मुंबई: आज शेयर बाजार में वो हुआ जिसकी उम्मीद शायद कम ही लोगों ने की होगी। हफ्ते की एक्सपायरी के दिन भारतीय बाजार में एकदम से भयंकर गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 150 अंक लुढ़ककर 24100 के नीचे खिसक गया, वहीं बैंक निफ्टी तो पूछो ही मत, करीब 750 पॉइंट्स टूट गया और अपने कल के निचले स्तर को भी तोड़ दिया। मानो किसी ने तेजी से भागती ट्रेन में अचानक से 'ब्रेक' लगा दिया हो।
इस गिरावट का एक बड़ा कारण बना कच्चा तेल और हमारे रुपये की लगातार कमजोर होती चाल। वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की वजह से कच्चे तेल के दाम एक बार फिर आसमान छू गए हैं, 86 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गए।
इसका सीधा असर हमारी तेल कंपनियों पर पड़ा, और देखते ही देखते BPCL, IOC, HPCL के शेयर 2-3 परसेंट तक फिसल गए। सोचिए, एक तरफ कच्चा तेल महंगा हो रहा है और दूसरी तरफ रुपया कमजोर, ये तो 'डबल मार' वाली बात हो गई!
रुपये की हालत भी पिछले कुछ दिनों से पतली हुई है। आज ही रुपया 56 पैसे कमजोर हुआ और पिछले दो दिनों में ये एक परसेंट से भी ज्यादा टूट चुका है, अब 96 रुपये प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है।
रुपये की कमजोरी का मतलब है, हमें आयात करने के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे, जिससे महंगाई बढ़ने का डर हमेशा बना रहता है। ये सब मिलकर बाजार की टेंशन को कई गुना बढ़ा रहे हैं, क्योंकि ग्लोबल संकेतों का सीधा असर हमारे डोमेस्टिक मार्केट पर पड़ता है।
आखिर बाजार क्यों डगमगाया और ये कच्चा तेल क्या खेल कर रहा है?
बाजार में इस अचानक आई गिरावट के पीछे कुछ साफ-साफ वजहें थीं। सबसे पहले तो वेस्ट एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक हालात ने कच्चे तेल की कीमतों को पंख लगा दिए।
जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत जैसे देश जो अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, उनकी जेब पर भारी बोझ पड़ता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है, महंगाई का प्रेशर बढ़ता है और अंततः ब्याज दरें बढ़ने की आशंका भी पैदा होती है, जो इकोनॉमी और शेयर बाजार दोनों के लिए ठीक नहीं है।
वहीं, रुपये की कमजोरी ने आग में घी का काम किया है। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना मतलब हमें हर चीज के लिए ज्यादा भुगतान करना, चाहे वो कच्चा तेल हो या कोई और सामान।
इसका असर सीधे-सीधे विदेशी निवेशकों (FIIs) के सेंटिमेंट पर भी पड़ता है। उन्हें लगता है कि उनकी कमाई का मूल्य घट रहा है, तो वे पैसा निकालने लगते हैं, जिससे बाजार और गिरता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी आज जमकर बिकवाली देखने को मिली। एडवांस-डिक्लाइन रेशियो (ADV/DEC) 1:2.5 के करीब था, जिसका मतलब है कि गिरने वाले शेयरों की संख्या चढ़ने वाले शेयरों से ढाई गुना ज्यादा थी।
हालांकि, एक राहत की बात ये रही कि वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में कोई बड़ा उछाल नहीं आया, जो ये दिखाता है कि बाजार में घबराहट तो है, लेकिन पैनिक अभी दूर है।
आज कौन से सेक्टर पिटे और कौन संभले, स्टॉक स्पेसिफिक क्या रहा?
