्ट पर टिकी हैं, जो अभी तक एक रहस्य बना हुआ है।
आखिर रिजल्ट में देरी की असली वजह क्या है?
अगर आपको याद हो, तो CBSE ने 10वीं क्लास के मेन बोर्ड एग्जाम 17 फरवरी से 11 मार्च, 2026 के बीच करवाए थे। इन इम्तिहानों के नतीजे 15 अप्रैल, 2026 को बड़ी जल्दी घोषित कर दिए गए थे।
बच्चों को अपने मार्क्स सुधारने का एक और मौका मिले, इसी सोच के साथ बोर्ड ने मई 2026 में दूसरा CBSE 10वीं एग्जाम करवाया। ये परीक्षाएँ 15 से 21 मई, 2026 तक चलीं।
अब जबकि दूसरी परीक्षा खत्म हुए एक महीने से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है, रिजल्ट का न आना वाकई चिंता की बात है। बोर्ड ने इस देरी का कोई ऑफिशियल कारण नहीं बताया है, लेकिन रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
मीडिया में चल रही खबरों की मानें, तो इस देरी के पीछे CBSE की 'दो-एग्जाम पॉलिसी' का शुरुआती साल होना है। क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या है? दरअसल, बोर्ड ने इस साल से एक नई व्यवस्था शुरू की है, जिसमें छात्रों के फाइनल रिजल्ट के लिए दोनों परीक्षाओं में से 'बेस्ट ऑफ टू' स्कोर को गिना जाएगा।
यानी, जिस परीक्षा में छात्र के नंबर बेहतर आए होंगे, वही उसके मार्कशीट में चढ़ेंगे। अब इस 'बेस्ट ऑफ टू' स्कोर को इवैल्यूएट करने, सारे नंबरों को इकट्ठा करने और फिर सही कैलकुलेशन करने के लिए बोर्ड ने एक नया एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस लागू किया है।
ये नया सिस्टम अभी शुरुआती फेज में है और इसी वजह से रिजल्ट निकालने में तय से ज्यादा समय लग रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस नई जटिल प्रक्रिया को समझने और लागू करने में समय लग रहा है, जिससे देरी हो रही है।
कौन-कौन दे सकता था दूसरी बोर्ड परीक्षा?
ये एक बड़ा सवाल है कि दूसरी बोर्ड परीक्षा में कौन से छात्र शामिल हो सकते थे? बोर्ड ने इस परीक्षा के लिए दो मुख्य कैटेगरीज तय की थीं, ताकि हर जरूरतमंद छात्र को मौका मिल सके:
- इम्प्रूवमेंट श्रेणी में: वे छात्र जो पहली बोर्ड परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन अपने अंकों से खुश नहीं थे। उन्हें अपने स्कोर सुधारने का एक और मौका मिला। वे तीन मुख्य विषयों — साइंस, मैथमेटिक्स, सोशल साइंस और लैंग्वेज (भाषा) — में से किसी में भी दोबारा परीक्षा दे सकते थे। सोचिए, कितना अच्छा मौका है अपने रिजल्ट को बेहतर बनाने का!
- कंपार्टमेंट कैटेगरी में: ऐसे स्टूडेंट्स जिन्हें पहली परीक्षा में कंपार्टमेंट मिला था, यानी वे एक या दो विषयों में पास नहीं हो पाए थे। उन्हें उन विषयों में फिर से परीक्षा देने का मौका दिया गया, ताकि वे अगली कक्षा में जा सकें। ये उन छात्रों के लिए संजीवनी बूटी जैसा था, जो एक-दो सब्जेक्ट की वजह से अटक जाते।
तो कुल मिलाकर, यह नई पॉलिसी बच्चों के हित में तो है, लेकिन इसका नया सिस्टम अभी अपनी रफ्तार पकड़ रहा है। छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब बोर्ड के अगले ऐलान पर टिकी हैं।
क्या वाकई इसी हफ्ते नतीजे आएंगे या इंतजार और लंबा खिंचेगा? ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, सभी को धैर्य रखने और आधिकारिक अपडेट्स का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।





































