देशभर: आसमान में काली घटाएं और धरती पर उमस... अगर आप भी सोच रहे हैं कि इस मॉनसून में मौसम का मूड क्या रहने वाला है, तो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो चेतावनी जारी की है, वो आपकी चिंता थोड़ी बढ़ा सकती है. दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक, समंदर किनारे से लेकर पहाड़ों तक, अगले कुछ दिन मौसम का मिजाज बहुत ही अटपटा रहने वाला है. IMD के ताजा बुलेटिन में साफ-साफ कहा गया है कि देश के कई हिस्सों में अगले 6-7 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश, तूफानी हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. कुल मिलाकर, 18 जुलाई तक का मौसम ऐसा रहने वाला है, जिसकी तैयारी हर किसी को अभी से कर लेनी चाहिए.
मौसम विभाग ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार को लेकर अलर्ट जारी किया है, जहां अगले 2 से 3 दिनों में झमाझम बारिश की संभावना है. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो अगले 4 से 5 दिन तक मॉनसून अपना पूरा जोर दिखाने वाला है.
आज के लिए सबसे बड़ा अलर्ट मेघालय के लिए है, जहां 'बेहद भारी बारिश' का अनुमान जताया गया है. अब आप ही बताइए, जब मौसम विभाग 'बेहद भारी' कहता है, तो बात कितनी गंभीर होती होगी!
क्या बीते 24 घंटे में भी मौसम ने कहर बरपाया?
आपको बता दें, बीते 24 घंटों में (जो 12 जुलाई की सुबह 08:30 बजे तक का डेटा है) मौसम का मिजाज वाकई काफी आक्रामक रहा है. मेघालय में तो बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जहां 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा पानी बरसा.
सोचिए, एक दिन में इतना पानी!
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक मूसलाधार बारिश हुई है, जिसने जनजीवन को खासा प्रभावित किया. उत्तराखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और बिहार में भी 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज की गई.
इसके अलावा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, पंजाब और कच्छ के कुछ अलग-अलग इलाकों में तो 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलीं और आंधी-तूफान भी आया. इतनी तेज़ हवाएं मतलब अच्छा-खासा नुकसान!
सिर्फ इतना ही नहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, मध्य प्रदेश, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और गुजरात क्षेत्र में भी 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं ने दस्तक दी. और इन सब के बीच, तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भीषण लू का प्रकोप भी देखने को मिला.
मतलब, कहीं बारिश की मार तो कहीं गर्मी का सितम, मौसम हर तरह से अपना रंग दिखा रहा था.
मॉनसून का पश्चिमी और पूर्वी छोर क्या कह रहा है?
मौसम प्रणालियों को थोड़ा आसान भाषा में समझें तो मॉनसून ट्रफ का पश्चिमी छोर अभी अपनी सामान्य स्थिति पर टिका हुआ है, लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य से थोड़ा उत्तर दिशा की ओर खिसक गया है. इसके साथ ही, बिहार और असम के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं, जो इन इलाकों में बारिश की गतिविधियों को और तेज कर रहे हैं.
इन्हीं मौसमी सिस्टम के चलते अगले 18 जुलाई तक देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा मौसम रहने वाला है, उसकी पूरी डिटेल IMD ने जारी की है.
उत्तर-पश्चिम भारत में कैसी रहेगी स्थिति?
सबसे पहले बात करते हैं उत्तर-पश्चिम भारत की. यहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 12 जुलाई को व्यापक बारिश दर्ज की गई है.
लेकिन इसके बाद 13 से 18 जुलाई तक यहां छिटपुट बारिश ही देखने को मिलेगी. इस पूरे हफ्ते के दौरान यहां 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बिजली गिरने की भी संभावना है, तो पहाड़ों पर घूमने जाने वालों को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी.
भूस्खलन का खतरा भी बना रहेगा.
देवभूमि उत्तराखंड में 12 से 18 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश का अलर्ट है. यहां बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए जो लोग पहाड़ों पर हैं या जाने का प्लान बना रहे हैं, उन्हें बहुत सतर्क रहना होगा.
हिमाचल प्रदेश में भी लगभग ऐसी ही स्थिति रहने वाली है, जहां 12 जुलाई को खूब बारिश हुई और 13 से 18 जुलाई तक छिटपुट बारिश की उम्मीद है. आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट यहां भी जारी किया गया है.
उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश अक्सर लैंडस्लाइड और बाढ़ का कारण बनती है, ऐसे में प्रशासन और जनता दोनों को ही अलर्ट पर रहना होगा. पहाड़ों में यात्रा के दौरान सतर्कता बहुत जरूरी है.
मध्य और पश्चिमी भारत का क्या हाल रहेगा?
अब रुख करते हैं देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर. छत्तीसगढ़, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के साथ विदर्भ में 12 से 18 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश जारी रहने की संभावना है.
हालांकि, छत्तीसगढ़ में 14 और 15 जुलाई को कुछ ज्यादा भारी बारिश का अनुमान है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं और दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है.
कोंकण और गोवा में मॉनसून का अच्छा असर देखने को मिलेगा. 12 से 14 जुलाई तक यहां छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन असली खेल 15 से 18 जुलाई के बीच होगा, जब यहां भारी और व्यापक बारिश का दौर शुरू होगा.
यहां के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना होगा और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जा सकती है. तेज हवाएं और ऊंची लहरें भी परेशानी बढ़ा सकती हैं.
गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में भी 12 से 18 जुलाई तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है, जो खेती-किसानी के लिए तो अच्छी है लेकिन शहरी इलाकों में जलजमाव की समस्या भी खड़ी कर सकती है. वहीं, मराठवाड़ा में मॉनसून थोड़ा देर से एक्टिव होगा, जहां 14 से 18 जुलाई के बीच छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है.
कुल मिलाकर, इन इलाकों में भी मौसम करवट लेने को तैयार है और लोगों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए.








































