देश भर में: भयंकर गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है, जो उनके चेहरे पर राहत तो लाएगी, लेकिन साथ ही थोड़ी टेंशन भी. मौसम विभाग ने पूरे देश के लिए जो चेतावनी जारी की है, वो सुनकर आप अपनी छतरी और रेनकोट तैयार कर लेंगे और बाहर निकलने से पहले एक बार ज़रूर सोचेंगे. जी हां, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों समेत देश के करीब 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले कुछ दिनों में आसमान से आफत बरसने वाली है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ-साफ कह दिया है कि कहीं मूसलाधार बारिश का अलर्ट है, तो कहीं तेज आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. तो क्या आप इस मॉनसून के नए मिजाज के लिए तैयार हैं?
दरअसल, पूरा मामला ये है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ कई चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ लाइन एक्टिव हो गई हैं. ये वो सिस्टम होते हैं जो मौसम का मिजाज तय करते हैं और इस बार ये मिलकर ऐसा माहौल बना रहे हैं कि अगले कुछ दिनों तक मौसम काफी सख्त रहने वाला है.
ये सिस्टम सिर्फ हल्की-फुल्की फुहारें नहीं लाएंगे, बल्कि अपने साथ भारी बारिश और तेज हवाएं भी ला सकते हैं. तो आखिर कौन-कौन से सिस्टम एक्टिव हैं और इसका असर कहां-कहां दिखने वाला है? आइए जानते हैं.
कौन से हैं वो सिस्टम जो मौसम बिगाड़ रहे हैं?
मौसम विभाग के एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस समय कई वेदर सिस्टम एक साथ काम कर रहे हैं, जिनकी वजह से मानसून ने एक बार फिर पूरी रफ्तार पकड़ ली है और देश के बड़े हिस्से को कवर कर रहा है. सबसे पहले बात करते हैं मानसून ट्रफ की.
ये इस वक्त जम्मू से होते हुए देहरादून, बाराबंकी, पटना, बांकुरा और कैनिंग तक पहुंच रही है. यहां से ये ट्रफ दक्षिण-पूर्व दिशा में बंगाल की खाड़ी के पूर्वी-मध्य हिस्से की तरफ बढ़ रही है.
इसका सीधा मतलब है कि यह अपने रास्ते में आने वाले सभी इलाकों में अच्छी खासी बारिश लाने में सक्षम है.
इसके साथ ही, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उसके आस-पास के इलाकों में एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बन गया है. ये सिस्टम दक्षिण बांग्लादेश तक फैला हुआ है और समुद्र तल से करीब 7.6 किलोमीटर ऊपर तक मौजूद है.
इसकी खास बात ये है कि ये ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर झुका हुआ है. इसी के असर से अगले 24 घंटों के भीतर उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश के तटीय इलाकों में एक कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बनने की उम्मीद है.
ये लो-प्रेशर एरिया अक्सर तेज बारिश, समुद्री हलचल और तूफानी हवाओं का कारण बनता है, जिससे तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ जाती है.
सिर्फ यहीं नहीं, उत्तरी गुजरात और उसके सटे दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर भी समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर एक और चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. यानी एक नहीं, कई मोर्चों पर मौसम बदलने की तैयारी है, और हर सिस्टम का अपना अलग प्रभाव क्षेत्र है.
इसके अलावा, एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू के सटे इलाकों के ऊपर 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में देखा जा रहा है. यह विक्षोभ आमतौर पर उत्तरी भारत के मौसम को प्रभावित करता है.
और तो और, दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के इलाके में भी 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक और चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है. कुल मिलाकर, मौसम के मोर्चे पर कई मोर्चे खुल गए हैं, जो देश के बड़े हिस्से को कवर करने वाले हैं!
उत्तर-पश्चिमी भारत में कैसा रहेगा मौसम का हाल?
अब बात करते हैं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब की. इन इलाकों में 14 से 18 जुलाई के बीच कुछ जगहों पर या रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है, जो लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत तो देगी.
लेकिन असली खेल तो 19 और 20 जुलाई को शुरू होगा, जब यहां काफी बड़े पैमाने पर बारिश देखने को मिलेगी, जिसे मौसम विभाग ‘देशव्यापी बारिश’ कह रहा है. खास तौर पर 19-20 जुलाई को दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.
तो इन दिनों घर से बाहर निकलने से पहले मौसम का हाल ज़रूर जान लें और अगर ज़रूरी न हो तो घर पर ही रहने की कोशिश करें.
उत्तर प्रदेश की बात करें तो, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 से 20 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश का अनुमान है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 से 17 जुलाई तक ऐसी ही स्थिति रहेगी. हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए 18 से 20 जुलाई के दौरान व्यापक स्तर पर बारिश होने की भविष्यवाणी की गई है, जो खेती और जलस्तर के लिए अच्छी खबर हो सकती है लेकिन शहरी इलाकों में जलजमाव का कारण भी बन सकती है.
इतना ही नहीं, पूर्वी यूपी में 14 जुलाई को बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है, यानी आसमानी बिजली से सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि ये काफी खतरनाक हो सकती है.
इसके अलावा, 17 से 20 जुलाई के दौरान पूर्वी यूपी और 19-20 जुलाई को पश्चिमी यूपी में भारी बारिश की संभावना है. अगर आप इन इलाकों में रहते हैं तो अपनी यात्राएं और बाहरी काम सावधानी से प्लान करें.
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए भी अलर्ट है. उत्तराखंड में 14 और 15 जुलाई को जबकि हिमाचल प्रदेश में 14 से 16 जुलाई तक बारिश का अनुमान लगाया गया है.
पहाड़ी इलाकों में बारिश का मतलब अक्सर भूस्खलन, सड़कों पर परेशानी और नदियों में जलस्तर बढ़ने से होता है, इसलिए खास सतर्कता बरतें और सुरक्षित रहें.
कुल मिलाकर, अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहने वाला है. भारी बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाओं से सावधान रहने की जरूरत है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इन वेदर सिस्टम्स के कारण कई जगहों पर जलभराव और आवागमन में बाधा आ सकती है. सभी लोग घर से निकलने से पहले मौसम का अपडेट जरूर चेक करें और जहां ज़रूरत हो वहां प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का पालन करें.
याद रखें, सुरक्षा पहले!








