बाजार में जब गिरावट आती है, तो कुछ सेक्टर ज्यादा पिटते हैं और कुछ खुद को संभाल ले जाते हैं। आज सबसे ज्यादा मार रियल्टी और सरकारी बैंकों पर पड़ी।
ये दोनों सेक्टर इंडेक्स लगभग 2 फीसदी फिसल गए। इसके अलावा, ऑटो, डिफेंस और NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों) में भी दबाव साफ दिख रहा था।
इनके शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
अगर हम कुछ खास शेयरों की बात करें तो, LTF (लार्सन एंड टुब्रो फाइनेंस होल्डिंग्स) और श्रीराम फाइनेंस जैसे शेयर करीब 4 परसेंट की गिरावट के साथ वायदा बाजार के टॉप लूजर्स में शामिल हो गए। वहीं, नतीजों के बाद HCL टेक के शेयर में जमकर मुनाफावसूली हुई।
यह शेयर करीब 4 परसेंट से ज्यादा फिसलकर निफ्टी का टॉप लूजर बना, जिसने निफ्टी को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई।
लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरा बाजार ही लाल निशान में था। कुछ सेक्टर थे, जिन्होंने खुद को संभाला या फिर तेजी दिखाई।
फार्मा और मेटल शेयरों में आज ठीक-ठाक खरीदारी देखने को मिली, जो इस मुश्किल माहौल में थोड़ी राहत की बात थी। फार्मा सेक्टर को अक्सर डिफेंसिव माना जाता है, यानी जब बाजार गिरता है तो लोग इसमें पैसा लगाते हैं।
वहीं, Concor (कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के लिए आज का दिन शानदार रहा। अच्छे बिजनेस अपडेट्स के दम पर यह शेयर करीब 5 परसेंट उछला, जो इस माहौल में एक पॉजिटिव खबर थी और निवेशकों के लिए थोड़ी खुशी लेकर आई।
तो अब एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं - क्या घबराने की बात है?
बाजार की इस उठापटक के बीच निवेशकों के मन में एक ही सवाल है कि अब क्या करें? सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने बाजार पर बात करते हुए एक अहम बात कही। उन्होंने बताया कि बाजार में गिरावट जरूर है, लेकिन यह 'सधी हुई' है।
उनका कहना है कि अगर यही स्थिति मार्च या अप्रैल के महीने में हुई होती, तो निफ्टी कम से कम 400 प्वाइंट तक गिर जाता। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जो एक पॉजिटिव संकेत है।
सिंघल के मुताबिक, बाजार में अब डर का फैक्टर उस तरह से हावी नहीं है। निवेशकों की सोच है कि वेस्ट एशिया का यह मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा और स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एक 'रिस्क फैक्टर' जरूर खुल गया है, खासकर बैंक निफ्टी की हालिया रैली पर। उनका मानना है कि बैंक निफ्टी काफी चल चुका है और अगर यह 20 DEMA (डेली एक्सपोनेनशियल मूविंग एवरेज) के स्तर को तोड़ता है, तो करेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है।
तो कुल मिलाकर, घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए - अनुज सिंघल की खास सलाह?
ऐसे बाजार में जब अनिश्चितता थोड़ी बढ़ जाती है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। अनुज सिंघल ने साफ-साफ सलाह दी है कि इस समय बाजार में पोजीशनल ट्रेड्स से बचें।
पोजीशनल ट्रेड का मतलब होता है, कोई शेयर या इंडेक्स खरीदकर कुछ दिनों या हफ्तों के लिए होल्ड करना। सिंघल का कहना है कि अभी ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
उनकी सलाह है कि कुछ समय के लिए इंडेक्स में इंट्रा-डे ट्रेडिंग पर ही फोकस करें। इंट्रा-डे का मतलब है, एक ही दिन में शेयर खरीदकर उसी दिन बेच देना, ताकि आप अगले दिन के ग्लोबल या घरेलू अनिश्चितता से बच सकें।
अगर आपको कोई पोजीशन कैरी करनी भी है, यानी एक दिन से ज्यादा के लिए रखनी है, तो हेज के साथ ही करें। हेजिंग एक ऐसी रणनीति है, जिससे आप अपने संभावित नुकसान को कम कर सकते हैं।
उन्होंने निफ्टी और बैंक निफ्टी के लिए कुछ अहम स्तर भी बताए हैं। निफ्टी के लिए 23,950-24,000 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि 24,150-24,200 पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।
वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,500-57,700 पर रेजिस्टेंस का स्तर बताया गया है। इन स्तरों पर ध्यान देकर ही अपनी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी बनाएं, क्योंकि बाजार में अभी थोड़ी सावधानी और समझदारी की जरूरत है।




































